IMF के बाद trump ने दिया पाकिस्तान को बड़ा झटका, रोकी सुरक्षा मदद

IMF के बाद trump ने दिया पाकिस्तान को बड़ा झटका, रोकी सुरक्षा मदद
पाकिस्तान के लिए अच्छा समय नहीं चल रहा है. आर्थिक मोर्चे पर उसे लगातार मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है. हाल ही में चीन से लौटे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने चीन से बड़ी आर्थिक मदद मिलने का दावा किया था. जिसके बाद IMF ने इस राशि की जानकारी मांगी थी. लेकिन पाकिस्तान और चीन दोनों ने इसका खुलासा करने से मना कर दिया था. IMF ने पाकिस्तान को राहत पैकेज देने के लिए कुछ शर्तें कड़ी कर दी हैं. इन दिनों पाकिस्तान के साथ बढ़ती चीन की दोस्ती और पाकिस्तान पर अपनी कमजोर होती पकड़ को लेकर अमेरिका चिंतित है और इसी के चलते यह घटनाक्रम सामने आ रहा है.

अमेरिका की कमान संभालने के बाद से ही डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान के प्रति कड़ा रुख अपनाए हुए हैं. इमरान खान के नेतृत्व में नई सरकार के वक्त में भी ट्रंप का रवैया बदला नहीं है और अमेरिका लगातार पाकिस्तान पर आर्थिक मदद रोकने की दिशा में काम कर रहा है.

अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 1.66 अरब डॉलर की मदद रोक दी है| अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के निर्देश के बाद संयुक्‍त राष्ट्र अमेरिका ने पाकिस्‍तान को मिलने वाली सुरक्षा सहायता राशि पर रोक लगा दी है. पेंटागन के मुताबिक अमेरिका ने पाकिस्‍तान को मिलने वाली 1.66 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता राशि पर रोक लगा दी है.

इससे पहले रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आतंकवाद को रोकने के लिए पर्याप्त कदम न उठाने के चलते लाखों डॉलर की सैन्य सहायता को बंद करने के अपने प्रशासन के फैसले का बचाव किया था. ट्रंप ने अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को एबटाबाद में छिपने का ठिकाना देने के लिए भी इस्लामाबाद की आलोचना की थी.

पाकिस्तान पर ओसामा बिन लादेन को एबटाबाद में छिपाने का आरोप लगाते हुए भी ट्रंप ने ट्वीट किए थे, ट्रंप ने कहा था कि हम पाकिस्तान को हर साल अरबों डॉलर देते हैं. ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में रह रहा था. उसने कोई मदद नहीं की. मैंने आर्थिक मदद देना इसलिए देना बंद कर दिया क्योंकि वो हमारे लिए कुछ नहीं करते.'

इस पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी पलटवार करते हुए डोनाल्ड ट्रंप के बयान की आलोचना की थी. खान ने लिखा था, आखिर 1 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने, 1 लाख 40 हज़ार से ज्यादा नाटो सैनिकों और 2.5 लाख से ज्यादा अफगान सैनिकों के होते हुए भी आज तालिबान ज्यादा मजबूत क्यों हुआ है?

इमरान खान ने इस मुद्दे पर कई ट्वीट किए थे. उन्होंने लिखा कि ट्रंप के सामने आंकड़े रखने की जरूरत है. इमरान ने कहा कि अमेरिका के लिए पाकिस्तान जितना बलिदान करने वाला कोई सहयोगी नहीं हो सकता. '9/11 के हमले में कोई पाकिस्तानी शामिल नहीं था, इसके बावजूद हमने आतंक के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका का साथ दिया. इस लड़ाई में 75,000 पाकिस्तानियों की जान गई और अर्थव्यवस्था को 123 अरब डॉलर का नुकसान हुआ. इमरान ने आगे कहा कि अफगानिस्तान में तैनात 10,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिकों को रसद आपूर्ति के लिए पाकिस्तान लगातार अपने सड़क एवं हवाई मार्ग के इस्तेमाल की छूट दे रहा है. उन्होंने कहा, 'क्या ट्रंप किसी और सहयोगी का नाम बता सकते हैं, जिसने इतना कुछ खोया हो?

मंगलवार को पाकिस्तान ने एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक को तलब किया और ओसामा बिन लादेन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया और कहा कि 'यह इतिहास का बंद हो चुका अध्याय है' और इससे द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर असर पड़ सकता है.

वही सिडनी ने कहा, 'अभी तक पाकिस्तान ने अमेरिकी की प्रमुख चिंताओं के निराकरण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। मुख्य समस्या यह है कि पाकिस्तान अपने पड़ोसियों के खिलाफ हिंसा का प्रयोग करने वाले समूहों (आतंकी) को बर्दाश्त कर रहा है और वह उन्हें बढ़ावा भी देता है।' उन्होंने आगे कहा कि हालांकि पाकिस्तान के नेताओं ने आतंकवाद के मुद्दे पर सहयोग का वादा किया था, लेकिन केवल बातों से अलावा कोई गंभीर सहयोग नहीं किया गया। इस कारण राष्ट्रपति ट्रंप और ज्यादातर अमेरिकी नेता निराश हैं।

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