इसरो ने लॉन्च किए 31 सैटलाइट

इसरो ने लॉन्च किए 31 सैटलाइट

आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से गुरुवार को इंडियन स्पेस एंड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन ने पोलर सैटलाइट लॉन्च वीइकल (पीएसएलवी-सी43)  रॉकेट से स्वदेशी हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट (हाइसइस) व 30 अन्य सैटलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह सुबह करीब 9:58 बजे इसकी लॉन्चिंग हुई. पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) की इस साल में यह छठी उड़ान है.

इसरो प्रमुख डॉ. के सीवान ने इसे अब तक का देश का सबसे ताकतवर इमेजिंग सैटेलाइट बताया। हाइसइस के साथ आठ देशों के 30 अन्य सैटेलाइट (1 माइक्रो और 29 नैनो) भी छोड़े गए। पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) की इस साल में यह छठी उड़ान थी। उपग्रहों को धरती से 636 किमी ऊपर कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

इसरो प्रमुख डॉ. के सीवान के मुताबिक- हाइसइस को पूरी तरह से देश में ही बनाया गया है। यह खास इसलिए है क्योंकि यह सूक्ष्मता से (सुपर शार्प आई) चीजों पर नजर रखेगा। दुनिया में यह तकनीक कुछ देशों के पास ही है। कई देश हाइपर स्पैक्ट्रल कैमरा अंतरिक्ष में भेजने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उससे नतीजे मिलना आसान नहीं है।



प्रक्षेपण की उल्टी गिनती बुधवार की सुबह 5:58 बजे शुरू हो गई थी। हाइसइस धरती की सतह का अध्ययन करने के साथ मैग्नेटिक फील्ड पर भी नजर रखेगा। इसरो ने कहा कि उपग्रह को 636 किमी ध्रुवीय सूर्य समन्वय कक्ष (एसएसओ) में 97.957 डिग्री के झुकाव के साथ स्थापित किया जाएगा. उपग्रह की अभियानगत आयु पांच साल है. हाइसइस 44.4 मीटर लंबे और 230 टन वजनी पीएसएलवी रॉकेट से छोड़ा गया। पीएसएलवी चार चरण का लॉन्चिंग व्हीकल है, जिसमें ठोस ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है। हाइसइस का वजन 380 किलो जबकि 30 अन्य सैटेलाइट का वजन 261.5 किलो है। इसरो के मुताबिक, रॉकेट लॉन्चिंग के 112 मिनट (एक घंटे 52 मिनट मिनट) बाद मिशन पूरा हो जाएगा। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि एचवाईएसआईएस का प्राथमिक लक्ष्य इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वर्ण पट (स्पेक्ट्रम) के समीप इंफ्रारेड और शार्टवेव इंफ्रारेड क्षेत्रों में पृथ्वी की सतह का अध्ययन करना है. HySIS एक विशेष चिप की मदद से तैयार किया जाता है जिसे तकनीकी भाषा में ‘ऑप्टिकल इमेजिंग डिटेक्टर ऐरे’ कहते हैं। इसे रणनीतिक उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा। इस महीने इसरो की यह दूसरी लॉन्चिंग है। इससे पहले संचार उपग्रह जीसैट-29 का प्रक्षेपण किया गया था।

इस उपग्रह से धरती के चप्पे-चप्पे पर नजर रखना आसान हो जाएगा क्योंकि लगभग धरती से 630 किमी दूर अंतरिक्ष से पृथ्वी पर मौजूद वस्तुओं के 55 विभिन्न रंगों की पहचान आसानी से की जा सकेगी। हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग या हाइस्पेक्स इमेजिंग की एक खूबी यह भी है कि यह डिजिटल इमेजिंग और स्पेक्ट्रोस्कोपी की शक्ति को जोड़ती है।

हाइस्पेक्स इमेजिंग अंतरिक्ष से एक दृश्य के हर पिक्सल के स्पेक्ट्रम को पढ़ने के अलावा पृथ्वी पर वस्तुओं, सामग्री या प्रक्रियाओं की अलग पहचान भी करती है। इससे पर्यावरण सर्वेक्षण, फसलों के लिए उपयोगी जमीन का आकलन, तेल और खनिज पदार्थों की खानों की खोज आसान होगी। 31 सैटलाइट का कुल भार 261.5 किलो है। 112 मिनट में यह मिशन पूरा हो जाएगा। इन उपग्रहों में ग्लासगो की 2 नैनो सैटलाइट भी हैं। इनका उद्देश्य मौसम और ग्लोबल क्लाइमेट चेंज का मुकाबला करने में मदद करेगी।

यह पीएसएलवी की 45वीं उड़ान है। यह इस महीने में इसरो का दूसरा प्रक्षेपण है। यह प्रक्षेपण 4 स्टेज में लॉन्च हुआ। पहली स्टेज में पीएसएलवी 139 सॉलिड रॉकेट मोटर इस्तेमाल करता है, जिसे 6 सॉलिड स्टूप बूस्ट करते हैं। दूसरी स्टेज में लिक्विड रॉकेट इंजन का यूज होता है, जिसे विकास नाम से पहचाना जाता है। तीसरी स्टेज में सॉलिड रॉकेट मोटर मौजूद है जो ऊपरी स्टेज को ज्यादा ताकत से धकेलती है। चौथी स्टेज में पेलोड से नीचे मौजूद हिस्सा चौथी स्टेज है इसमें दो इंजन मौजूद होते हैं।

जिन देशों के उपग्रह भेजे गए उनमें भारत के अलावा अमेरिका के 23 सैटलाइट और ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कोलंबिया, फिनलैंड, मलयेशिया, नीदरलैंड और स्पेन (प्रत्येक का एक उपग्रह) शामिल हैं। इनमें एक माइक्रो और 29 नैनो सैटलाइट हैं। सैटेलाइटों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए अन्य देशों ने एंट्रिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (इसरो का व्यावसायिक उपक्रम) के साथ करार किया है।

अंतरिक्ष एजेंसी ने 14 नवंबर को अपने अत्याधुनिक संचार उपग्रह जीसैट-29 को जीएसएलवी एमके 3-डी 2 के साथ प्रक्षेपित किया था।

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