प्रोतिमा बेदी एक बिंदास डांसर से संन्यासिन तक का सफर

 प्रोतिमा बेदी एक नाम है, जिसे लेते ही बहुत से लोगों को 1974 की मैगजीन का कवर याद आता है, निर्वस्त्र महिला मुंबई की सड़क पर दौड़ते हुए, बहुत से लोग उन्हें इस तस्वीर के लिए जानते हैं, कुछ लोग उन्हें कबीर बेदी की पत्नी के तौर पर जानते हैं |

प्रोतिमा बेदी एक बिंदास डांसर से संन्यासिन तक का सफर

कुछ लोग पूजा बेदी की मां की वजह से जानते हैं, बहुत से लोग ओडिसी नृत्यांगना के तौर पर जानते हैं, 1949 साल था, जब दिल्ली में प्रोतिमा का जन्म हुआ था, वैसे तो प्रोतिमा के पिता ने भी अपने जमाने में एक हल्की फुल्की क्रांति ही की थी, दिल्ली के छोटे बनिया परिवार का ये सदस्य एक सांवली बंगाली महिला को ब्याह लाया |

फिर परिवार ने उसे घर से बाहर निकाल दिया गया, फिर वो देश में गोवा, मुंबई से लेकर तमाम जगहों पर घूमते रहे, कई बिजनेस करने की कोशिश की लेकिन कुछ भी ढंग से नहीं चला, प्रोतिमा तीन बहनों और एक भाई के बीच दूसरे नंबर की संतान थी |

अपनी मनमर्जी से चलने वाली, पिता जितनी कड़ाई करते, विद्रोह उतना प्रबल हो जाता, जीवन में कुछ सीक्रेट रखना उनके लिए मानो गुनाह था, उन्होंने बेटे सिद्धार्थ से भी शक जाहिर किया कि वो आश्स्वत नहीं हैं कि उसका बाप कौन है |

तत्कालीन पति कबीर बेदी या युवा जर्मन प्रेमी, सिद्धार्थ बाद में सीजोफ्रेनिया का शिकार हुआ, फिर अमेरिका में खुदकुशी कर ली, मां-बाप से उन्हें प्यार नहीं मिला, काफी समय परिवार से अलग भी रहना पड़ा, युवा हुईं, तो मॉडलिंग शुरू की, यहां बॉम्बे डाइंग के एक विज्ञापन के लिए पिता से थप्पड़ भी खाना पड़ा |

उसी वक्त एक फिल्म मैगजीन लॉन्च हो रही थी, सोचा गया कि कैसे इसे हिट कराया जाए, मालिक रूसी करंजिया ने तय किया कि ऐसी महिला ढूंढी जाए, जिसकी निर्वस्त्र तस्वीर कवर पर छप सके, उनकी बेटी रीता मेहता ने प्रोतिमा का नाम सुझाया, सुबह-सुबह का समय तय किया गया |

प्रोतिमा बेदी एक बिंदास डांसर से संन्यासिन का सफर

फ्लो फाउंटेन के पास जगह थी, तैयब बादशाह फोटोग्राफर थे, तस्वीरें खिंच गईं, प्रोतिमा उससे खुश नहीं थीं, तय किया कि फिर शूट होगा, इस बार जगह जुहू बीच थी, हालांकि बाद में जो फोटो छपी, उन्हें गोवा की बीच का बताया गया, प्रोतिमा की यह तस्वीर छपने का पिता को सदमा लगा, उनकी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई, प्रोतिमा को लगता रहा कि इस दुर्घटना में सदमे का भी रोल है, हालांकि इसके बाद भी उन्होंने अपनी ‘आजाद जिंदगी’ की ख्वाहिश पर कोई लगाम नहीं लगने दी |

उसके बाद तो उनके जीवन में एक के बाद एक पुरुष आए, कबीर बेदी से शादी की, जो ज्यादा समय नहीं चली, कबीर ग्रीक गॉड की तरह थे, लंबे और किलर स्माइल के साथ चमकती आंखों वाले, प्रोतिमा ने अपनी किताब "टाइम पास" में लिखा, वो कबीर पर मोहित थीं लेकिन वो ध्यान नहीं दे रहे थे |

एक डिनर पार्टी में जब दोनों ने साथ में जाम खनकनाए तो एक दूसरे की बाहों में पहुंच गए, उसी रात कबीर उनके प्यार में पागल हो गए, प्रोतिमा बहुत जल्दी कबीर के फ्लैट में शिफ्ट हो गईं, प्रोतिमा लिखती हैं, "उन्हें तो ये सब अच्छा लग रहा था, बस शादी नहीं हुई थी बाकि जीवन तो वैसा ही था," दोनों में किसी का इरादा शादी का नहीं था, पूजा जब गर्भ में आ गई तो कबीर ने कहा कि अब उन्हें शादी कर लेनी चाहिए |

