कॉल सेंटर से जुटाएगी चंदा - चुनाव 2019 से पहले AAP का पैसा खत्म

कॉल सेंटर से जुटाएगी चंदा - चुनाव 2019 से पहले AAP का पैसा खत्म

आगामी 2019 लोकसभा चुनाव को देखते हुए आम आदमी पार्टी ने चंदा जुटाने का फैसला किया है. आम आदमी पार्टी ने तालकटोरा स्टेडियम में सोमवार को पार्टी के मासिक चंदा अभियान का आगाज किया। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों से अपील की कि अगर आप ईमानदार सरकार दोबारा चाहते हैं तो ‘आप’ को चंदा देना पड़ेगा।

इस कैंपेन के लिए "आप का दान, राष्ट्र का निर्माण" का नारा दिया गया है. इस सम्मेलन में देशभर से आए पार्टी के तमाम कार्यकर्ता, विधायक, सांसद, पार्षद और पदाधिकारी मौजूद रहे.

दिल्ली सरकार में डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी कार्यकर्ताओं से चंदे की अपील करते नजर आए. उन्होंने कहा कि सरकार के पास पैसे की कमी नहीं बल्कि पार्टी में पैसे की कमी है. जंतर-मंतर में लोग गांव गांव से चंदा लेकर आते थे. अब उसी जनता के बीच जाकर चंदा मांगेंगे. इतना तय है कि देश की राजनीति दलाली के चंदे से नहीं चलेगी.

आम आदमी पार्टी के मुताबिक इस अभियान को पूरे देश में चलाया जाएगा. चंदा जुटाने के लिए न सिर्फ सोशल मीडिया बल्कि घर - घर जाकर लोगों से हर महीने एक किस्‍त की तर्ज पर, पार्टी को चंदा देने की अपील की जाएगी. इस अभियान के लिए पार्टी ने एक मोबाइल नंबर  9871010101 जारी किया है. जो भी उस नंबर पर मिस कॉल करेगा, पार्टी द्वारा हायर कॉल सेंटर की तरफ से उस व्यक्ति को कॉल जाएगा और टीम उनसे चंदे के लिए संपर्क करेगी. पार्टी नेता गोपाल राय ने बताया कि आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य पृथ्वी रेड्डी इस अभियान के इंचार्ज होंगे. वहीं केजरीवाल ने कहा कि पूरे देश में मोबाइल नंबर 9871010101 का प्रचार किया जायेगा.

आम आदमी पार्टी के मुताबिक ये अभियान RBI द्वारा लागू E NACH फॉर्म के तहत होगा. टीम इसके तहत सहयोग राशि देने वालों से संपर्क करके ये फॉर्म भरवाएगी और मासिक सहायता लेगी. अगर कोई एक बार ही सहयोग करना चाहता है तो वो चेक ये क्रेडिट कार्ड से कर सकता. साथ ही अगर कोई कैश में सहयोग करना चाहता है तो 2000 की राशि तक सहयोग कर सकता है. कैश और एक बार सहायता देने वालों से भी पार्टी ENACH फॉर्म भरवाएगी. जो भी पार्टी को सहयोग राशि देगा उन्हें SMS, ई मेल या अन्य माध्यम से रसीद भी भेजी जाएगी.

केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी के हर एक कार्यकर्ता को अपने साथ ऐसे 5 लोगों को जोड़ना होगा जो पार्टी को हर महीने चंदा दें. केजरीवाल ने मंच से एलान किया कि वो अपनी सैलरी से 10 हजार रुपये, उनकी पत्नी और बेटी 5 हजार रुपये, इसके अलावा पिता हर महीने आम आदमी पार्टी को 500 रुपए का चंदा देंगे.
केजरीवाल का मानना है कि आम आदमी पार्टी में अब तक व्यवस्थित तरीके से चंदा नहीं लिया जाता था लेकिन होम डिलीवरी और मोहल्ला क्लीनिक की तरह आम आदमी पार्टी का नया चंदा अभियान भी दुनिया में एक मॉडल बनेगा. उन्‍होंने कहा कि आम आदमी पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए पैसा चाहिए. हर पार्टी वॉलेंटियर का धर्म है कि कम से कम 100 रु महीना चंदा दे. जिसकी जितनी श्रद्धा है उतना चंदा दे. इसके अलावा वॉलेंटियर के परिवार को भी चंदा देना होगा. दिल्ली के जिन लोगों को लगता है, शिक्षा बेहतर हुई वो पैरेंट्स 100 रु का चंदा दें ताकि हम ऐसे ही ईमानदारी से काम करें. जिन लोगों के बिजली बिल कम हुए वो भी पार्टी को चंदा दें. जिनका मोहल्ला क्लीनिक या अस्पताल में इलाज हुआ, वो हर महीने पार्टी को चंदा दें.

राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बताया कि अलग-अलग राजनीतिक दलों में चंदा लेने की अपनी तकनीक है.  वाम पंथी दल के छोटे से छोटे कर्मचारी और विधायक भी अपनी सैलरी का एक हिस्सा चंदे के रूप में जमा करते हैं.  कैंपेन लांच के दौरान संजय सिंह ने अपनी सैलरी से 21 हजार रुपये पार्टी को चंदा देने का एलान भी किया है.  साथ ही संजय सिंह के नौकरी से रिटायर्ड माता-पिता भी पार्टी को चंदा देंगे.  दिल्ली संयोजक और मंत्री गोपाल राय ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल सत्ता बनने के बाद सत्ता के पैसे से पार्टी चलाते हैं लेकिन आम आदमी पार्टी समर्थकों को राष्ट्र निर्माण के लिए एक परिवार की तरह पार्टी का ख्याल रखना होगा और 'भिक्षामि देहि' अभियान चलाना होगा.

‘आप’ के मासिक चंदा अभियान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पिता और पत्नी भी मौजूद रहे। उन्होंने पार्टी को हर महीने चंदा देने का संकल्प लिया और चंदा देकर इसकी शुरुआत की। केजरीवाल ने पदाधिकारियों से कहा कि वह भी अपने परिवार में जो कमा रहे हैं, उनसे पार्टी को कम से कम 100 रुपये हर माह चंदा देने के लिए कहें।

जनता से चंदा मांगने की वजह साफ करते हुए केजरीवाल ने कहा कि हमने दिल्ली में साढ़े तीन साल में 4 बजट पेश किए और मोटे तौर पर 2 लाख करोड़ खर्च किए। अगर मैं हर ठेकेदार से ठेके की एक पर्सेंट रकम भी पार्टी फंड में जमा कराने के लिए कहता, तो 2 हजार करोड़ रुपये पार्टी के पास इकट्ठा हो जाते, लेकिन फिर आपकी बिजली सस्ती नहीं होती, स्कूल और अस्पताल नहीं बनते, सड़कें नहीं बनतीं, मोहल्ला क्लिनिक नहीं बनते, फ्लाईओवर नहीं बनते। अगर मैं बिजली कंपनियों को 50 पैसे यूनिट भी बिजली के रेट बढ़ाने देता, तो ये कंपनियां शाम तक 100 करोड़ रुपये पार्टी फंड में दे देती। अभी तक कांग्रेस और बीजेपी की सरकारों में यही चलता आया है कि सरकार कंगाल, पार्टी मालामाल मगर ऐसा पहली बार हो रहा है कि सरकार तो मालामाल है, मगर पार्टी कंगाल।

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