गहलोत का धोनी स्टाइल हैलीकॉप्टर शॉट, कहा कौन बनेगा करोड़पति किसे पता



बाड़मेर की शिव विधानसभा से भाजपा के विधायक बने मानवेंद्र सिंह ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली है, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में बुधवार को मानवेंद्र, उनकी पत्नी चित्रा और भाई भूपेंद्र सिंह कांग्रेस में शामिल हुए, मानवेंद्र भाजपा के संस्थापक सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के बेटे हैं।
गहलोत का धोनी स्टाइल  हैलीकॉप्टर शॉट कहा  कौन बनेगा करोड़पति किसी को पहले पता पड़ता है क्या - CM कौन होगा
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बाड़मेर की शिव विधानसभा से भाजपा के विधायक मानवेंद्र सिंह ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली है, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में बुधवार को मानवेंद्र, उनकी पत्नी चित्रा और भाई भूपेंद्र सिंह कांग्रेस में शामिल हुए, मानवेंद्र भाजपा के संस्थापक सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के बेटे हैं।

इस अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में हुई प्रेस कांफ्रेंस में राजस्थान के सीएम के सवाल पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत ने धोनी स्टाइल 'हेलीकॉप्टर शॉट' मारा, उन्होंने कहा कि कौन बनेगा करोड़पति खेलते समय क्या पहले पता चलता है कि सीएम कौन बनेगा, मानवेंद्र के कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रेस वार्ता चल रही थी, इस दौरान राजस्थान में सीएम कौन होगा यह प्रश्न पूछने पर गहलोत ने अपने अंदाज में जवाब दिया, उन्होंने इसे कौन बनेगा करोड़पति खेल से जोड़ते हुए कहा क्या उसमें पता चलता है कि कौन सीएम बनेगा, उनके इस जवाब के बाद पूरे परिसर में सभी की हंसी फूट पड़ी, दरअसल, राजस्थान के चुनाव की आहट होने के साथ ही सीएम को लेकर कांग्रेस के भीतर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ सचिन पायलट के बीच द्वंद जारी है, पार्टी इन्हीं दोनों नेताओं को भरोसे चुनावी राह पर आगे बढ़ रही है, लेकिन, बीच बीच में गहलोत-पायलट के बीच सीएम की कुर्सी को लेकर हुई बयानबाजी से नाराज पार्टी हाईकमान ने दोनों नेताओं को फटकार लगाते हुए एक साथ काम करने के निर्देश दिए थे, इसके बाद से गहलोत और पायलट एक साथ चुनाव के मैदान में नजर आते हुए एकजुटता का संदेश दे रहे हैं, हालांकि, हाल में राजस्थान के दौरे पर रहने के दौरान राहुल की ओर से धौलपुर से महुवा तक रोड-शो के दौरान एक सभा में कही एक बात के बाद से सियासी हलचल तेज हो गई है ।

इस सभा के दौरान राहुल ने कहा था कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान कार्यकर्ताओं की कम सुनवाई हुई थी, लेकिन, इस बार बनने वाली सरकार जनता और कार्यकर्ताओं की होगी, इस सरकार में सीएम से लेकर मंत्री तक के दरवाजे जनता और कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा खुले रहेंगे, प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत ने बड़ा खुलासा किया है, उन्होंने कहा कि पूर्व विदेशमंत्री जसवंत सिंह पीएम पद के कैंडिडेट थे, उन्हें जानबूझकर टार्गेट किया गया था, उन्होंने कहा कि पूर्व विदेशमंत्री जसवंत सिंह का टिकट किसी समीकरण की वजह से नहीं, बल्कि वसुंधरा राजे ने किसी से मिलीभगत करके कटवाया था, केवल उनका टिकट ही नहीं कटवाया गया था, बल्कि उन्हें हराने की दिशा में भी काम किया गया था, गहलोत ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सरकार में विदेशमंत्री से लेकर रक्षामंत्री का पद संभालने वाले जसवंत सिंह खुद पीएम पद के दावेदार थे, इसलिए उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में टार्गेट किया गया, पार्टी को अपनी मेहनत से सींचने वाले जसवंत सिंह का टिकट राजनीतिक षडयंत्र के तहत काटा गया था, इस दौरान गहलोत ने मुख्यंत्री वसुंधरा राजे पर भी निशाना साधा, उन्होंने कहा कि वसुंधरा को राजस्थान का नेतृत्व संभलवाने में पूर्व उपराष्ट्रपति रहे भैरोसिंह शेखावत और जसवंत सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण थी, गहलोत ने आरोप लगाया कि वसुंधरा ने भैरोसिंह शेखावत के साथ भी काफी बुरा व्यवहार किया था, अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने एक बार भी शेखावत को कार्यक्रम तक में नहीं बुलाया, इसी प्रकार जसवंत सिंह के साथ भी किया गया, गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी का क्या हाल हुआ है, इसके बारे में सभी जानते हैं।

