संतों का सरकार को अल्टीमेटम जल्द बनाओ राम मंदिर


अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में निर्णायक सुनवाई शुरू होने से पहले संतों ने केंद्र की सत्तारूढ़ NDA सरकार को चेतावनी दी है। दिल्ली में संतों की उच्चाधिकार समिति की हुई बैठक में संतों ने आगाह करते हुए कहा कि 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले अगर राम मंदिर का निर्माण नहीं होता है तो सत्तारूढ़ पार्टी (BJP) चुनाव हार सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक संतों ने धमकी दी है, 'अगर सरकार डेडलाइन नहीं देती है तो आंदोलन और विद्रोह ही एकमात्र विकल्प बचेगा। शुक्रवार को हुई अहम बैठक में संतों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार को चार महीने का अल्टीमेटम दिया है. शुक्रवार को संतों की बैठक के दौरान विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मंदिर पर एक प्रस्ताव भी पास किया, जिसमें बहु-प्रतीक्षित राम मंदिर के निर्माण के लिए एक बिल लाने की मांग की गई है। VHP के नेतृत्व में संतों के पैनल ने राम मंदिर निर्माण की डेडलाइन देने के लिए दबाव ऐसे समय में बनाया है जब कुछ दिन बाद 29 अक्टूबर से सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या केस पर सुनवाई शुरू होने वाली है। VHP ने कहा है कि अनिश्चित काल के लिए कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं किया जा सकता है। संतो ने कहा कि 31 जनवरी तक सरकार कोई फैसला नहीं करती है तो फिर 1 फरवरी को धर्म संसद में आगे की रणनीति बनाई जाएगी.
आज शाम को ही महंत नृत्य गोपाल दास के नेतृत्व में संतों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मिला। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में कहा गया है, 'महामहिम अपनी सरकार को कहें कि वह अब कानून बनाकर राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करे। आज की परिस्थिति में यही समाधान उपयुक्त लगता है।'

श्री राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज की अध्यक्षता में हुई संतों की उच्चाधिकार समिति की बैठक में सभी संतों ने एक स्वर में मोदी सरकार से कहा कि वह जन्मभूमि पर अपने वचनानुसार संसदीय कानून बना कर राम मंदिर के मार्ग की बाधाओं को दूर करे। VHP के बयान के मुताबिक स्वामी वासुदेवानंद और श्री विश्वेशतीर्थ महाराज ने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री आवश्यकता पड़ने पर लोकसभा और राज्यसभा का संयुक्त अधिवेशन बुलाकर कानून बनाएं और जन्म भूमि हिंदुओं के हवाले करें। आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद ने बैठक मे कहा कि देशभर में लोग पूछते हैं कि क्या सोच कर आप लोगों ने मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाया, मंदिर तो बना नहीं. रामलीला मैदान में सभा हो, मोदी जी को उसमें बुलाया जाए. वहीं महामंडलेश्वर डॉ रामेश्वरदास वैष्णव जी महाराज ने मांग करते हुए कहा कि कानून से पहले सरकार तीन तलाक की ही तरह राम मंदिर निर्माण के लिए भी अध्यादेश लाए.

बैठक के दौरान कई संतों ने यह याद दिलाया कि 1989 ने पालनपुर में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया था कि केंद्र में जब भी उनकी सरकार आएगी तो वह राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगी. लेकिन संतों की ओर से यह शिकायत की गई कि पिछले 20 साल में दो बार केंद्र में बीजेपी नेतृत्व की सरकार बन चुकी हैं लेकिन अभी तक राम मंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़ा हुआ है.
संत उच्चाधिकार समिति की बैठक में केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्य महंत कमलनयन दास, न्यास सदस्य पूर्व सांसद रामविलासदास वेदांती, महंत सुरेश दास, संत समिति अध्यक्ष महंत कन्हैया दास शामिल हैं.
आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने भी हाल में कहा था, 'यह हकीकत है कि राम मंदिर को तोड़ा गया था... हर किसी को इस वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए। भगवान राम हमारी (हिंदू) आस्था के प्रतीक हैं। देश बिना किसी देरी के भव्य राम मंदिर का निर्माण देखना चाहता है। एक बार मंदिर बन गया तो आपसी विवाद (हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच) की बड़ी वजह हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।'

इसी दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड, जो अयोध्या में विवादित भूमि पर बाबरी मस्जिद के लिए लड़ रहा है, अपनी दलीलों पर काम कर रहा है। बोर्ड इस दौरान सबूत जुटाने में व्यस्त है कि कैसे विवादित भूमि का आंतरिक हिस्सा एक मस्जिद है, बोर्ड के सीनियर नेता सीनियर वकीलों के साथ काम कर रहे हैं, ताकि कोर्ट में अपनी बात को सही साबित कर सकें। सुन्नी वक्फ बोर्ड के सीनियर वकील जफरयाब जिलानी ने कहा, 'संतों को बुलाकर वीएचपी हमारे खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास कर रही है। वे न्यायपालिका को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे यह साबित नहीं किया जा सकता कि वह जमीन मस्जिद की नहीं है।'

इससे पहले पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर इस मामले की सुनवाई कर रहे थे। अब नए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई मास्टर ऑफ द रोस्टर हैं। ऐसे में वह ही यह तय करेंगे कि इस मामले की सुनवाई कौन करेगा। अयोध्या मामले में दर्ज हुए बयानों के करीब 90 हजार पेज हैं। सैकड़ों स्क्रिप्ट हैं जो सबूत के तौर पर पेश की गई, इन्हें रामायण के कई वर्जन, महाभारत, पुराण और कुरान से लिया गया है, जो संस्कृत, अवधी, अरबी, पारसी और पाली में हैं।

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