अमिताभ बच्चन की फिल्मे और उनके जीवन से जुडी कुछ रहस्मयी बातें


एंग्री यंग मैन, शहंशाह, बिग बी, मेगास्टार, महानायक चाहे हम किसी भी नाम से पुकारें अमिताभ बच्चन के लिए नाम ही काफी है, वह किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं, हिन्दी सिनेमा में चार दशकों से ज्यादा का वक्त बिता चुके अमिताभ बच्चन को उनकी फिल्मों से ‘एंग्री यंग मैन’ की उपाधि प्राप्त है|

हिंदी फिल्म जगत के शहंशाह अमिताभ बच्चन भारत के सबसे सफल, लोकप्रियता तथा ज्यादा समय तक ‘सुपर स्टार’  रहने का गौरव पाने वाले अभिनेता हैं।

सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के तौर पर उन्हें 3 बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है, इसके अलावा 14 बार उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड भी मिल चुका है, लेकिन इस सफलता के पीछे छिपा हुआ संघर्ष बहुत ही कम लोगों को पता हो, अमिताभ ने फिल्मों में आने से पहले संघर्ष किया और एक बार जब उन्होंने फिल्मों में कदम रख दिया तब फ्लॉप फिल्मों की वजह से उनका रास्ता और भी कठिन हो गया, बहुत सारे लोगों ने तो उन्हें घर वापस जाने की बात कही लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी

अमिताभ बच्चन का जन्म इलाहाबाद में हुआ था, उनके पिता का नाम हरिवंश राय बच्चन था, उनके पिता हिंदी जगत के मशहूर कवि रहे हैं, उनकी मां का नाम तेजी बच्चन था, उनके एक छोटे भाई भी हैं जिनका नाम अजिताभ है, अमिताभ का नाम पहले इंकलाब रखा गया था लेकिन उनके पिता के साथी रहे कवि सुमित्रानंदन पंत के कहने पर उनका नाम अमिताभ रखा गया, राजीव गांधी से दोस्ती होने के कारण उन्हें फिल्मों में आने के कारण ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा और 1969 में उन्हें ए अब्बास की फिल्म सात हिंदुस्तानी में मौका मिल गया लेकिन दुर्भाग्य से से यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी और बहुत बुरी तरह फ्लॉप हो गई।

अमिताभ ने अपने प्रयासों को जारी रखा और हिम्मत नहीं हारे तभी एक समय आया की उन्हें सुपर स्टार राजेश खन्ना के साथ आनंद मूवी में काम करने का मौका मिला इसके बाद अमिताभ बच्चन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा,  उन्हें इस फिल्म के लिए फिल्मफेयर अवार्ड बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए दिया गया, वह लोगों को पसंद किए जाने लगे लेकिन उनकी कामयाबी 13 फिल्मों के बाद 1973 में प्रकाश मेहरा की फिल्म जंजीर से शुरू हुई, इस फिल्म में एक अनाथ की कहानी थी जो कि अपने माता-पिता का खून होते हुए देखता है और बड़ा होकर पुलिस ऑफिसर बनता है, यह फिल्म उस समय की सबसे सफल फिल्मों में से एक थी, इस फिल्म से अमिताभ बच्चन रातों-रात सुपरस्टार हो गए, उन्हें लोग एंग्री यंग मैन के नाम से जानने लगे।

पहले दस सालों में उन्होंने जिन फिल्मों में काम किया उनमें 'ज़ंजीर', 'दीवार', 'शोले', 'डॉन' और 'काला पत्थर' में उनके किरदार काफी पसंद किए गए, इस दौरान उन्होंने 'अभिमान', 'आनंद', 'मिली', 'चुपके चुपके' जैसी क्लासिक फिल्मों में भी काम किया, इनमें से ज्यादातर फिल्मों में उन्होंने शांत युवा के किरदार निभाए थे लेकिन 'चुपके-चुपके' में उन्होंने अपनी जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग से सभी को अचंभित किया, इस दौर में अमिताभ ने गुस्सैल युवा के किरदार निभाने के साथ-साथ कॉमेडी और ड्रामेटिक फिल्मों में भी हाथ आज़माया, इसी दौर में वह बॉलीवुड के 'एंग्री यंग मैन' के रूप में प्रसिद्ध हुए|

