राफेल घोटाले का गुजरात से पलायन

राफेल घोटाले का गुजरात से पलायन

राफेल विमान सौदे को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस डील में पीएम मोदी पर घपले तक का आरोप लगाया है, लेकिन गुजरात से पलायन के खेल में राफेल घोटाला दबता नज़र आ रहा है तथा केंद्र सरकार इसमें सफल होती नज़र आ रही है।

राफेल कई भूमिकाएं निभाने वाला और दोहरे इंजन से लैस फ्रांसीसी लड़ाकू विमान है और इसका निर्माण डसॉल्ट एविएशन ने किया है, राफेल विमानों को वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक सक्षम लड़ाकू विमान माना जाता है, कांग्रेस ने विमान की कीमत और कैसे प्रति विमान की कीमत 526 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,670 करोड़ रुपये की गई यह भी बताने की मांग की है, सरकार ने भारत और फ्रांस के बीच 2008 समझौते के एक प्रावधान का हवाला देते हुए विवरण साझा करने से इनकार कर दिया है, राफेल डील पर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वां ओलांद के ताजा खुलासे के बाद भारतीय राजनीति में भूचाल आ गया है, इस सौदे को मोदी सरकार का घोटाला बता रही कांग्रेस और मजबूती से घेराबंदी करने में जुट गई है, ओलांद के बयान पर भारत सरकार से लेकर फ्रांस सरकार ने सफाई दी है, जानते हैं क्या है राफेल डील और इसको लेकर क्यों है इतना विवाद?

वायु सेना को अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए कम से कम 42 लडा़कू स्क्वाड्रंस की जरूरत थी, लेकिन उसकी वास्तविक क्षमता घटकर महज 34 स्क्वाड्रंस रह गई, इसलिए वायुसेना की मांग आने के बाद 126 लड़ाकू विमान खरीदने का सबसे पहले प्रस्ताव अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार ने रखा था, लेकिन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया कांग्रेस सरकार ने, रक्षा खरीद परिषद, जिसके मुखिया तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटोनी थे, ने 126 एयरक्राफ्ट की खरीद को अगस्‍त 2007 में मंजूरी दी थी, यहां से ही बोली लगने की प्रक्रिया शुरू हुई, इसके बाद आखिरकार 126 विमानों की खरीद का आरएफपी जारी किया गया, राफेल की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये 3 हजार 800 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है, यह डील उस मीडियम मल्‍टी-रोल कॉम्‍बेट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसे रक्षा मंत्रालय की ओर से इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) लाइट कॉम्‍बेट एयरक्राफ्ट और सुखोई के बीच मौजूद अंतर को खत्‍म करने के मकसद से शुरू किया गया था, मीडिया खबरों के अकनुसार एमएमआरसीए के कॉम्पिटीशन में अमेरिका के बोइंग एफ/ए-18ई/एफ सुपर हॉरनेट, फ्रांस का डसॉल्‍ट राफेल, ब्रिटेन का यूरोफाइटर, अमेरिका का लॉकहीड मार्टिन एफ-16 फाल्‍कन, रूस का मिखोयान मिग-35 और स्वीडन के साब जैस 39 ग्रिपेन जैसे एयरक्राफ्ट शामिल थे, छह फाइटर जेट्स के बीच राफेल को इसलिए चुना गया क्योंकि राफेल की कीमत बाकी जेट्स की तुलना में काफी कम थी, इसके अलावा इसका रख-रखाव भी काफी सस्‍ता था।

