राजस्थान में नहीं दिखा निर्देशों का असर

राजस्थान में नहीं दिखा निर्देशों का असर
दीवाली की रात पटाखे जलाने पर अदालती बाध्यताओं का राजस्थान के ज्यादातर शहरों में कोई असर नहीं दिखा। लोगों ने तय समयसीमा के बाद भी खूब पटाखे फोड़े और आतिशबाजी की जिससे इन शहरों और कस्बों में हवा की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हुई। प्रशासन का कहना है कि उसे ‘समयावधि’ के बाद भी पटाखे चलाए जाने को लेकर किसी की शिकायत नहीं मिली है न ही कोई मामला दर्ज हुआ।

अधिकारियों का कहना है कि राज्य में पटाखे चलाने की दो घंटे की अवधि रात आठ बजे से 10 बजे तक की थी।  इसके अलावा प्रशासन ने दीपावली के त्योहार पर रात 10 से सुबह छह बजे तक शोर करने वाले पटाखों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था।

राज्य के ज्यादातर शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) गुरुवार को बदतर नजर आया क्योंकि पटाखों व आतिशबाजी के कारण इन शहरों में प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ गया।

पटाखों पर नियंत्रण को लेकर सरकार व न्यायायल के निर्देशों पर आम जनता में मिली जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। एक नागरिक रमेश भाटिया ने कहा की दीवाली ही ऐसा समय है जब सभी रिश्तेदार मिलते हैं और पटाखे चलाते हैं। लोग अब जागरूक हैं और अदालत तथा प्रशासन को समाज के अन्य गंभीर मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। एक अन्य नागरिक सोनू ठाकुर ने कहा कि उनके परिवार ने तय समयसीमा में ही पटाखे चलाए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के लिए अदालत व प्रशासन के दिशा निर्देश स्वागत योग्य कदम हैं।

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