 इस दशक में अमिताभ बच्चन ने कई मल्टीस्टारर फिल्मों में काम किया जिनमें शशि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, विनोद खन्ना, ऋषि कपूर जैसे अभिनेता उनके सहकलाकार रहे, इनमें से ज्यादातर फिल्मों की कहानी प्यार, दोस्ती और कुर्बानी पर आधारित रही, इनमें 'दोस्ताना', 'याराना' और 'नसीब' और 'सिलसिला' काफी सफल रहीं, नब्बे के दशक में अमिताभ बच्चन के करियर ग्राफ में थोड़ा उतार आया, उन्होंने कई कमज़ोर और फ्लॉप फिल्मों में काम किया जिनमें 'अजूबा', 'मेजर साब', 'लाल बादशाह' और 'हिंदुस्तान की कसम' प्रमुख हैं, इस दशक में आई 'हम', 'सूर्यवंशम' और 'अग्निपथ' उनकी बेहतरीन फिल्मों में शामिल हुईं लेकिन फिर भी यह दशक उनके लिए खास नहीं रहा, इस दशक में अमिताभ बच्चन एक मेगास्टार के रूप में उभरे और सशक्त किरदारों में खुद को स्थापित किया, उन्होंने बॉलीवुड में पिता के किरदारों को एक नया आयाम दिया, उन्होंने साल 2000 में आई आदित्य चोपड़ा की 'मोहब्बतें' में उन्होंने एक सख्त पिता और नियमों के पक्के गुरुकुल संचालक की भूमिका निभाई, इसी तरह 'कभी खुशी कभी गम' में वह सख्त अमीर पिता के रूप में नज़र आए जो अपनी पसंद की लड़की से शादी न करने पर बेटे को छोड़ देते हैं, हालांकि अंत में दोनों ही फिल्मों में उनका हृदय परिवर्तन होता है|

फिल्म 'अरमान' में बिगबी ने  अनिल कपूर के पिता का किरदार निभाया, जिसमें वह एक दोस्त के रूप में अनिल को सपोर्ट करते हैं, इसके बाद 'बागबान' आई जो माता-पिता और बच्चों के रिश्तों को दिखाने वाली एक बेहतरीन फिल्म है, इसी दशक में उन्होंने 'सरकार', 'चीनी कम', 'ब्लैक', 'भूतनाथ' और 'पा' जैसी फिल्मों में काम किया, इस दशक में उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक महत्व की कई फिल्मों में काम किया, इनमें प्रकाश झा की आरक्षण और सत्याग्रह शामिल हैं, आरक्षण में उन्होंने शिक्षा के व्यवसायीकरण पर सवाल उठाए वहीं सत्याग्रह में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाते आम आदमी की भूमिका निभाई|

आज के दिन में अमिताभ के पास एक खास मुकाम है उन्‍होंने टीवी की दुनिया में भी बुलंदियों के झंडे गाड़े हैं और उनके द्वारा होस्‍ट किया गया केबीसी बहुत पापुलर हुआ, इसने टीआरपी के सारे रिकार्ड तोड़ दिए और इस प्रोग्राम के जरिए कई लोग करोड़पति बने, इन्हें फ़्रांस के एक शहर द्युविले की मानद नागरिकता भी इनके योगदान को देखकर मिली है जो किसी भी विदेशी नागरिक के लिए न केवल सम्मान की बात है बल्कि बहुत ही दुर्लभ लोगो के पास ये है क्योंकि यह केवल ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय के पास और पहली बार अंतरिक्ष में प्रवेश करने वाले रूसी अंतरिक्ष यात्री यूरी गागारिन तथा पोप जॉन पॉल द्वितीय को ही दिया गया है, अमिताभ बच्चन अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि हरिवंश राय बच्चन का पुत्र होना मानते हैं, उनका कहना है पिताजी ने मेरे हर फैसले में मेरा साथ दिया था, अमिताभ बच्चन जी हम सब के लिए एक आदर्श है जो कई दशकों से लोगों के दिलों पर राज करते हैं और करते रहेंगे, फिल्मों के साथ साथ वे गायक, निर्माता और टीवी प्रिजेंटर भी रहे हैं, भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण सम्मान से भी नवाजा है।
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