हरियाणा व पंजाब के कारण दिल्ली-NCR की हवा में प्रदूषण की मात्रा काफी ज्यादा

हरियाणा व पंजाब के कारण दिल्ली-NCR की हवा में प्रदूषण की मात्रा काफी ज्यादा

दिल्ली की आबोहवा लगातार जहरीली होती जा रही है। रविवार सुबह अवकाश की वजह से दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर वाहनों का दबाव बहुत कम है। बावजूद रविवार सुबह दिल्ली की हवा में प्रदूषण की मात्रा काफी ज्यादा रही। रविवार सुबह जारी एयर इंडेक्स में दिल्ली आइआइटी जहांगीरपुरी (235) पर प्रदूषण बहुत ज्यादा खतरनाक स्तर पर मापा गया। इसके अलावा आनंद विहार पर भी प्रदूषण स्तर (189) खतरनाक और मंदिर मार्ग पर भी प्रदूषण स्तर (180) खतरनाक स्तर पर रहा। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में प्रदूषण स्तर में और इजाफा होने की आशंका है।

पिछले 5 दिनों से लगातार दिल्ली की हवा खराब हो रही है। सप्ताह की शुरुआत में 9 अक्टूबर को दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स 256 था, जबकि शनिवार को यह 699 पहुंच गया। पड़ोसी राज्यों हरियाणा व पंजाब की तरफ से बड़ी आफत NCR पहुंचने वाली है। जल्द ही ये आफत पूरे एनसीआर पर प्रदूषण की काली चादर के रूप में छा जाएगी। इससे दिल्ली-NCR के 2.5 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित होंगे।

इसकी वजह ये है कि पंजाब और हरियाणा के किसानों ने खेतों में पराली जलानी शुरू कर दी है। ये सिलसिला धीरे-धीरे तेज होता जा रहा है। पड़ोसी राज्यों से पराली जलाने की तस्वीरें भी सामने आने लगी हैं। दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की तस्वीरें जारी की हैं। इसी के साथ केजरीवाल सरकार ने हरियाणा और पंजाब से मांग की है कि पराली जलाने से रोकने के लिए कदम उठाए जाएं, जिससे दिल्ली के लोगों को समस्या का सामना न करना पड़े।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने आसपास के राज्यों में पराली जलाए जाने के चित्र जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा एवं पंजाब में पराली जलाया जा रहा है। दिल्ली से चंडीगढ़ जाने वाले रास्ते में पराली जलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने से दिल्ली की आबोहवा पर खराब असर पड़ता है। इससे यह भी साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा व राजस्थान सरकार ने पराली जलाने से रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। उन्होने केंद्र सरकार को घेरते हुए यह भी कहा कि किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए पर्याप्त सब्सिडी की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। आग्रह के बावजूद केन्द्र सरकार ने सभी संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक भी नहीं बुलाई है। गंभीर वायु प्रदूषण का सीधा असर बच्चों, बूढ़ों, महिलाओं और सांस के रोगियों पर पड़ता है।

दिल्ली सरकार ने दोनों राज्यों से मांग की है कि पराली जलाने से रोकने के लिए कदम उठाएं ताकि दिल्ली को एक बार फिर दमघोटू हवा की चपेट में न आना पड़े। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने कहा कि तस्वीरें इस बात का सबूत हैं कि बिना किसी रोक के पराली को जलाना जारी है।

दिल्ली सरकार ने यह भी दावा किया कि बार-बार अनुरोध के बावजूद गरीब किसानों को पर्याप्त रूप से प्रोस्ताहित नहीं किया गया। इस वजह से उनपर कृषि अवशेषों को जलाने का दबाव बन रहा है। दिल्ली सरकार ने एक बयान में कहा कि यह काफी दर्दनाक है कि बार-बार रिक्वेस्ट के बावजूद केंद्र सरकार ने अबतक पड़ोसी राज्यों के सीएम और मंत्रियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक नहीं की है।

सीएम अरविंद केजरीवल ने इसे आपराधिक कहा है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि अबतक कोई ऐक्शन नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि किसान फिर से बेसहारा महसूस कर रहे हैं। केजरीवाल ने चेताया कि दिल्ली समेत पूरा इलाका फिर से गैस चैंबर बन जाएगा।

