वर्ल्ड हार्ट डे 2018 – रखे अपने दिल का ख्याल


अत्याधुनिक जीवनशैली, गलत खानपान, मधुमेह व ब्लड प्रेशर के कारण लोग दिल की बीमारियों से पीड़ित होते हैं  शोध संस्थानों में शामिल एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय ने कहा कि गलत खानपान व ब्लड प्रेशर दिल की बीमारियों के सबसे बड़े कारण के रूप में सामने आए हैं। इसके बाद तीसरा जोखिम भरा कारक प्रदूषण को बताया गया है।

वातावरण में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 की मात्रा बढ़ने पर यह फेफड़े के जरिये ब्लड में पहुंच जाता है, क्योंकि यह बहुत ही सूक्ष्म कण होता है। इस वजह से धमनियों में ब्लॉकेज होने लगता है जो हार्ट अटैक व स्ट्रोक का कारण बन सकता है।

अब वायु प्रदूषण भी देश में दिल की बीमारियों का तीसरा बड़ा कारण बन गया है पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन, एम्स सहित देश के प्रमुख चिकित्सा व शोध संस्थानों के अध्ययन में यह बात सामने आई है। अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, ढाई दशक में दिल की बीमारियों से मौत और दिव्यांगता दोगुनी बढ़ी है। इसका एक बड़ा कारण प्रदूषण को माना गया है। हाल ही में यह शोध अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल (लांसेट) में प्रकाशित हुआ है। यह शोध रिपोर्ट केंद्र व राज्य सरकारों को इस बात के लिए सचेत कर रही है कि वे प्रदूषण की रोकथाम के लिए कारगर नीति बनाकर उस पर अमल कर सकें। देश में यह पहली शोध रिपोर्ट है, जिसमें प्रदूषण को दिल की बीमारियों के लिए एक बड़ा कारण मना गया है। डॉक्टरों ने वर्ष 1990 से 2016 के बीच देशभर में कार्डियोवैस्कुलर (हृदय वाहिकाओं) की बीमारियों पर अध्ययन किया। जिसमें यह पाया गया कि हर चौथे व्यक्ति की मौत हृदय वाहिकाओं की बीमारी के कारण होती है।

वर्ष 2016 में हृदय वाहिकाओं की बीमारी से 28.1 फीसद लोगों की मौत हुई। इसके अलावा यह 14.1 फीसद लोगों में दिव्यांगता का कारण बनी, जबकि वर्ष 1990 में हृदय वाहिकाओं की बीमारी से 14.1 फीसद लोगों की मौत हुई थी व 6.9 फीसद लोग दिव्यांग हुए थे। हृदय वाहिकाओं की बीमारी में हार्ट अटैक से सबसे अधिक मौत होती हैं। हार्ट अटैक से 17.8 फीसद व स्ट्रोक से 7.1 फीसद लोगों की मौत हुई। वहीं हार्ट अटैक 8.7 फीसद व स्ट्रोक 3.5 फीसद लोगों में दिव्यांगता का कारण बना। हार्ट अटैक से पुरुष अधिक पीड़ित होते हैं।

यह जानना बहुत मुश्‍किल है कि दिल की बीमारी कब किसे अपना शिकार बनाएगी। इसलिए अपने दिल की खुद निगरानी करना बेहद जरूरी होता है।

अपनी उम्र को देखते हुए अगर आपको दिल से संबंधित कोई भी समस्‍या लग रही है तो इन जांचों से पता लगाया जा सकता है कि आपका दिल हार्ट अटैक के मुहाने पर तो नहीं खड़ा है।

ब्‍लड प्रेशर जांच
ग्‍लूकोमीटर से ब्‍लड शुगर की जांच
ऑक्‍सीजन सैचुरेशन
इन जांच के नतीजों को देखने के बाद कार्डियोलॉजिस्‍ट आपसे आगे की जांच के लिए भी कह सकते हैं। यह हैं

ईसीजी
ब्‍लड हार्ट अटैक मार्कर्स
ट्रोपोनिन I या ट्रोपोनिन T आदर्श रूप से पॉजिटिव या नेगेटिव रिपोर्ट की जगह खून के लेवेल की जांच की जानी चाहिए।

सीपीकेएमबी जांच भी की जा सकती है। हालांकि अब सीपीके टोटल और सीपीकेएमबी के लिए डॉक्‍टर नहीं कहते हैं।

सिरम मायोग्‍लोबिन
2-डी ईकोकार्डियोग्राफी (इमर्जेंसी में)
कारोनरी एंजियोग्राफी : यह उन मामलों में की जाती है, जहां ज्‍यादातर दिल के दौरे (एमआई मायोकार्डियल इनफ्रैक्‍शन) के लक्षण पता चल चुके होते हैं।
मोटे लोगों को हार्ट अटैक आने के चांस ज्यादा रहते हैं। यह एक स्टडी में भी सामने आया है। ऑस्ट्रेलिया के एडीलेड विश्विद्यालय की एक रिसर्च के मुताबिक, मोटापे से ब्लड सर्कुलेशन में दिक्कत आती है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। रिसर्च में यह भी पता चला है कि मोटापे से हार्ट की मांसपेशियों की संरचना और आकार में बदलाव आता हैं और इनका काम भी प्रभावित होता है। इसकी वजह से एट्रियल फिब्रिलेशन नामक ह्दय गति विकार की समस्या उत्पन्न होती है, जो हार्ट अटैक होने की एक खास वजह होती है। शांता फर्टिलिटी सेंटर की आईवीएफ एक्सपर्ट डॉक्टर अनुभा सिंह ने बताया कि सही वक्त पर हेल्दी डाइट लेने से हेल्थ ठीक रहती है और मोटापा भी नहीं बढ़ता।

स्मोकिंग और ऐल्कॉहॉल के सेवन से हार्ट प्रॉब्लम्स बढ़ जाती हैं। जो लोग अधिक स्मोकिंग करते है, उनकी हार्ट में ब्लड पहुंचाने वाली नब्ज ब्लॉक हो जाती है जो कि हार्ट अटैक की वजह बनती है। ज्यादा शराब पीने वालों में इसके सेवन से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। दिल की धड़कन अनियमित होती है और स्ट्रोक्स होते हैं। इतना ही नहीं, यह दिल की सामान्य क्रियाकलाप में व्यवधान पैदा करता है।

तनाव दिल की समस्याओं का सबसे बड़ा कारण है। इससे दर्द और तकलीफ हो सकती है। चिंता और अवसाद की भावनाएं पैदा हो सकती हैं और आपका एनर्जी लेवल डाउन होता है। तनाव को दूर रखने का प्रयास करें। काम के अलावा अन्य गतिविधियों की तलाश करें, जो तनाव के स्तर को नीचे रखने में मदद करें। एक शौक या एक सकारात्मक आत्म-चर्चा करें, संगीत सुनें या अच्छी किताब पढ़ें या ध्यान करें।
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