गाजा की दस्तक - हाई अलर्ट पर नौसेना

गाजा की दस्तक - हाई अलर्ट पर नौसेना
चक्रवातीय तूफान गाजा तमिलनाडु के तटों तक पहुंच गया है। इस बीच भारतीय नौसेना को दक्षिण तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटों की ओर बढ़ रहे गाजा चक्रवाती तूफान को देखते हुये बुधवार को हाई अलर्ट कर दिया गया। तिरुवरूर, नागापटनम और कुड्डालोर जिले में भी सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए हैं। बंगाल की खाड़ी पर चक्रवाती तूफान ‘गाजा' यहां से करीब 470 किलोमीटर दूर दक्षिण पूर्व में स्थित है|  गाजा चक्रवात पर आपदा प्रबंधन के विशेष अधिकारी गगनदीप सिंह बेदी ने कहा, "यह संभावना है कि गाजा चक्रवात से आज रात भूस्खलन हो सकता है। ऐसा तमिलनाडु के नागापटनम जिले के कुड्डालोर के उत्तर में हो सकता है। लोगों को इसके लिए तैयार रहना चाहिए। इस संबंध में सरकार सभी बेहतर प्रयास कर रही है।"

गाजा  तूफान का नाम संस्कृत के शब्द गज से बना है, जिसका मतलब होता है हाथी। इस चक्रवाती तूफान को ये नाम श्रीलंका के वैज्ञानिकों ने दिया है। श्रीलंका में हाथियों की अच्छी तादात है और वहां उन्हें काफी सम्मान के तौर पर देखा जाता है। श्रीलंका के रईस लोगों में इन दिनों हाथियों के बच्चे पालने का भी एक नया चलन शुरू हो चुका है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इसी वजह से वैज्ञानिकों ने इस तूफान का नाम ‘गाजा’ रखा है।

यहां मौसम कार्यालय ने बताया कि ‘‘गाजा' गुरूवार शाम या रात को पम्बान तथा कुड्डलूर के बीच तटीय क्षेत्र को पार कर सकता है. इस दौरान 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. तमिलनाडु सरकार पहले ही 30,500 बचावकर्मी तैनात करने की घोषणा कर चुकी है, वहीं तंजौर, तिरुवरुर, पुडुकोट्टई, नागपट्टिनम, कुड्डलूर और रामनाथपुरम के कलेक्टरों ने गुरूवार को स्कूलों और कॉलेजों की छुट्टी घोषित कर दी है. चक्रवाती तूफान के मद्देनजर पुडुचेरी और कराईकल क्षेत्रों में आज सभी शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे.

बांधों पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है और इस पृष्ठभूमि में तमिलनाडु के राजस्व मंत्री आर बी उदयकुमार ने संवाददाताओं से कहा कि बांध, झीलें और नदियों पर लगातार नजर रखी जा रही है. आयोग ने मानक परिचालन प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की सलाह दी थी क्योंकि तटबंध वाले इलाकों में भारी बारिश बांधों को 24 घंटे से भी कम समय में भर सकती है.

सरकार ने तेल विपणन कंपनियों से भी बातचीत की है और उन्हें ईंधन का पर्याप्त भंडार रखने को कहा गया है. वहीं भारतीय नौसेना को भी अलर्ट कर दिया गया है. नौसेना के मुताबिक दो भारतीय नौसैनिक जहाज रणवीर और खंजर अतिरिक्त गोताखोर, डॉक्टर, हवा वाली रबर की नाव, हेलीकॉप्टर और राहत सामग्री के साथ तैयार है. नौसेना अधिकारियों ने बताया कि पूर्वी नौसेना कमान (ईएनसी) ने आवश्यक मानवीय सहायता मुहैया कराने के लिए उच्च स्तरीय तैयारी की है। तूफान बृहस्पतिवार शाम में दोनों राज्यों के तटीय क्षेत्रों को पार कर सकता है।

तिरुवरूर जिले के कलेक्टर एल निर्मलराज ने लोगों से कहा है कि आश्रयों का प्रयोग करें। कलेक्टर ने लोगों से टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1077 पर फोन करने को भी कहा है। इसके साथ ही लोग आपात स्थिति में लैंडलाइन नंबर 04366-226040, 226050, 226080 और 226090 पर भी फोन कर सकते हैं। कुड्डालोर जिला प्रशासन ने एक एफएम रेडियो चैनल (107.8) भी लांच किया है। ताकि अगर संचार के बाकी साधन काम करना बंद कर दें तो लोगों को इसके माध्यम से सूचना दी जा सके।

अलग-अलग रीजन में उठने वाले तूफानों को अलग-अलग चेतावनी केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा नाम दिया जाता है। इसका मकसद ये होता है कि वैज्ञानिकों, आम जनता और चेतावनी केंद्रों के बीच संचार में सुविधा हो और किसी तरह की गलतफहमी न हो। सामान्यतः भविष्य में आने वाले तूफानों के नाम पहले ही रख कर उनकी सूची तैयार कर ली जाती है। जैसे ‘गाजा’ के बाद अगला तूफान ‘फेथाई’ होगा। इसका नामकरण थाईलैंड के वैज्ञानिकों ने किया है। इस तूफान के भी इस वर्ष के अंत तक आने की आशंका है।

दुनिया भर में चक्रवातों के नाम रखने की शुरुआत 1953 से हुई। इसके पहले इस अवधारणा का विकास नहीं हुआ था। 1953 से वर्ल्ड मेटीरियोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (डब्लूएमओ) और मायामी नेशनल हरीकेन सेंटर ने चक्रवातों के नाम रखने की परंपरा शुरू की। डब्लूएमओ जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसी है। डब्लूएमओ, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में आने वाले चक्रवातों के नाम रखता आया है। लेकिन 2004 में डब्लूएमओ की अगुवाई वाली अंतरराष्ट्रीय पैनल को भंग कर दिया गया। इसके बाद सभी देशों से अपने-अपने क्षेत्र में आने वाले चक्रवात का नाम ख़ुद रखने को कहा गया।

पहले उत्तरी हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों का कोई नाम नहीं रखा जाता था। क्योंकि  सांस्कृतिक विविधता वाले इस क्षेत्र में ऐसा करते हुए बेहद सावधानी की जरूरत थी ताकि लोगों की भावनाएं आहत होने से कोई विवाद खड़ा न हो। लेकिन बाद में हिंद महासागर क्षेत्र के आठ देशों ने भारत की पहल पर चक्रवातीय तूफानों को नाम देने की व्यवस्था शुरू की। इसमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, श्रीलंका और थाईलैंड को मिलाकर कुल आठ देश शामिल हैं।

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