नीति आयोग ने 2017 में केंद्र सरकार को सुझाव देते हुए कहा था कि पराली के संकट से बढ़े प्रदूषण को रोकने के लिए 3,200 करोड़ रुपये खर्च करने की जरूरत है। इसके बाद केंद्र ने 1,700 करोड़ रुपये का एक प्रस्ताव तैयार किया। इस प्रस्ताव में सरकार पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए ऐसी मशीनें खरीदने की योजना है, जिससे खेतों में पड़े पराली को इकट्ठा कर खाद बनाया जा सकेगा। इस सबके बावजूद इस पर कोई अमल होता नजर नहीं आ रहा है।

जानकारी सामने आ रही है कि दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे के किनारे किसानों ने फिर से पराली जलाना तेज कर दिया है। इससे दिल्ली की हवा में धुआं भर रहा है। इससे पहले इसका असर अमृतसर, अंबाला, करनाल, सिरसा और हिसार के आसमान में दिख रहा है, यहां पर धुएं का गुबार बनना शुरू हो गया है।

इस बीच एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के मुताबिक, दिल्ली के आनंद विहार में हवा बेहद खराब व खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। पिछले 5 दिनों से लगातार दिल्ली की हवा खराब हो रही है। सप्ताह की शुरुआत में 9 अक्टूबर को दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स 256 था, जबकि शनिवार को यह 699 पहुंच गया।
समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक, दिल्ली के आनंद विहार में हवा की गुणवता शनिवार को खतरनाक स्तर को पार कर चुकी है। एयर क्वालिटी इंडेक्स वह पैरामीटर है, जिसमें सांस के रूप में ली जाने वाली ऑक्सीजन की शुद्धता मापी जाती है। जाहिर है दिल्ली की हवा धीरे-धीरे जहरीली होती जा रही है।

दिल्ली में प्रदूषण की समस्या एक गंभीर चिंता का विषय है, खासकर सर्दियों के दौरान जब पराली जलाई जाती है। इस प्रदूषित हवा में सांस लेते हुए कई सावधानियों की ज़रूरत है। ये प्रदूषण सबसे पहले बच्चों और बुजुर्गों को अपना शिकार बनाता है, ऐसे मौसम और हवा मे 5 साल से कम उम्र के बच्चों और 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों का खास ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को इस तरह की प्रदूषित हवा में कम से कम बाहर निकलना चाहिए।

वहीं, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने दिल्ली मेट्रो और प्रगति मैदान में परियोजना पर कार्य कर रहे एनबीसीसी (राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम) को एनजीटी के निर्देशों का पालन करने का निर्देश जारी करते हुए बढ़ते प्रदूषण पर चेतावनी दी है। शुक्रवार को निगम के आयुक्त डॉ. पुनीत कुमार गोयल ने प्रदूषण से निपटने के लिए हुई उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। डॉ. गोयल ने संबंधित अधिकारियों से अपने प्रयासों में तेजी लाने को कहा। निगम के अनुसार, प्रगति मैदान परियोजना पर काम कर रहे एनबीसीसी और दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) से निर्माण और ढांचों को ध्वस्त करने के बारे में एनजीटी के निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा न करने पर इनके खिलाफ समुचित कार्रवाई शुरू की जाएगी। मेट्रो रेल निगम से लाजपत नगर और मथुरा रोड स्टेशनों पर निर्माण आदि की गतिविधियां सीमित करने के निर्देश दिए हैं।

उपराज्यपाल शुक्रवार को पर्यावरण प्रदूषण एवं नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) द्वारा राजनिवास में वायु प्रदूषण पर बुलाई गई बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में उन्होंने आनंद विहार आइएसबीटी और अन्य क्षेत्रों से संबंधित सुधार कार्य प्रगति की समीक्षा की। बैठक में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन, ईपीसीए अध्यक्ष डॉ. भूरेलाल सहित पर्यावरण एवं वन विभाग, डीडीए, पुलिस, परिवहन विभाग, उत्तरी दिल्ली नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, रेलवे, डीपीसीसी, यूपीएसआरटीसी एवं डीएमआरसी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
कुछ समय पहले देश के जाने-माने हॉर्ट सर्जन डॉ नरेश त्रेहन ने इंडिया टुडे को बताया था कि दिल्ली एनसीआर में होने वाला पॉल्यूशन आदमी के फेफड़ों पर बुरा असर डाल रहा है. यह स्थापित करने के लिए डॉ त्रेहन ने नई दिल्ली में एक आदमी के फेफड़ों की तुलना हिमाचल प्रदेश में रहने वाले एक अन्य आदमी के फेफड़ों से की थी. डॉ त्रेहन के मुताबिक दिल्ली में जारी प्रदूषण से आदमी के फेफड़ों पर बुरा असर पड़ रहा है और वह अस्थमा समेत कई गंभीर बीमारियों का जनक बन रहा है.

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