राम मंदिर पर प्राइवेट मेंबर बिल लाने की तैयारी


राम मंदिर पर प्राइवेट मेंबर बिल लाने की तैयारी
2019 का लोकसभा चुनाव नजदीक है और राम मंदिर का मुद्दा फिर से उठना लाजिमी है. ऐसे में अब राज्यसभा सांसद और संघ विचारक राकेश सिन्हा ने एक ट्वीट किया है. जिसमें राम मंदिर पर प्राइवेट मेंबर बिल लाने के बारे में कहा गया है. सिन्हा ने पूछा है कि अगर बीजेपी राम मंदिर पर प्राइवेट मेंबर बिल लेकर आती है तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, लालू यादव, सीताराम येचुरी और मायावती का स्टैंड क्या होगा? सिन्हा ने विपक्ष के नेताओं को इस पर अपना स्टैंड साफ करने के लिए कहा है.

क्या है प्राइवेट मेंबर बिल - किसी भी कानून को पारित कराने के लिए सबसे पहले बिल पेश किया जाता है. संसद के सदन लोकसभा और राज्यसभा में कोई बिल पेश कर पास करने के बाद ही राष्ट्रपति की सहमति मिलने से वह कानून का रूप लेता है. संसद में बिल सरकार के किसी भी मंत्री या संसद के किसी भी सदस्य के जरिए लाया जा सकता है. सरकार के मंत्री अगर बिल लाते हैं तो उसे गवर्नमेंट बिल और दूसरी स्थिति को प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में जाना जाता है.

लोकसभा और राज्यसभा में जो सांसद मंत्री नहीं है वह एक निजी सदस्य कहलाए जाते हैं. लोकसभा में ऐसे सदस्यों की ओर से जो विधेयक पेश किया जाता है, उसे निजी विधेयक या प्राइवेट मेंबर बिल के तौर पर जाना जाता है. लेकिन प्राइवेट मेंबर बिल के पारित होने की संभावना काफी कम रहती है क्योंकि इन विधेयकों का कानून का रूप लेना सरकार के रुख पर भी निर्भर रहता है. लोकसभा और राज्यसभा में हर शुक्रवार दोपहर के बाद संसदीय कार्यवाही में प्राइवेट मेंबर बिल पेश करने के लिए समय तय होता है.

केंद्र की मोदी सरकार पर राम मंदिर के लिए अध्यादेश लाने का दबाव बनाया जा रहा है। केंद्र में स्पष्ट बहुमत की सरकार और यूपी में अबतक की सर्वाधिक मजबूत स्थिति को इंजॉय कर रही बीजेपी पर इस दबाव का जवाब देने का भी दबाव है। हालांकि एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि राम मंदिर पर कानून बनाने की राह इतनी आसान नहीं है, कई अड़चनें हैं।

राकेश सिन्हा ने दूसरे ट्वीट में लिखा, 'आर्टिकल 377, जलिकट्टू और सबरीमाला पर फैसला देने में सुप्रीम कोर्ट ने कितने दिन लगाए? लेकिन दशकों से अयोध्या प्राथमिकता में नहीं है। यह हिंदू समाज के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता में है।' अगले ट्वीट में फिर उन्होंने राहुल गांधी, येचुरी और लालू को टैग करने के साथ मायावती का जिक्र करते हुए लिखा कि जो तारीख पूछते थे अब उनपर जिम्मेदारी है कि बताएं बिल का समर्थन करेंगे या नहीं?

इसी बीच, नैशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि वे (BJP) सोचते हैं कि भगवान राम उन्हें 2019 का चुनाव जिता देंगे। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव जीतने में ईश्वर मदद नहीं करेंगे क्योंकि वोट जनता करती है, भगवान राम या अल्लाह वोट नहीं करेंगे।

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