जो पुरुष आए, उनमें कई बहुत बड़े नाम थे, यहां तक कि पूजा आठ महीने की थीं, तभी प्रोतिमा का नाम एक विदेशी के साथ जोड़ा जाने लगा था, कबीर बेदी की जिंदगी भी इसी तरह की थी, हालांकि कुछ समय बाद हालात बदले, प्रोतिमा की अलग तरह की इमेज बनी, यह अलग बात है कि आज भी प्रोतिमा बेदी की दो जिंदगियों में पहली वाली पर ही ज्यादा बात की जाती है, या यूं कहें कि उसके बारे में गॉसिप ज्यादा होता है, गंभीर बात उसके बाद की जिंदगी पर है|

कबीर से रिश्ता जब टूटा तो प्रोतिमा ने ओडिसी डांस सीखने में लग गईं, उस दौरान पंडित जसराज डांस बैले गीत गोविंदा की तैयारी में लगे थे, प्रोतिमा तभी उनसे मिलीं,  कुछ था जो उन्हें जसराज की ओर खींचने लगा, जसराज परिवार के करीब आकर वो मां काली की उपासक बन गईं |

ये रोमांस पांच साल चला, इस साथ ने प्रोतिमा काफी बदला, वो साड़ी, गजरा और बड़ी बिंदी में दिखने लगीं, पंडित जसराज उन्हें लेकर खासे पजेसिव थे, यद्यपि वो विवाहित थे लेकिन चाहते थे प्रोतिमा ज्यादा से ज्यादा समय उन्हें दें,  प्रोतिमा को दिक्कत होने लगी,  धीरे धीरे इन संबंधों से दूर हो गईं|

प्रोतिमा ने केलूचरण महापात्र से ओडिसी नृत्य सीखा, उन्होंने बैंगलोर के पास नृत्यग्राम बनवाया, जहां नृत्य सिखाया जाता है, दरअसल, उन्होंने गलती से एक बार ओडिसी देख लिया था, वो गलत थिएटर में चली गई थीं, जैसी उनकी जिंदगी रही, उसी तरह उन्होंने तुरंत तय किया कि अब यही उनकी जिंदगी होगी |

इसके चलते उन्होंने अपना लाइफस्टाइल बदला, दोस्तों को छोड़ दिया, सिगरेट, शराब सब छोड़ दी, यहां तक कि उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि परिवार टूटने की वजह भी यही रही, यहीं पर उन्होंने पहली बार किसी के पांव छुए, हर शाम पूजा करना शुरू किया, गुरु से थप्पड़ खाए, उन्हीं गुरु के लिए एक तरह उन्होंने नृत्यग्राम की स्थापना की, फिर उन्होंने नृत्यग्राम छोड़ा, वो अपने बेटे सिद्धार्थ के साथ रहना चाहती थीं |

जब प्रोतिमा एक डांसर के रूप में फीकी पड़ने लगीं, तब मार्क जुबेर से मिलीं, मार्क से दोस्ती कुछ आगे भी बढ़ी लेकिन जल्दी ही जुदा हो गए, तभी वो अचानक बिजनेसमैन मारियो क्रुफ से मिलीं, मारियो ने पत्नी को तलाक दे दिया था, वो साथ रहने की प्लानिंग कर रहे थे, लेकिन इसी बीच कुछ ऐसा हुआ कि सब खत्म हो गया, वो अपने जीवन में हमेशा पूरा पुरुष तलाशती रहीं |

उन्हें ऐसे प्रेमी मिले, जिनका पहले से अपना परिवार था, वो एक समय बाद अपनी बीवी के पास लौट गए, हालांकि उनकी जिंदगी में आए सभी पुरुष अपने अपने क्षेत्रों की नामी शख्सियत थे, प्रोतिमा की जिंदगी पुरुषों के अलावा शराब और ड्रग्स के नाम भी रही | 

बाद में उन्होंने खुद को कर्नाटक में डांस विलेज नृत्यग्राम बनाने में व्यस्त कर दिया, जब उनके बेटे ने जिंदगी खत्म की वो सिर के बाल मूंडवाकर वो संन्यासिन बन गईं, ये 18 अगस्त 1998 का दिन था, वो कैलास-मानसरोवर की यात्रा पर थीं, जब एक भूस्खलन ने उनकी जिंदगी खत्म कर दी|
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