भारतीय वायुसेना ने कई विमानों के तकनीकी परीक्षण और मूल्यांकन किए और साल 2011 में यह घोषणा की कि राफेल और यूरोफाइटर टाइफून उसके मानदंड पर खरे उतरे हैं, साल 2012 में राफेल को एल-1 बिडर घोषित किया गया और इसके मैन्युफैक्चरर दसाल्ट ए‍विएशन के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर बातचीत शुरू हुई, लेकिन आरएफपी अनुपालन और लागत संबंधी कई मसलों की वजह से साल 2014 तक यह बातचीत अधूरी ही रही, यूपीए सरकार के दौरान इस पर समझौता नहीं हो पाया, क्योंकि खासकर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के मामले में दोनों पक्षों में गतिरोध बन गया था, दसाल्ट एविएशन भारत में बनने वाले 108 विमानों की गुणवत्ता की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थी, दसाल्ट का कहना था कि भारत में विमानों के उत्पादन के लिए 3 करोड़ मानव घंटों की जरूरत होगी, लेकिन एचएएल ने इसके तीन गुना ज्यादा मानव घंटों की जरूरत बताई, जिसके कारण लागत कई गुना बढ़ जानी थी, 2014 में जब मोदी सरकार बनी तो उसने इस दिशा में फिर से प्रयास शुरू किया, पीएम की फ्रांस यात्रा के दौरान साल 2015 में भारत और फ्रांस के बीच इस विमान की खरीद को लेकर समझौता किया, इस समझौते में भारत ने जल्द से जल्द 36 राफेल विमान फ्लाइ-अवे यानी उड़ान के लिए तैयार विमान हासिल करने की बात कही, समझौते के अनुसार दोनों देश विमानों की आपूर्ति की शर्तों के लिए एक अंतर-सरकारी समझौता करने को सहमत हुए।

विमानों की आपूर्ति भारतीय वायु सेना की जरूरतों के मुताबिक उसके द्वारा तय समय सीमा के भीतर होनी थी और विमान के साथ जुड़े तमाम सिस्टम और हथियारों की आपूर्ति भी वायुसेना द्वारा तय मानकों के अनुरूप होनी है, इसमें कहा गया कि लंबे समय तक विमानों के रखरखाव की जिम्मेदारी फ्रांस की होगी, सुरक्षा मामलों की कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद दोनों देशों के बीच 2016 में आईजीए हुआ. समझौते पर दस्तखत होने के करीब 18 महीने के भीतर विमानों की आपूर्ति शुरू करने की बात है यानी 18 महीने के बाद भारत में फ्रांस की तरफ से पहला राफेल लड़ाकू विमान दिया जाएगा, एनडीए सरकार ने दावा किया कि यह सौदा उसने यूपीए से बेहतर कीमत में किया है और करीब 12,600 करोड़ रुपये बचाए हैं, लेकिन 36 विमानों के लिए हुए सौदे की लागत का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया, दावा है कि पहले भी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की कोई बात नहीं थी, सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी की लाइसेंस देने की बात थी, लेकिन मौजूदा समझौते में 'मेक इन इंडिया' पहल किया गया है, फ्रांसीसी कंपनी भारत में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगी, मीडिया में आई तमाम खबरों में यह दावा किया गया कि यह पूरा सौदा 7.8 अरब रुपये यानी 58,000 करोड़ रुपये का हुआ है और इसकी 15 फीसदी लागत एडवांस में दी जा रही है, भारत को इसके साथ स्पेयर पार्ट और मेटोर मिसाइल जैसे हथियार भी मिलेंगे जिन्हें कि काफी उन्नत माना जाता है, बताया जाता है कि यह मिसाइल 100 किमी दूर स्थित दुश्मन के विमान को भी मार गिरा सकती है, अभी चीन या पाकिस्तान किसी के पास भी इतना उन्नत विमान सिस्टम नहीं है।

