बीच में अटका बायोगैस प्लांट प्रोजेक्ट

बीच में अटका बायोगैस प्लांट प्रोजेक्ट

बॉयोगैस प्लांट लगने से गौशालाएं आर्थिक रूप से विकसित तो होती ही, इसके अलावा गायों को भी सरकारी मदद से उनके लिए चारे और रखरखाव की अच्छी व्यवस्था हो सकती थी. इस प्लान्ट के लगने से गौमूत्र और गोबर के उपयोग के साथ-साथ इनकम भी अच्छी होती. गौरतलब है कि करोड़ों रूपए के प्लांट के पहले फेज में बनने वाले 25 बॉयोगैस प्लांट के लिए गौशालाओं का चयन भी किया जा चुका था. यह बॉयौगैस प्लान्ट उन गोशालाओं में लगाया जाना था जिसमें 1 हजार या इससे अधिक गाय हो और 25 बीघा जमीन हो. इसके साथ ही दो तीन गोशालाओं को जोड़कर भी एक गोशाला का नाम दिया गया है ताकि अधिक से अधिक गोशालाओं को इस प्लान्ट का लाभ मिल सके. राजस्थान में बॉयोगैस प्लांट की उपयोगिता इसलिए भी है क्योकि प्रत्येक प्लांट से प्रतिदिन 200 यूनिट बिजली, प्रतिदिन 200 किलो गैस और 10 मैट्रिक टन खाद प्रतिदिन बन सकेगी. यानि जो गौमूत्र और गोबर किसी काम नहीं आता था उससे किसानों को इनकम हो सकती थी. अब राजस्थान की करोडो गायों को 11 दिसंबर को नई सरकार बनने का इतंजार है कि जब नई सरकार आएगी तब ही गौ माता पर मेहरबानी होगी.

हालांकि बॉयोगैस प्लांट नहीं बनने से गोपलकों की अपनी डबल इनकम के ख्वाब को पूरा करने के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा. गौशालाओं में गैस प्लान्ट लगने से बिजली, गैस और ऑर्गैनिक खाद बनती जिससे किसानों की सालाना इनकम 25 से 30 लाख तक होती. खबर के मुताबिक एक बॉयो गैंस प्लान्ट की लागत करीब 1 करोड़ रूपए आती, लेकिन समय से वित्तिय स्वीकृति नहीं मिलने और आचार संहिता लगने के सारे काम बीच में अटक गए है.

राजस्थान की 7.50 करोड की जनता के साथ अब बॉयोगैस प्लांट को भी नई सरकार का ब्रेसब्री से इतंजार है. इसी साल दिसंबर तक गोशालाओं में 25 गैस प्लांट लगने थे जिसकी लागत करीब 25 करोड़ तक आती. लेकिन आचार संहिता लगने के कारण प्रोजेक्ट अधर में लटक गया. अब इस प्रोजेक्ट को नई सरकार का इतंजार करना ही पड़ेगा. गोपालन विभाग के निदेशक डॉ लालसिंह का कहना है कि आचार सहिंता लगने के कारण अब काम दिसंबर में शुरू होगा. हालांकि प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए सभी गौशालाओं का चयन भी किया जा चुका है. प्लांट लगने के फैसले पर गोपालकों ने सरकार के फैसले का खुशी जताई थी लेकिन अब प्रोजेक्ट अधर में अटक गया है. जिसके बाद गोपालकों में काफी आक्रोश है. उनका कहना है कि सरकार योजनाएं तो खूब बनाती है लेकिन उसमें का कुछ नहीं होता. सरकार ने गायों की रक्षा और सुरक्षा के लिए वादे तो किए लेकिन एक भी वादा पूरा नहीं किया. गौरतलब है कि बीजेपी सरकार ने अपने आखिरी बजट में बॉयोगैस प्लांट की घोषणा की लेकिन सरकार के इस कार्यकाल में एक भी बॉयोगैस प्लांट नहीं बन पाया.

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