चीन का वर्चुअल न्यूज एंकर टीवी पर पढ़ेगा खबरें

चीन का वर्चुअल न्यूज एंकर टीवी पर पढ़ेगा खबरें

China को हमेशा से कुछ न कुछ नया करने के लिए जाना जाता है. चीन जो आविष्कार करता है उसको देखकर दुनिया हैरान रह जाती है. इस बार चीन ने फिर बड़ा कारनामा करके दिखाया है.

चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी ने अपने स्टूडियो में एक ऐसा वर्चुअल न्यूज एंकर उतार दिया है, जो सूट-टाई पहने हुए होगा और जिसकी आवाज आपको किसी रोबोट जैसी लगेगी। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने इसका करीब दो मिनट का एक वीडियो भी अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया है। जिस वीडियो को पोस्ट किया गया है, वह उसका इंग्लिश वर्जन है और इसका दूसरा वर्जन भी चीनी भाषा में पेश किया गया है। अपने पहले वीडियो में वर्चुअल एंकर कहता है, ‘‘हैलो, आप देख रहे हैं इंग्लिश न्यूज प्रोग्राम। मैं आपको सूचनाएं देने के लिए लगातार काम करूंगा क्योंकि मेरे सामने लगातार टेक्स्ट टाइप होते रहेंगे। मैं आपके सामने सूचनाओं को एक नए ढंग से पेश करूंगा, जिससे आपको नया अनुभव मिलेगा”।

कहा  जा रहा है की TV चैनल पर दिखने वाला एंकर असली है या नकली अब ये बताना बेहद मुश्किल होगा|

शिंहुआ न्यूज एजेंसी का यह दावा है कि ये न्यूज प्रेजेंटर ठीक उसी तरह खबरें पढ़ सकते हैं जिस तरह से प्रोफेशनल न्यूज रीडर खबरें पढ़ते हैं। शिन्हुआ के मुताबिक ये लगातार 24 घंटे काम कर सकता है| शिंहुआ न्यूज एजेंसी का कहना है कि इससे प्रोडक्शन की लागत में बचत की जा सकेगी। इसमें ज्यादा खर्च भी नहीं होगा। यह समय-समय पर ब्रेकिंग न्यूज पढ़ने के लिए काफी उपयोगी साबित होगा।

एजेंसी का कहना है कि समय-समय पर ब्रेकिंग न्यूज रिपोर्ट प्रसारित करने के लिए ये तकनीक विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी। इस वर्चुअल एंकर की आवाज, होठों की हरकत और हाव-भाव बिल्कुल असली एंकर की तरह हैं।

दरअसल, इस तकनीक को विकसित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। इसमें मौलिक प्रेजेंटर की आवाज, लिप मूवमेंट्स और भाव-भंगिमाओं को कॉपी किया गया है।

इस वर्चुअल एंकर को बनाने में चीनी सर्च इंजन 'सोगो' की अहम भूमिका है। उसने शिन्हुआ के लिए इस तकनीकी का ईजाद किया है। यह वर्चुअल एंकर न कोई रोबोट है और न ही किसी इंसान का 3डी डिजिटल मॉडल, ये उससे बिल्कुल अलग तकनीक है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के मिशेल वूलड्रिज का कहना है कि इन प्रेजेंटर्स के लिए ये काफी मुश्किल है कि वो बिल्कुल नेचुरल नजर आएं। इन्हें कुछ मिनट से ज्यादा देर तक देख पाना संभव नहीं है।

इसके साथ ही वो इस बात पर भी जोर देते हैं कि टीवी पर जो न्यूज एंकर आते हैं लोग उन्हें उनके चेहरे से पहचानते हैं। उनकी पहचान विश्वसनीयता से जुड़ी हुई होती है, ऐसे में ये परंपरागत तरीके से बिल्कुल अलग है।

आप किसी व्यक्ति से तो कनेक्शन बना सकते हैं लेकिन किसी एनिमेशन के साथ वो जुड़ाव बना पाना संभव नहीं है।

यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स के प्रोफेसर नोएल शिर्के का मानना है कि इस पहले प्रयास की सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा की हम इसमें समय के साथ और सुधार करते रहेंगे।

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