विपक्ष सवाल उठा रहा है कि अगर सरकार ने हजारों करोड़ रुपए बचा लिए हैं तो उसे आंकड़े सार्वजनिक करने में क्या दिक्कत है, कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यूपीए 126 विमानों के लिए 54,000 करोड़ रुपये दे रही थी, जबकि मोदी सरकार सिर्फ 36 विमानों के लिए 58,000 करोड़ दे रही है, कांग्रेस का आरोप है कि एक प्लेन की कीमत 1555 करोड़ रुपये हैं, जबकि कांग्रेस 428 करोड़ में रुपये में खरीद रही थी, कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी सरकार के सौदे में 'मेक इन इंडिया' का कोई प्रावधान नहीं है, यूपीए सरकार 18 बिल्कुल तैयार विमान खरीदने वाली थी और बाकी 108 विमानों का भारत में एसेंबलिंग की जानी थी, इसके अलावा इस सौदे में ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी की बात कही गई थी, ताकि खुद बाद में भारत में इन विमानों को बनाया जा सके, कांग्रेस का कहना है कि जब यूपीए सरकार सस्ते, बेहतर और व्यापक सौदे पर बात कर रही थी, तो इस सौदे को करने की एनडीए सरकार को इतनी हड़बड़ी क्यों थी, यूपीए के सौदे में विमानों के भारत में एसेंबलिंग में सार्वजनिक कंपनी हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड को शामिल करने की बात थी, भारत में यही एक कंपनी है जो सैन्य विमान बनाती है, लेकिन एनडीए के सौदे में एचएएल को बाहर कर इस काम को एक निजी कंपनी को सौंपने की बात कही गई है, किसी भरोसेमंद सरकारी कंपनी की जगह अनाड़ी नई निजी कंपनी को शामिल करना कैसे उचित हो सकता है, यानी विरोधि‍यों के मुताबिक एनडीए सरकार एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचा रही है, कांग्रेस का आरोप है कि सौदे से HAL को 25000 करोड़ रुपये का घाटा होगा।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक फेसबुक पोस्ट लिखकर कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी पर सौदे के बारे में झूठ बोलने और दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया था, उन्होंने कहा कि राजग सरकार द्वारा हस्ताक्षरित सौदा संप्रग सरकार के तहत 2007 में जिस सौदे के लिये सहमति बनी थी उससे बेहतर है ।

पिछले काफी दिनों से गुजरात में नफरत का माहौल है प्रदेश में गैर गुजरातियों के साथ हिंसा की जा रही है, प्रदेश में 14 माह की बच्ची के साथ रेप की घटना सामने आने का बाद प्रदेश में तनाव की स्थिति है, जिसके बाद हिम्मतनगर सहित राज्य के दूसरे शहरों में रहने वाले यूपी-बिहार के लोगों पर हमले हो रहे हैं, इस मामले में बिहार के रहने वाले रविंद्र साहू को अभियुक्त बनाया गया है,इस हिंसा की घटना के बाद राज्य के आठ ज़िलों में यूपी-बिहार के लोगों पर हमले हुए हैं,

पुलिस का कहना है कि इस घटना को लेकर 57 केस दर्ज किए गए हैं और 361 लोगों को गिरफ्तार किया गया है बड़ी संख्या में लोग यहां से पलायन कर रहे है दावा किया जा रहा है कि अभी तक 20,000 लोग पलायन कर चुके है पुलिस का कहना है कि ये लोग किसी डर से नहीं बल्कि त्यौहार में अपने घर जा रहे है, वहीं गुजरात छोड़ कर जा रहे लोगों का कहना है कि वो अपनी जान बचाने के लिए जा रहे है|

2008 में महाराष्ट्र में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) और कई अन्य संगठनों ने मुंबई में यूपी बिहार के लोगों को निशाना बनाना शुरू किया था, मुंबई में रेलवे भर्ती की परीक्षा होने पर आए उत्तर भारतीय छात्रों के साथ मारपीट की गई और उनके एडमिट कार्ड तक फाड़ डाले थे,मनसे प्रमुख राज ठाकरे भी कई बार इस घटना पर विवादित बयान दे चुके हैं, यही नहीं राज ठाकरे मुंबई में आतंकवादी घटनाओं का जिम्मेदार भी यूपी बिहार वालों को ठहरा चुके हैं।

