अयोध्या विवाद की सुनवाई जनवरी 2019 तक टली

अयोध्या विवाद की सुनवाई जनवरी 2019 तक टली

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर होने वाली सुनवाई एक बार फिर टल गई है. अब ये सुनवाई जनवरी 2019 में होगी. देश में राम मंदिर निर्माण को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट में आज अयोध्या विवाद पर सुनवाई हुई. सोमवार को अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई मात्र 3 मिनट में ही टल गई. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने अब इस मामले के लिए जनवरी, 2019 की तारीख तय की है. यानी अब ये मामला करीब 3 महीने बाद ही कोर्ट में उठेगा. अब जनवरी 2019 में ही इस बात का निर्णय होगा कि किस बेंच के सामने इस मामले की सुनवाई की जाएगी और किस तारीख को सुनवाई की जाएगी।

आज की सुनवाई में विवादित भूमि को तीन भागों में बांटने वाले 2010 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर होनी थी. सोमवार की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई समेत जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के. एम जोसफ की पीठ ने की. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि ये मामला अर्जेंट सुनवाई के तहत नहीं सुना जा सकता है.

इस मामले में कोर्ट का फैसला कब तक आ पाएगा ये नहीं कहा जा सकता, लेकिन राम मंदिर निर्माण के पक्षकारों और इसका समर्थन करने वाले दलों ने स्वर तेज कर दिए हैं. बीजेपी नेता इस मामले की जल्दी सुनवाई का आह्वान कर रहे हैं.

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, 'अब हिन्दुओं का सब्र टूट रहा है। मुझे भय है कि अगर हिन्दुओं का सब्र टूटा तो क्या होगा?

हिंदू पक्षकार संत धर्मानंद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सही नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'चुनाव को देख डेट नहीं बढ़ना चाहिए। यह प्रॉपर्टी का मामला है। अब हमें इंतजार ही करना होगा। हमें आंदोलन नहीं करना है। हम चाहते थे कि इस मामले में जल्द निर्णय हो।

संतों ने सरकार को इस मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है कि मंदिर निर्माण में देरी वे बर्दाश्त नहीं करेंगे. संतों का कहना है कि क्या भाजपा मंदिर निर्माण का अपना वादा भूल गई है और क्यों सुप्रीम कोर्ट के फैसले के इंतज़ार का बयान पार्टी की ओर से बार-बार दिया जा रहा है. सुनवाई से पहले केंद्र में मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि अब हिंदुओं का सब्र टूट रहा है. सुनवाई टलने के बाद अयोध्या के संतों ने भी पूछा कि बार-बार क्यों सुनवाई टल रही है.

संतों के एक बड़े वर्ग और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े महंतों ने इस वर्ष 6 दिसंबर से अयोध्या में मंदिर निर्माण की घोषणा कर दी है. संत समाज का कहना है कि वो मंदिर निर्माण का काम शुरू कर देंगे, सरकार रोकना चाहती है तो रोके.

संतों का यह आह्वान सरकार के लिए कम चुनौतीपूर्ण नहीं है. केंद्र की मोदी सरकार और राज्य में योगी सरकार के लिए यह बहुत मुश्किल होगा कि संतों को रोकने के लिए वे किसी भी प्रकार का बल प्रयोग करें. इससे भाजपा को अपने समर्थकों के बीच खासा नुकसान झेलना पड़ सकता है.

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