दुविधा खत्म मानवेंद्र कांग्रेस में...

भाजपा के संस्थापक सदस्य रहे जसवंत सिंह जसोल के पुत्र शिव विधायक मानवेंद्र सिंह की 17 अक्टूबर को कांग्रेस में ताजपोशी होगी


भाजपा के संस्थापक सदस्य रहे जसवंत सिंह जसोल के पुत्र शिव विधायक मानवेंद्र सिंह की 17 अक्टूबर को कांग्रेस में ताजपोशी होगी, मानवेंद्र को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी की सदस्यता दिलाएंगे, राहुल ने मानवेंद्र को दिल्ली स्थित अपने आवास पर बुलाया है, मानवेंद्र के कांग्रेस में शामिल होने के इस निर्णय से भाजपा को बड़ा झटका लगा है,भाजपा के कद्दावर नेता पूर्व विदेशमंत्री जसवंत सिंह के पुत्र और शिव विधायक मानवेंद्र सिंह ने अपने पिता को पिछली लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर 22 सितम्बर को पचपदरा में स्वाभिमान सभा करते हुए भाजपा को छोड़ने का एलान किया था, उनके साथ ही सभी समर्थकों ने भी भाजपा को छोड़ने की बात कहते हुए 'कमल का फूल, मेरी भूल' का नारा भी बुलंद किया था, उसके बाद से ही उनकी कांग्रेस में जाने की अटकलें चल रही थी, सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस में जाने को लेकर रखी गई शर्तों पर बातचीत के चलते ही अभी तक मानवेंद्र कांग्रेस में शामिल नहीं हो सके थे, लेकिन, बताया जा रहा है कि मानवेंद्र ने जो भी शर्तें रखी थी, उनमें से अधिकतर पर सहमति बन चुकी है, इसके बाद अब मानवेंद्र 17 अक्टूबर को दिल्ली में राहुल गांधी के आवास पर उनके सामने कांग्रेस का दामन थामेंगे, बुधवार को दिल्ली में वे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के घर पर मुलाकात कर कांग्रेस की सदस्यता लेंगे, इस दौरान राजस्थान में कांग्रेस से जुड़े राजपूत समाज के अधिकांश नेता मौजूद रहेंगे, मानवेन्द्र के कांग्रेस में शामिल होने से सीमावर्ती बाड़मेर-जैसलमेर की सियासत में कई बदलाव देखने को मिलेंगे, हालांकि, यह देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस में मानवेन्द्र को कितनी तवज्जों मिलतीहै ,पिछले लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के पश्चात जसवंत सिंह के बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ने के बाद से मानवेन्द्र को भाजपा ने कोई तवज्जों नहीं दी थी,उपेक्षित मानवेन्द्र ने पिछले माह पचपदरा में स्वाभिमान रैली कर भाजपा से इस्तीफा दे दिया था, इसके बाद से उनके कांग्रेस में शामिल होने को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, मानवेन्द्र के कांग्रेस में आते ही मारवाड़ की सियासत में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं, बाड़मेर में कांग्रेस की राजनीति हमेशा जाट आधारित रही है, सिर्फ एक ही चुनाव में जाट और राजपूत दोनों एक साथ रहे हैं, जबकि आमतौर पर यह दोनों अलग-अलग पार्टी के साथ खड़े रहे हैं, वर्ष 1989 में जाट और समुदायों के बीच एकता नजर आई थी, उस समय जनता दल के प्रत्याशी कल्याण सिंह कालवी के पक्ष में नाथूराम मिर्धा ने जाटों को भी लामबंद किया था, यही कारण रहा कि कालवी आसानी से चुनाव जीत गए, मानवेन्द्र के कांग्रेस में शामिल होने से अब एक बार फिर कुछ ऐसे ही समीकरण बनते नजर आ रहे हैं।

कांग्रेस शिव विधानसभा सीट पर मुस्लिम प्रत्याशी को उतारती रही है, ऐसे में देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस अपने परम्परागत मुस्लिम मतदाताओं को किस तरह से साधेगी, उनके समर्थक भी कांग्रेस में शामिल हो जाएंगे, इस दौरान पीसीसी चीफ सचिन पायलट सहित कई बड़े नेताओं के भी मौजूद रहने की संभावना है, सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में सदस्यता ग्रहण करने के बाद मानवेंद्र अपने समर्थकों के साथ जोधपुर में बड़ी रैली कर सकते हैं, इस कार्यक्रम में कांग्रेस के बड़े नेताओं के भी शामिल होने की संभावना है, आपको बता दें कि मानवेंद्र पहले से लोकसभा चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं, उन्होंने साफ किया है कि वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, उनके भाई के विधानसभा चुनाव में उतरने की चर्चा सामने आ रही है, पूर्व विदेशमंत्री जसवंत सिंह भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं, पिछले पांच दशक से भी अधिक समय से वे भाजपा झंडा थामे रहे, लेकिन, 2014 के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर वे निर्दलीय चुनाव के मैदान में उतरे थे, इस चुनाव में हारने के बाद से मानवेंद्र सिंह भाजपा से नाराज चल रहे थे, इसी नाराजगी की वजह से उन्होंने पार्टी को छोड़कर कांग्रेस में जाने का निर्णय किया है, वहीं, मानवेंद्र के कांग्रेस में जाने के निर्णय को भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, माना जा रहा है कि उनके कांग्रेस में जाने पर पश्चिमी राजस्थान के राजपूत वोट भी कांग्रेस की तरफ खिसक सकता है।
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