2003 में खबर आई थी कि असम में उत्तर भारतीयों पर हमलें किए जा रहे है, इन हमलों में 38 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी, रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा में भाग लेने आए दूसरे राज्यों के परीक्षाराथियों के साथ मारपीट के चलते हिंसा शुरू हुई थी, इस हमले में ईंट भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों को निशाना बनाया गया था, साथ ही इस हमले के पीछे अलगावादी संगठन उल्फा का हाथ होने की आशंका जताई गई थी, तब प्रदेश में अलग-अलग समय पर कर्फ्यू भी लगाया गया था, 450 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया था, इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए गुवाहटी में शांति मार्च भी निकाले गए जिसमें असमिया बिहारी भाई-भाई के नारे लगे थे।

वहीं आम आदमी पार्टी ने पूरे मामले में बीजेपी से लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकार को घेरा है, 'आप' नेता दिलीप पांडेय का कहना है कि गुजरात में हो रहे उत्तर भारतीयों पर हमले का बदला 2019 के चुनाव में लोग अपने वोट से लेंगे, आम आदमी पार्टी ने ऐलान किया है कि वो 12 अक्टूबर को नार्थ ईस्ट दिल्ली में उत्तर भारतीय स्वाभिमान यात्रा निकालेगी, 'आप' प्रवक्ता और नार्थ ईस्ट दिल्ली के प्रभारी दिलीप पांडेय ने कहा कि जिस तरह गुजरात में UP और बिहार के लोगों को पीटा जा रहा है, वो बहुत ही शर्मनाक है, देश का संविधान ये कहता है कि आप किसी भी भाषा को बोलने वाले हों, किसी भी राज्य के रहने वाले हों, किसी भी धर्म को मानने वाले हों, आप देश में कहीं भी सम्मान से रह सकते हैं, लेकिन जो गुजरात में हो रहा है वो न केवल संविधान का उलंघन है बल्कि इंसानियत के नाम पर काला धब्बा है, पांडेय ने कहा कि गुजरात में जो बलात्कार की घटना हुई वो प्रशासनिक असफलता का प्रतीक है, इसके बाद गुजरात में UP और बिहार के लोगों को जान से मारने की धमकी दी जाने लगी, जो मिट्टी UP और बिहार के लोगों को रोटी देती है, वो लोग उसे अपनी मां मान लेते हैं, लेकिन उनके साथ गलत व्यवहार किया जा रहा है ।

पांडेय ने UP के CM योगी आदित्यनाथ और बिहार के CM नीतीश कुमार से सवाल करते हुए पूछा क्या उनको UP और बिहार के लोगों ने CM नहीं बनाया है? वो क्यों गुजरात की सरकार से सवाल नही कर पा रहे हैं? दिलीप पांडेय ने बिहार और UP से चुने गए सांसदों से भी सवाल किया कि वो क्यों इन घटनाओं पर शांत है?,दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, "दिल्ली में रह रहे UP और बिहार के लोगों में गुजरात के घटनाक्रम को लेकर बेहद रोष है, मोदी जी, आपसे हमारी प्रार्थना है कि इसे रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं,"|

इस बारे में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी से बात की और घटना पर चिंता व्यक्त की है,राज्य के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने इस मुद्दे पर कहा है कि जो भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा, 28 सितंबर को हिम्मतनगर के एक गांव में 14 साल की एक बच्ची का कथित रूप से बलात्कार किया गया था, मामले में बिहार के रहने वाले एक शख़्स को गिरफ्तार किया गया था, यूपी-बिहार के लोगों पर हमला करने वालों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई में कम से कम 361 लोग गिरफ़्तार किए गए हैं, साबरकांठा ज़िले के अलावा गुजरात के कई शहरों में दहशत का माहौल है,गुजरात के विभिन्न शहरों में बसे उत्तर भारतीय अलग-अलग सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ जुड़े हैं, समाजशास्त्रियों का मानना है कि राज्य की स्थापना से लेकर अब तक राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में यूपी-बिहार के लोगों ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।
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