अब अखबारों में तीन बार जनता के सामने देना होगा अपने अपराध का ब्यौरा

उम्मीदवारों को नामांकन पत्र के साथ फॉर्म-26 भरना अनिवार्य होगा
राजनीति को अपराधीकरण से मुक्त करने के चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र लिख कर नए हलफनामे के बारे में अधिसूचना जारी कर दी है, चुनाव आयोग की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक सभी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र के साथ फॉर्म-26 भरना अनिवार्य होगा, जिसमें उन चल रहे अपराधिक मुकदमों के अलावा संपत्तियों, देनदारियों के साथ शैक्षणिक उपलब्धियों को भी जिक्र होगा।
इसके अलावा आपराधिक छवि के उम्मीदवारों या उन्हें टिकट देने वाले राजनीतिक दलों को उनकी पृष्ठभूमि के बारे में अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में तीन बार विज्ञापन प्रकाशित करना होगा, ताकि जनता को उनके बारे में पता चल सके। चुनाव आयोग की कोशिश थी कि मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में चुनाव से पहले विज्ञापन के प्रारूप को मंजूरी मिल जाए, विधि मंत्रालय में विधायी विभाग निर्वाचन आयोग के लिए नोडल एजेंसी है जो ऐसे प्रारूपों को देखता है और जरूरत पड़ने पर तय प्रारूप में कोई संशोधन भी सुझाता है।
अभ्यर्थी को पर्चा दाखिल करते समय आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होगी, दर्ज और लंबित केसेस की जानकारी देनी होगी, अभ्यर्थियों को नामांकन के दौरान मोटे अक्षरों में आपराधिक मामलों की जानकारी दर्शानी होगी।
दोष सिद्ध हो जाए या उसके विरूद्ध कोई भी आपराधिक मामला दर्ज या लंबित हो, तो अभ्यर्थियों को ऐसे प्रकरणों की जानकारी तीन अलग-अलग तिथियों में नामांकन वापसी और मतदान तिथि से 2 दिन पूर्व 12 साइज के फॉन्ट में अपनी विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित करवानी होगी।
संशोधन के तहत सभी राजनैतिक दलों को चुनाव सम्पन्न होने से 30 दिनों के भीतर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए गए हैं, कि जिसमें इस बात का स्पष्ट उल्लेख हो कि उनके द्वारा निर्देशों की पालना कर दी गई है।
आपराधिक मामलों की जानकारी प्रिन्ट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में व्यापक तौर पर कम से कम 3 बार प्रकाशित और प्रसारित करवानी होगी, केन्द्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने इसमें संशोधन किया है।
साथ ही पार्टी द्वारा समाचार पत्रों की कटिंग्स भी लगानी पड़ेंगी, इसके अलावा उम्मीदवारों द्वारा प्रकाशित और प्रसारित सूचना को जिला निर्वाचन अधिकारी को चुनाव व्यय के ब्योरे के साथ भी प्रस्तुत करना होगा।
इन अभ्यर्थियों को नामांकन भरते समय इन विभागों से प्रमाण पत्र भी देना होगा कि उनका कोई बकाया राशि का भुगतान बाकी नहीं है, जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड,राजस्थान स्टेट मोटर गैराज, संपदा विभाग, सरकारी आवास से जुड़े नो ड्यूज, पानी के बिल संबंधी नो ड्यूज, बीएसएनएल, पीडब्ल्यूडी।
12 नवंबर बाद से ही प्रत्याशियों की ओर से किया जा रहा तमाम तरह का खर्च उसके खाते में जुड़ेगा,आयोग ने प्रत्याशियों की व्यक्तिगत खर्च की सीमा 28 लाख तय कर रखी है।
इन खर्चों में पोस्टर,पर्चे,बैनर,पेम्पलेट सहित तमाम तरह के प्रचार माध्यमों से प्रचार तो शामिल है ही वेबसाइट के जरिए किया गया प्रचार भी शामिल किया जाएगा, इसके साथ ही अन्य तरह के अन्य जरिए से किए गए प्रचार का खर्चा भी प्रत्याशियों के व्यक्तिगत खाते में जुड़ेगा।
