शायद अब बच्चों को भारी स्कूल बैग से मिलेगी निजात

शायद अब बच्चों को भारी स्कूल बैग से मिलेगी निजात
अगर आपके घर में छोटे बच्चे हैं और आपको घंटों उनके साथ बैठकर होमवर्क कराना पड़ता है तो अब आपको और आपके बच्चे को होमवर्क के बोझ से मुक्ति मिलने वाली है। स्कूली बच्चों के भारी भरकम बैग को लेकर काफी समय से सवाल उठाया जाता रहा है. अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इससे छुटकारा पाने का मन बना लिया है.

स्कूली बच्चों के बस्ते के वजन की समस्या को सबसे पहले बार 1993 में यशपाल कमिटी ने उठाया था। कमिटी ने प्रस्ताव रखा था कि पाठ्यपुस्तकों को स्कूल की संपत्ति समझा जाए और बच्चों को स्कूल में ही किताब रखने के लिए लॉकर्स अलॉट किए जाए। इसमें छात्रों के होमवर्क और क्लासवर्क के लिए भी अलग टाइम-टेबल बनाने की मांग रखी गई थी ताकि बच्चों को रोजाना किताब घर न ले जानी पड़े।

बच्चों के बस्ते के बोझ की समस्या को देखते हुए नैशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) ने 2005 में एक सर्कुलर जारी किया। उस सर्कुलर में बच्चों के शारीरिक और मानसिक दबाव को कम करने के सुझाव दिए गए थे। एनसीएफ, 2005 के आधार पर एनसीईआरटी ने नए पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तिकाएं तैयार कीं जिसे सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों ने अपनाया। कई राज्यों ने एनसीएफ, 2005 के आधार पर अपने पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तिकाओं में बदलाव किया।

सीबीएसई के निर्देश
स्कूल बैग का वजन कम करने के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंड्री एजुकेशन (सीबीएसई) ने भी दिशानिर्देश जारी कर रखा है जो इस तरह से है।

  1. प्राइमरी क्लास के लिए जरूरत से ज्यादा छात्रों को पुस्तक लेने को नहीं कहा जाए और पाठ्यपुस्तकों की संख्या सीमित होनी चाहिए। नैशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) ने जो सीमा तय कर रखी है, उससे ज्यादा इसकी संख्या न हो। 
  2. पहली और दूसरी क्लास के छात्रों के लिए स्कूल बैग न हो और उनको अपना स्कूल बैग स्कूल में छोड़ने की अनुमति हो। 
  3. पहली और दूसरी क्लास के बच्चों को होमवर्क नहीं दिया जाए। तीसरी और चौथी क्लास के बच्चों के लिए होमवर्क की जगह कुछ और विकल्प दिया जाए। 
  4. स्कूल बैग के अनावश्यक बोझ से छुटकारे के लिए विवेकपूर्ण टाइम टेबल तैयार किया जाए।



अब रविवार को सोशल मीडिया पर एक सर्कुलर बांटा गया है। जिसमे कहा गया है की मंत्रालय ने पहली से 10वीं क्लास तक के लिए बच्चों के स्कूल बैग के वजन को निर्धारित कर दिया है. इससे मासूम बच्चों को होने वाली हेल्थ दिक्कतों से छुटकारा मिल जाएगा. बच्चों के होमवर्क को लेकर भी नियम बनाया गया है. स्कूली बस्तों के भारी भरकम वजन की वजह से बच्चों की कमर पर बुरा असर पड़ रहा था.  बच्चों की सेहत के मद्देनजर सरकार ने नई गाइडलाइन जारी कर दी है.


  • पहली क्लास से दूसरी क्लास: बैग का वजन 1.5 किलोग्राम होना चाहिए.
  • तीसरी क्लास से चौथी क्लास: बैग का वजन 2 किलोग्राम से 3 किलोग्राम तक.
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  • छठी क्लास से सातवी क्लास: बैग का वजन 4 किलोग्राम तक
  • आठवीं क्लास से नौंवी क्लास: बैग का वजन 4.5 किलोग्राम तक.
  • दसवीं क्लास: बैग का वजन 5 किलोग्राम तक होना चाहिए. 


HRD मिनिस्ट्री ने सभी राज्यों और केंद्र शासित राज्यों को कहा है कि अब बच्चों के बैग का वजन वही होगा जो मिनिस्ट्री की ओर से तय किया जाएगा. गाइनलाइन में कक्षाओं के मुताबिक बच्चों के स्कूल बैग का वजन निर्धारित कर दिया गया है. इस सर्कुलर में सरकार ने यह भी बताया है कि किस कक्षा में कौन-कौन से विषय बढ़ाए जाने चाहिए। सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि कक्षा एक और दो में छात्रों को भाषा और गणित के विषय पढ़ाए जाने चाहिए। इसके अलावा कक्षा तीसरी से पांचवीं तक भाषा, ईवीएस और गणित के विषय पढ़ाए जाने चाहिए।

आए दिन स्कूल से आने वाली डिमांड से भी माता पिता परेशान रहते है। कभी कुछ मंगवाया जाता है तो कभी कुछ। स्कूलों की इस प्रतिदिन की डिमांड पर भी इस सर्कुलर के जरिए रोक लग सकती है। यानी अब स्कूल आपके बच्चों के बस्ते का बोझ बढ़ाते हुए एक्स्ट्रा किताबें या अन्य कोई सामान नहीं मंगवा सकते। कहा गया है कि बच्चे स्कूल में कोई भी एक्सट्रा किताब और कोई भारी सामान लेकर न आएं. इससे उनका बैग भारी हो सकता है.

मानव संसाधन मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर यह गाइड लाइन जारी की है। पत्र में हिदायत दी गई है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होना चाहिए। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने 5 अक्टूबर 2018 को यह आदेश जारी किया था। राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा गया है। अब इस संबंध में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों की तरफ से शिक्षा विभाग और स्कूलों को सर्कुलर जारी किए जा रहे हैं।

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