गायों की आंखों की सर्जरी

गायों की आंखों की सर्जरी

देश में पहली बार 5 गायों की आखों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया हैं। इतना ही नहीं इस ऑपरेशन के लिए पहले गौशाला में विशेष तौर पर ऑपरेशन थिएटर तैयार किया गया और फिर उसके बाद पांच गायों की आंखों की सर्जरी – गायों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया।

राजस्थान के जोधपुर पास मंडोर में स्थित एक गौशाला में इस ऑपरेशन थियेटर को तैयार किया गया। मंडोर की इस गौशाला का नाम है पन्नालाल गौशाला… पन्नालाल गौशाला भारत देश की पहली ऐसी गौशाला है, जहां ना सिर्फ 5 गायों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ है, बल्कि गायों को दी जाने वाली इस खास इलाज सुविधा का शुभांम्भ भी किया गया है।

ऑपरेशन थिएटर बनाकर पूरी सुविधा के साथ किये गए ऑपरेशन के बाद जहां अभी मात्र 5 गायों का इलाज हुआ है, वहीं अब इस प्रकिया को और आगे बढ़ाते हुए अगले ऑपरेशन की तैयारी में अब डॉ. झीरवाल की पूरी टीम जुट गई है।

अगला ऑपरेशन जल्द ही होने वाला है, जिसमें करीबन 100 गायों को एक साथ मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जायेगा। साथ ही बया दे कि जिन 5 गायों की आंखों की सर्जरी हाल ही में की गई है उनमें सभी गायों का स्वास्थय एकदम ठीक है।

गायों के ऑपरेशन से जुड़ें इस ऐतिहासिक फैसले के बारें में खुद गौशाला प्रबंधन समिति के कोषाध्यक्ष ने दी है, साथ ही उन्होंने यह भी बताया है कि किस तरह एक लम्बें समय से वह लोग गायों के मोतियाबिंद के इलाज की पहले से तैयारियां कर रहे थे, जिसे बीते महीने उनकी पूरी टीम ने काफी सुव्यवस्थित ढंग के साथ अंजाम दिया और सफल बनाया।

साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इस परियोजना को अंजाम देने से पहले किस तरह पिछले महीने राजस्थान में एक शिविर का आयोजन किया गया, जिसका नाम था पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान। इस कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान के बीकानेर के विश्वविद्धालय में किया गया। इस आयोजन समारोह के दौरान नेत्र रोग विभाग के प्रमुख सुरेश कुमार झीरवाल की टीम ने कई ऑपरेशन किए थे। पशु नेत्र मामलों में बेहद खास डॉक्टर माने जाने वाले डॉ. झीरवाला ने बताया कि किस तहर इससे पहले उनकी टीम ने बिल्लियों, खरगोश, बत्तख, श्र्वान, व अन्य कई पशुओं की आखों के ऑपरेशन भी किये है।

इन सभी जानवरों की नेत्र शक्ति का ध्यान रखने वाले डॉ. झीरवाला और उनकी टीम ने पहली बार गायों के लिए इस तरह के ऑपरेशन थिएटर का बंदोबस्त कर मोतियाबिंद के ऑपरेशन को अंजाम दिया है।

डॉ. झीरवाला अभी अपनी इस इलाज प्रवृति को राजस्थान में और आगे बढाते हुए नए-नए आयामों पर ले जाना चाहते हैं। जोधपुर के पास मंडोर में 50 बीघे में फैली यह पन्नालाल गौशाला  करीबन 145 साल पुरानी है। इसमें करीबर 4 हजार से ज्यादा शारीरिक रूप से अपंग और बीमार गायों और 700 दृष्टिहीन गायों की देखरेख की जाती है। इतना ही नहीं यहां जानवरों के अलावा पक्षियों का भी डेरा है।

इस गौशाला में करीबन 80 कर्मचारी इन सभी पशु-पक्षियों की देखरेख के लिए रखे गए हैं।

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