नामांकन से पूर्व खर्चा पार्टी के खाते में जोड़ा जा रहा है, गौरतलब है कि राजनीतिक दल के खर्चे की सीमा तय नहीं है, विज्ञापन के सर्टिफिकेशन के बारे में.सोशल मीडिया,एप्स, मोबाइल भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में शामिल है।
इसमें जो विज्ञापन होगा उसका सर्टिफिकेशन जरूरी होगा, ब्लॉग विज्ञापन की श्रेणी में नही माना जायेगा, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विज्ञापन का अधि प्रमाणन समिति से सर्टिफिकेशन जरूरी है।
प्रदेश में 90 से ज्यादा दल रजिस्टर्ड लेकिन मान्यता प्राप्त नहीं है, राजस्थान में 1 भी राज्यस्तरीय दल नहीं है, इसलिए सर्टिफिकेशन जरूरी है ।
यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि आचार संहिता का उल्लंघन न हो, जबकि प्रिंट मीडिया में पोलिंग से 48 घण्टे पहले सर्टिफिकेशन जरूरी है, चुनाव समाप्ति के आधा घण्टे तक एक्जिट पोल नहीं दे सकते।
सेरोगेट विज्ञापन आते कई बार अखबार, टीवी में जो न्यूज दिखती है पर न्यूज होती नहीं है, न्यूज के साथ एनालिसिस भी इस दायरे में आती है. ।
सोशल मीडिया की टीम का वेतन राजनीतिक दल के खाते में जोड़ेंगे, इंटरनेट कंपनी व वेबसाइट का भुगतान भी जोड़ा जाएगा, सोशल मीडिया की सामग्री आचार संहिता उल्लंघन वाली नहीं हो।
विधानसभा निर्वाचन के दौरान मतदान के लिए रिश्वत लेने और देने वाले दोनों के विरुद्ध मामला दर्ज करने एवं मतदाताओं को डराने-धमकाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए फ्लाइंग स्क्वाड का गठन किया गया है, यदि कोई व्यक्ति चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी व्यक्ति को अपने चुनावी अधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करने के आशय से कैश या इस प्रकार में कुछ भी देता है या लेता है तो वह भारतीय दंड संहिता की धारा 171-बी के अनुसार एक साल के कारावास तथा जुर्माना या दोनों से दंडनीय होगा, यदि कोई व्यक्ति किसी भी उम्मीदवार या मतदाता या किसी अन्य व्यक्ति को किसी भी तरह से धमकाता है और चोट पहुंचाता है तो वह भारतीय दंड संहिता की धारा 171-सी के अनुसार एक साल के कारावास तक या जुर्माना दोनों से दंडनीय होगा।
विधानसभा निर्वाचन में अधिक से अधिक दिव्यांग मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर सकेंगे, इसके लिए निर्वाचन आयोग विशेष तैयारियों में जुटा है, दिव्यांगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो, इसके लिए उन्हें विशेष छूट देते हुए तीन पहिया वाहन सीधे मतदान कक्ष तक ले जाने की अनुमति दी जाएगी, निर्वाचन आयोग से मिले निर्देशानुसार जिले के सभी मतदान केंद्रों पर रैम्प होना अनिवार्य किया गया है, दिव्यांग मतदाताओं को जागरूक किया गया है, इसके साथ ही चुनाव ड्यूटी में लगे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इस बारे में अवगत करा दिया गया है, जिन मतदाताओं के पास दिव्यांग मतदाता वाली पर्ची होगी, उसे मतदाता कक्ष तक ले जा सकेंगे, निर्वाचन आयोग ने बुजुर्ग और गर्भवती मतदाताओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की है, गर्भवती मतदाता को सीधे मतदान करने की अनुमति रहेगी।
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