5 नवंबर को आम लोगों के लिए खुलेगा सिग्रनेचर ब्रिज

5 नवंबर को आम लोगों के लिए खुलेगा सिग्रनेचर ब्रिज
बहुप्रतीक्षित सिग्नेचर ब्रिज तैयार है। रविवार दोपहर बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पुल का उद्घाटन करेंगे। सप्ताह के पहले कार्यदिवस यानी सोमवार से इस पर वाहन दोड़ने लगेंगे। मनीष सिसोदिया ने कहा कि पुल तैयार है। इससे लोगों की आवाजाही तो आसान होगी ही, यह पर्यटकों के लिये भी सबसे बेहतरीन जगह बनेगा। रविवार शाम करीब चार बजे मुख्यमंत्री पुल दिल्लीवालों के लिए खोल देंगे।

यह पुल वजीराबाद रोड को करनाल बाईपास से जोड़ेगा। इससे न सिर्फ उत्तर-पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार, गोकुलपुरी, भजनपुरा और खजूरी की तरफ से मुखर्जी नगर, तिमारपुर, बुराड़ी और आजादपुर जाने वाले लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि कश्मीरी गेट से लोनी, सोनीपत, सहारनपुर, बागपत जैसे यूपी के शहरों में जाने वाले ट्रैफिक को जाम में नहीं फंसना पड़ेगा।

इससे पहले शुक्रवार को उद्घाटन की तैयारियों का जायजा लेने उत्तर पूर्वी दिल्ली के आप प्रभारी दिलीप पांडेय के साथ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पहुंचे। उन्होंने पूरे पुल का जायजा देकर अधिकारियों को बाकी तैयारियां भी जल्द पूरी करने का निर्देश दिया।

उद्घाटन के बाद शाम को यहां लेजर शो होगा। दिलीप पांडेय ने इसे उत्तर-पूर्वी दिल्ली की जनता को दीवाली का तोहफा बताया। साथ ही कहा कि यमुनापार का उपेक्षित पड़ा इलाका विकास के पैमाने पर बाकी दिल्ली से जल्द ही टक्कर लेगा।

पुल पर्यटकों के आकर्षण का भी केंद्र बनेगा। सिग्नेचर ब्रिज का मुख्य केंद्र उसका पिलर है  इसके शीर्ष पर जाकर दिल्ली की विहंगम तस्वीर देखी जा सकेगी। इसकी ऊंचाई कुतुबमीनार (73 मीटर) से दोगुनी से भी ज्यादा करीब 154 मीटर है। सबसे ऊपर करीब 22 मीटर ऊंचा ग्लास का एक बॉक्स बनाया गया है। बॉक्स के अंदर से लोग बाहर का नजारा देख सकेंगे। इसके लिए चार एलिवेटर लगाए गए हैं। इसके सहारे एक बार में कुल 50 लोग पुल के शीर्ष तक पहुंच सकेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दो महीने में सभी एलिवेटर काम करने लगेंगे।

सिग्नेचर ब्रिज करीब 1518.37 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाने वाला करीब 251 मीटर ऊंचा ब्रिज होगा। इसके पायलोन की ऊंचाई 154 मीटर होगी। ब्रिज पर 19 स्टे केबल्स हैं। सिग्नेचर ब्रिज का मुख्य आकर्षण उसका मुख्य पायलोन है। पायलोन के चारों तरफ शीशे लगाए गए हैं और लिफ्ट के जरिए जब लोग यहां पर पहुंचेंगे तो उन्हें यहां से दिल्ली का टॉप व्यू देखने को मिलेगा। प्रोजेक्ट की योजना करीब 13 साल पहले शुरू की गयी थी।  2004 में मंजूर इस प्रोजेक्ट को 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले तैयार होना था।  तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने 2004 में सिग्नेचर ब्रिज प्रोजेक्ट तैयार किया था। दिल्ली कैबिनेट ने प्रोजेक्ट को 2007 में मंजूरी दी। शुरुआती योजना कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले करीब 1131 करोड़ रुपये लागत से प्रोजेक्ट तैयार करने की थी। प्रोजेक्ट में लगातार देरी होती रही। वर्ष 2015 में इसकी लागत करीब 1594 करोड़ रुपये हो गई। जब इस पुल के लिए दिल्ली सरकार ने साल 1997 में बनाने का फैसला किया था तब इसकी कीमत 464 करोड़ रुपये आकी गई थी.

वहीं दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने बहुचर्चित सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन समारोह में उनको न बुलाने पर नाराजगी जताई है। तिवारी ने कहा जिस सिग्नेचर ब्रिज को लेकर मैंने दिन-रात संघर्ष किया। खजूरी खास पर अनशन किया। उसी समारोह में निमंत्रण न देकर कहीं न कहीं क्षेत्र के सांसद होने के नाते मुख्यमंत्री ने प्रोटोकाल का उल्लघंन किया है।

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