चुनाव में उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया था,इससे आहत होकर जसवंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था, जिसमें वे हार गए थे,पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ने पर बाद में उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया गया था, इस घटना से नाराज होने के बाद साढ़े चार साल की राजनीतिक चुप्पी के बाद मानवेंद्र ने भाजपा को छोड़कर अब कांग्रेस का दामन थाम लिया है, उनके इस कदम को राजस्थान में भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, वहीं, मानवेंद्र के कांग्रेस में शामिल होने के बाद नए राजनीतिक समीकरण बनते नजर आ रहे हैं, राहुल के आवास पर राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट ने मानवेंद्र को सदस्यता दिलाई,इस दौरान बाड़मेर के पूर्व सांसद हरीश चौधरी और अन्य पदाधिकारी मौजूद थे, मानवेंद्र ने 22 सितंबर को पचपदरा में स्वाभिमान रैली की थी, इसी रैली में उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया था, मानवेन्द्र ने रैली में कहा था- कमल का फूल, हमारी भूल।

पिछले विधानसभा चुनाव में राजपूत और जाट समाज ने भाजपा के पक्ष में वोट डाले थे, मारवाड़ में 42 विधानसभा सीटों पर 11 विधायक राजपूत हैं, राजस्थान में राजपूत समाज भाजपा का परम्परागत वोट बैंक रहा है, लेकिन, मानवेन्द्र के कांग्रेस में आने से भाजपा को नुकसान हो सकता है,कई मसलों पर राजपूत समाज और राज्य की भाजपा सरकार के बीच मतभेद भी सामने आए, गत लोकसभा चुनाव में बाड़मेर-जैसलमेर संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ने के बाद भाजपा ने जसवंत सिंह को पार्टी से निकाल दिया था, चुनाव के कुछ दिन बाद 7 अगस्त 2014 को जसवंत दिल्ली स्थित अपने आवास के बाथरूम में फिसल कर गिर गए थे, उनके सिर में आई गंभीर चोट के कारण वे तब से कोमा में हैं।

शिव विधानसभा सीट जहां से मानवेंद्र खुद विधायक हैं, ये एक मुस्लिम-राजपूत वर्चस्व वाली सीट है, बाड़मेर सीट पर पूरी तरह से पर जाटों का प्रभुत्व है, बायतु स्पष्ट रूप से जाट वर्चस्व वाली सीट है, पचपदरा ओबीसी है, गुडामालानी कलबी-जाट है और चोहटन में सिंधी मुसलमानों का दबदबा है, जैसलमेर और पोकरण विधानसभा सीट पर राजपूत-मुस्लिम वर्चस्व की लड़ाई में उलझे हैं वहीं सीमा पार पाकिस्तान के विभिन्न धार्मिक स्थल भी इलाके की राजनीति पर सीधा प्रभाव रखते है, जसवंत सिंह ने जब चुनाव लड़ा था तो ऐसी स्थिति में मुस्लिम-दलित-राजपूत कॉम्बिनेशन में ही वो 4 लाख से ज्यादा वोट लेने में कामयाब हुए थे लेकिन मानवेन्द्र को बाड़मेर की राजनीति में जसवंत के बेटे की तरह ही पहचाना जाता है, जसवंत जब अस्वस्थ है ऐसे में जसवंत सिंह के बिना मानवेन्द्र किस तरह से खुद की विरासत को बचा सकेंगे ये देखने की बात होगी, मानवेन्द्र सिंह विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे क्योंकि वर्तमान से वो जिस शिव सीट से विधायक है, वो कांग्रेस की परम्परागत तौर पर मुस्लिम सीट है, इसके बाद बाड़मेर में मानवेन्द्र या उनकी पत्नी के पास विधानसभा की सीट के तौर पर केवल सिवाना सीट बचती है, जहां से कहा जा रहा है कि मानवेन्द्र की पत्नी चित्रा सिंह चुनावी समर में उतर सकती हैं ।

कहा जा रहा है कि मानवेन्द्र ने कांग्रेस से दो विधानसभा सीट जैसलमेर और पोकरण मांगी है जैसलमेर जहां राजपूत प्रभाव वाली सीट है तो वहीं पोकरण में मुस्लिम राजपूत में मुकाबला होता रहा है, मुस्लिम कांग्रेस का कोर वोट है ऐसे में कांग्रेस मुस्लिमों को नाराज नहीं कर सकती है, लेकिन कहा जा रहा है कि मानवेन्द्र पोकरण से गाजी फकीर के परिवार को किसी पड़ोस की सीट पर शिफ्ट होने के लिए मना रहे हैं ताकी जैसलमेर और पोकरण सीट पर मानवेन्द्र का ही हस्तक्षेप हो जाये और जिसे मानवेन्द्र चाहे उसे इन सीटों पर जीता सके, अगर गाजी फकीर का परिवार इसके लिए राजी नहीं होता है तो फिर मानवेन्द्र के सामने मुसीबत और बढ़ जायेगी क्योंकि इस कॉम्बिनेशन के बिना ना तो मानवेन्द्र विधानसभा में किसी सीट पर जीत सकतें है ना ही लोकसभा चुनावों में ।
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