विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा- स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तैयार

विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा- स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तैयार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का काम लगभग पूरा हो चुका है. गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी चाहते थे कि सरदार वल्लभ भाई पटेल की एक ऐसी प्रतिमा बने जो दुनिया में सबसे ऊंची हो. सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची मूर्ति तैयार है। अब इस प्रतिमा की फाइनल फीनिशिंग पर काम चल रहा है. नर्मदा के बांध पर बनी यह मूर्ति सात किलोमीटर दूर से नजर आने लगती है।

सरदार पटेल की शख्सियत में वो दम था कि उनको सम्मान से लौह पुरुष कहा जाता था. इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के कोने कोने से लोहा मांगा था ताकि वो लोहा पटेल के सपनों को फौलादी बना दे. अब ये इत्तफाक है या कुछ और, लेकिन पटेल की मूर्ति का शिलान्यास भी तभी हुआ था, जब लोकसभा का चुनाव होने वाला था और उद्घाटन भी तभी होने जा रहा है, जब 2019 की चुनावी आहट देश सुनने लगा है.

इस प्रतिमा के साथ ही श्रेष्ठ भारत भवन की भी शुरुआत की जाएगी. इस भवन में 50 से ज्यादा कमरे तैयार किए जाएंगे. इसके साथ ही इस जगह आने वाले पर्यटकों के लिए वैली भी तैयार की गई है। सुरक्षा, सफाई के साथ ही प्रतिमा के पास फूड कोर्ट भी बनाया जा रहा है. स्टैच्यू के अंदर दो लिफ्ट रखी गई है. स्टैच्यू में लगी लिफ्ट से पर्यटक सरदार के हृदय तक जा सकेंगे, जहां सरदार पटेल के दिल के पास एक गैलरी बनायी गई है. यहां से पर्यटकों को सरदार पटेल बांध और वैली का नजारा देखने को मिलेगा. वहां से लोग सरदार सरोवर बांध के अलावा नर्मदा के 17 किमी लंबे तट पर फैली फूलों की घाटी का नजारा देख सकेंगे।

विश्व की सबसे ऊंची मूर्ति की संपूर्ण तस्वीर सबसे पहले पाठकों तक पहुंचाने के लिए भास्कर के रिपोर्टर सात दिन स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण स्थल पर रहे, तब जाकर तस्वीर बन पाई। 6.5 की तीव्रता के भूकंप और 220 किमी रफ्तार वाली आंधी का भी स्टैच्यू पर कोई असर नहीं होगा|

31 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व की इस सबसे ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का उद्घाटन करेंगे.

इस मूर्ति के निर्माण के लिए केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद अक्टूबर 2014 में लार्सेन एंड टर्बो कंपनी को ठेका दिया गया. इस काम को तय समय में अंजाम तक पहुंचाने के लिए 4076 मजदूरों ने दो शिफ्टों में काम किया. इसमें 800 स्थानीय और 200 चीन से आए कारीगरों ने भी काम किया.  इस मूर्ति से पटेल की वो सादगी भी झलकती है जिसमें सिलवटों वाला धोती-कुर्ता, बंडी और कंधे पर चादर उनकी पहचान थी. ये सब कुछ मूर्ति में ढल चुका है.

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