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वसुंधरा राजे के खिलाफ चुनाव लड़ने को तैयार मुकुल चौधरी ?

आईपीएस पंकज चौधरी की दूसरी पत्नी मुकुल चौधरी


अपनी कार्यप्रणाली और बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले राजस्थान कैडर के आईपीएस पंकज चौधरी की दूसरी पत्नी मुकुल चौधरी ने आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।
मुकुल ने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर ली है, मुकुल झालारापाटन विधानसभा सीट से वसुंधरा राजे के खिलाफ मैदान में उतरेंगी, मुकुल ने झालरापाटन विधानसभा क्षेत्र में प्रचार भी शुरू कर दिया है।
2009 बैच के आईपीएस पंकज चौधरी सबसे पहले जैसलमेर में कांग्रेस से जुड़े गाजी फकीर की हिस्ट्री शीट खोलने के मामले में चर्चा में आए थें, जिसके बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जैसलमेर से किशनगढ़ ट्रांसफर कर दिया था।
इसके बाद वसुंधरा सरकार में बूंदी जिले के नैनवा में साप्रदायिक हिंसा के बाद राज्य सरकार ने आईपीएस पंकज चौधरी को एपीओ कर दिया था, नैनवा में नगर पंचायत चुनावों में भड़के सांप्रदायिक दंगों में हिंदुवादी संगठनों से जुड़े लोगों पर कार्रवाई करने से स्थानीय नेतृत्व नाराज था, लिहाजा पंकज चौधरी पर लापरवाही बरतने का इल्जाम लगाते हुए उन्हे एपीओ कर दिया गया ।
पंकज चौधरी जब राजस्थान स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में तैनात थें तब उन्होंने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रमुख सचिव तन्मय कुमार पर पद का दुरुपयोग, भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता से संबंधित गंभीर आरोप लगाए थें, सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय पंकज चौधरी कई बार मुख्यमंत्री के खिलाफ भी लिख चुके हैं ।
यूपी के बलिया के रहने वाले आईपीएस पंकज चौधरी की पहली शादी 2005 में वाराणसी में सुधा गुप्ता से हुई थी, 2008 में सुधा गुप्ता से एक बेटी भी थी, लेकिन साल 2009 में आईपीएस में सेलेक्शन के बाद पहली पत्नी से पंकज चौधरी की दूरी बढ़ गई, इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में चार साल तक केस चला, जिसमें 8 मई 2018 को हाई कोर्ट ने पंकज चौधरी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पहली पत्नी से पंकज चौधरी का तलाक सुनिश्चित किया ।
मुकुल का कहना है कि वो राजस्थान की बेटी हैं, पिछले कुछ सालों से अमूमन शांत रहने वाले प्रदेश राजस्थान में सांप्रदायिक तनाव, महिलाओं के खिलाफ अपराध, भष्टाचार और कानून व्यवस्था की हालत खराब है ।
मुकुल चौधरी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार में भ्रष्टाचार का बोलबाला है, भ्रष्ट अधिकारियों की सुनी जाती है जबकि ईमानदार अधिकारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है, अपने पति और आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी के बारे मुकुल चौधरी का कहना है कि पंकज एक सोच हैं, उन्होंने राजस्थान में ईमानदारी की मिसाल कायम की है और बेईमानों के खिलाफ हमेशा आवाज उठाई है, फिर भी सरकार की तरफ से सात मामलों में चार्जशीट का सामना कर रहे हैं।
मुकुल का कहना है कि रानी को उनके कर्म हराएंगे इस बार वसुधरां राजे को उनके गढ में करारी शिकस्त देगें व झालरापाटन के आमजन को ग़ुलामी की ज़ंजीरों से बाहर निकालेगें ।
राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा की गिनती ऐसे नेताओं में होती है जिन्होंने तीन दशक से चुनाव नहीं हारा, यहां तक कि राजस्थान में भाजपा के स्तंभ माने जानेवाले भैरों सिंह शेखावत भी चुनाव हारे थे, कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत भी चुनाव हार चुके हैं, लेकिन वसुंधरा राजे ने रिकॉर्ड कायम रखा है, उन्होंने अब तक 9 चुनाव जीते हैं- 5 लोकसभा और 4 विधानसभा के।
मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद वसुंधरा ने अपने गढ़ झालावाड़ लोकसभा सीट बेटे दुष्यंत सिंह के लिए छोड़ दी थी, इस क्षेत्र में उनकी राजनीतिक पकड़ जबरदस्त मानी जाती है, लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में वसुंधरा सरकार सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है।
झालरापाटना में भाजपा के परंपरागत मतदाता रहे राजपूत और सवर्ण समाज में राजे के खिलाफ गुस्सा है,राज्य सरकार की लोकप्रियता में गिरवाट आई है, चुनाव से पहले हुए तमाम चुनावी सर्वे के मुताबिक प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन सकती है ।
मुकुल चौधरी एक परिचय यह भी है कि वे भैरोसिंह सरकार में कानून मंत्री रह चुकी शशि दत्ता की पुत्री हैं, बताया जाता है कि राजे से विवाद के चलते पंकज चौधरी को अभी तक सात चार्जशीट मिल चुकी हैं ।
मुकुल चौधरी की मानें तो उन्होंने अपने पति के साथ हो रही ज्यादती का बदला लेने के लिए ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विधानसभा क्षेत्र झालरापाटन (झालावाड़) से चुनाव लड़ने का फैसला लिया है, मुकुल का कहना है कि इस चुनाव में वे अपनी मां और भाजपा के पुराने सहयोगियों की मदद से लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ेंगी, बता दें कि शशि दत्ता खुद लंबे समय तक झालावाड़ में बतौर अधिवक्ता अपनी प्रैक्टिस कर चुकी हैं ।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और भाजपा के प्रति नाराज़गी के माहौल के बीच यदि मुकुल, राजे के गृहक्षेत्र में ठीक-ठाक प्रदर्शन करने में भी सफल रहीं तो इसे प्रदेश भाजपा के लिए बड़ी मनोवैज्ञानिक क्षति के तौर पर देखा जाएगा ।
मुकुल चौधरी की चुनावी घोषणा तब और अहम हो जाती है जब बीते दिनों झालावाड़ में ही भाजपा कार्यकर्ताओं का विरोध झेलने की वजह से मुख्यमंत्री राजे पहले ही दबाव में हैं, तब नाराज कार्यकर्ताओं के समूह ने ‘वसुंधरा वापस जाओ’, ‘वसुंधरा झालावाड़ छोड़ो’ जैसे पोस्टरों के साथ क्षेत्र में एक बाइक रैली का आयोजन किया था ।
बताया जाता है कि इस रैली में पांच सौ मोटरसाइकलों के साथ एक हज़ार से ज्यादा कार्यकर्ता शामिल हुए थे, ये सभी लोग झालावाड़ में विकास न होने और भ्रष्टाचार की वजह से नाराज थे, इन चुनावों में वसुंधरा राजे के झालरापाटन के अलावा किसी एक और सीट पर दांव लगाने जैसे कयासों के पीछे भी कुछ जानकार मुकुल चौधरी को क्षेत्र में मिल रहे समर्थन को वजह के तौर पर देख रहे हैं ।
मुकुल का कहना है कि मैं झालरापाटन क्षेत्र में सक्रिय हूं, हमारे लोग चुनाव मैदान में पहले से उतर चुके हैं और प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है, उन्होंने चुनाव लड़ने के फैसले के बारे में कहा कि झालावाड़ मेरी जन्म स्थली है,अब उसे कर्म स्थली बनाना है, मुकुल ने कहा कि झालावाड़ के लोगों ने मुझे पुकारा है और ईश्वर का भी यह इशारा है।
उन्होंने कहा कि हम प्रदेश से भ्रष्टाचार व तानाशाही का अंत चाह रहे हैं, इसी के लिए लगातार संघर्ष जारी है,भ्रष्टाचार की जड़ सीनियर लेवल पर है, जो जनप्रतिनिधि एवं अफसरों में फैली हुई है, इस गंदगी को साफ करने के लिए हमें गंदे पानी में उतरना ही पड़ा।
मुकुल पंकज चौधरी का कहना है कि मैं निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भ्रष्टाचार और कुशासन के मुद्दे पर अपने जन्म स्थान झालरापाटन से चुनाव लडूंगी, मुख्यमंत्री के शासन में पूरा प्रदेश भ्रष्टाचार और कुशासन की मार झेल रहा है, प्रदेश में अपराधों की संख्या बढ रही है, मैं इन मुद्दों पर जमीनी स्तर पर काम कर रही हूं।
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