क्या है गिज़ा के पिरामिड का रहस्य

पिरामिड हो या फिर ममी हर चीज के पीछे गहरे रहस्य है

पिरामिड हो या फिर ममी हर चीज के पीछे गहरे रहस्य है, मिस्र की सभ्यता भी दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है जो करीब 5000 साल पुरानी है।
गिज़ा के पिरामिड अपने आपमें अद्भुत हैं, भारत की तरह ही मिस्र की सभ्यता भी बहुत पुरानी है और प्राचीन सभ्यता के अवशेष यहां की गौरव गाथा कहते हैं, यूं तो मिस्र में 138 पिरामिड हैं और काहिरा के सिर्फ गिजा का ‘ग्रेट पिरामिड’ ही प्राचीन विश्व के सात अजूबों की सूची में है।
दुनिया के सात प्राचीन आश्चर्यों में शेष यही एकमात्र ऐसा स्मारक है जिसे समय भी खत्म नहीं कर सका, मिस्र के पिरामिड वहां के तत्कालीन सम्राटों के लिए बनाए गए स्मारक हैं, जिनमें राजाओं के शवों को दफनाकर सुरक्षित रखा गया है।
इन शवों को ममी कहा जाता है, सिर्फ उनकें शवों को ही नहीं दफनाया जाता बल्कि, उनके शवों के साथ खाने-पिने की चिजें, कपडे, गहनें, बर्तन, गाने-बजाने के यंत्र, हथियार, जानवर और कई बार तो सेवक – सेविकाओं को भी उनके साथ में ही दफना दिया जाता था।
गिज़ा का पिरामिड 450 फुट ऊंचा है, इसका आधार 13 एकड़ में फैला है जो करीब 16 फुटबॉल मैदानों जितना है, यह 25 लाख चूना पत्थरों के खंडों से निर्मित है जिनमें से हर एक का वजन 2 से 30 टनों के बीच है। 


43 सदियों तक यह दुनिया की सबसे ऊंची संरचना रहा, लेकिन 19वीं सदी में ही इसकी ऊंचाई का कीर्तिमान टूट गया, ग्रेट पिरामिड को इतने गजब तरिके से बनाया गया है कि वर्तमान तकनीक भी ऐसी कृति को दोहरा तक नहीं सकती, बनाना तो बहुत दूर की बात है।
ग्रेट पिरामिड में पत्थरों का प्रयोग इस प्रकार किया गया है कि इसके भीतर का तापमान हमेशा स्थिर और पृथ्वी के औसत तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के बराबर रहता है, यदि इसके पत्थरों को 30 सेंटीमीटर मोटे टुकड़ों मे काट दिया जाए तो इनसे फ्रांस के चारों ओर एक मीटर ऊंची दीवार बन सकती है।
बताते हैं कि इसका निर्माण करीब 2560 ईसा पूर्व मिस्र के शासक खुफु के चौथे वंश द्वारा अपनी कब्र के तौर पर कराया गया था, इसे बनाने में करीब 23 साल लगे।
पिरामिड में नींव के चारों कोने के पत्थरों में बॉल और सॉकेट बनाये गये हैं ताकि ऊष्मा से होने वाले प्रसार और भूंकप से सुरक्षित रहे, प्रशन ये हे की बिना मशीनों के, बिना आधुनिक औजारों के मिस्रवासियों ने कैसे विशाल पत्थर के टुकड़ों को 450 फीट ऊंचे स्थान पर पहुंचाया और इस परियोजना को महज 23 वर्षों मे पूरा किया?
इसके लिए दर्जनों श्रमिकों को साल के 365 दिनों में हर दिन 10 घंटे के काम के दौरान हर दूसरे मिनट में एक पत्थर खंड को रखना होगा, क्या ऐसा संभव था?
मिस्रवासी पिरामिड का इस्तेमाल वेधशाला, कैलेंडर और सूर्य की परिक्रमा में पृथ्वी की गति तथा प्रकाश के वेग को जानने के लिए करते थे।
विशेषज्ञों के मुताबिक पिरामिड के बाहर पाषाण खंडों को इतनी कुशलता से तराशा और फिट किया गया है कि जोड़ों में एक ब्लेड भी नहीं घुसायी जा सकती।
मिस्र के पिरामिडों के निर्माण में कई खगोलीय आधार भी पाये गये हैं, जैसे कि तीनों पिरामिड ऑरियन राशि के तीन तारों की सीध में हैं, वर्षों से वैज्ञानिक इन पिरामिडों का रहस्य जानने के प्रयत्नों में लगे हैं किंतु अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है।
पिरामिड को गणित की जन्मकुंडली भी कहा जाता है जिससे भविष्य की गणना की जा सकती है, गीज़ा का सबसे बड़ा पिरामिड 146 मीटर ऊंचा था। ऊपर का 10 मीटर अब गिर चुका है। उसका आधार करीब 54 या 55 हजार मीटर का है।
कुछ लोग पिरामिडों में स्थित जादुई असर की बात भी करते हैं जो मानव स्वास्थ्य पर शुभ प्रभाव डालता है, ग्रेट पिरामिड एक पाषाण(पत्थर)-कंप्यूटर जैसा है, यदि इसके किनारों की लंबाई, ऊंचाई और कोणों को नापा जाय तो पृथ्वी से संबंधित भिन्न-भिन्न चीजों की सटीक गणना की जा सकती है।
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