मध्यप्रदेश का सीएम बनते ही कमलनाथ का सबसे पहला कार्य

मध्यप्रदेश का सीएम बनते ही कमलनाथ का सबसे पहला कार्य - कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणापत्र में ही 2 लाख रुपये तक के कर्जमाफी की घोषणा की थी, जिसे सरकार गठन के तुरंत बाद ही बाद अमल में लाया गया. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शपथ लेने से पहले ही कहा कि था कि वे 10 दिनों से पहले ही किसानों का कर्ज माफ करेंगे. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने अपने वचन पत्र में जनता से जो वादे किए थे, उनमें से सबसे अहम वादा किसानों की कर्जमाफी का ही था. कमलनाथ ने कहा था कि किसान कर्ज में जन्म लेता है, कर्ज में मरता है. उन्होंने दावा किया कि उनके शासनकाल में चीजें बदलेंगी. कमलनाथ ने कहा कि उनकी पार्टी वचनपत्र में लिखे गए वादों को पूरा करेगी. उन्होंने कहा कि गोशाला पर किए गए वादे को भी वे पूरा करेंगे.

कमलनाथ (Kamal Nath) मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री बन गए हैं. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कमलनाथ को पद और गोपनियता की शपथ (Kamal Nath Oath Ceremony) दिलाई. शपथ ग्रहण के फौरन बाद कमलनाथ भोपाल में नए बने मंत्रालय एनेक्सी के उद्घाटन के लिए पहुंचे और इसके फौरन बाद सीएम आफिस पहुंच गए. सीएम ऑफिस का जायज़ा लेने के बाद कमलनाथ ने सीएम का पदभार ग्रहण किया और कुर्सी पर बैठते ही किसानों के कर्ज माफी से जुड़ी फ़ाइल पर दस्तखत कर दिये.
मध्यप्रदेश का सीएम बनते ही कमलनाथ का सबसे पहला कार्य


मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए 28 नवंबर को मतदान हुआ था और 11 दिसंबर को आए चुनाव परिणाम में प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को 114 सीटें मिलीं. यह संख्या साधारण बहुमत, 116 सीट, से दो कम हैं. हालांकि बसपा के दो, सपा के एक और चार अन्य निर्दलीय विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन दिया है. जिससे कांग्रेस को फिलहाल कुल 121 विधायकों का समर्थन हासिल है. वहीं, भाजपा को 109 सीटें मिली हैं.

मध्यप्रदेश का सीएम बनते ही कमलनाथ का सबसे पहला कार्य - मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, एचडी देवगौड़ा, शरद यादव, राकांपा के शरद पवार, चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद थे. शपथ ग्रहण समारोह जम्बूरी मैदान में हुआ. निवर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस समारोह में शिरकत की. उन्होंने यहां मौजूद तमाम कांग्रेसी और गैर-बीजेपी दलों के नेताओं से मुलाकात की. कई मौकों पर वो मुस्कराते भी दिखे. साथ ही उन्होंने शपथ ग्रहण के बाद कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथ पकड़कर जनता का अभिवादन किया.

शपथग्रह के कुछ ही घंटे बाद मध्यप्रदेश सरकार की तरफ से जारी विज्ञप्ति में कहा गया, 'मध्यप्रदेश शासन एतद् द्वारा निर्णय लिया जाता है कि मध्यप्रदेश राज्य में स्थित राष्ट्रीयकृत तथा सहकारी बैंकों में अल्पकालीन फसल ऋण के रूप में शासन द्वारा पात्रता अनुसार पाए गए किसानों के 2 लाख रुपये की सीमा तक का दिनांक 31 मार्च, 2018 की स्थित में बकाया फसल ऋण माफ किया जाता है. बता दें कि किसानों की ऋण माफी से मध्यप्रदेश सरकार पर 56 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. इसके अलावा मध्यप्रदेश  के सीएम कमलनाथ ने किसानों का कर्जा माफ करने के बाद दो और बड़े फैसले लिए. सरकार ने मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की राशि को 28 हजार से बढ़ाकर 51 हजार कर दिया. इसके अलावा तीसरा बड़ा फैसला है, नए उद्योग लगाने पर या मध्यप्रदेश में निवेश करने पर उद्योगपतियों को सिर्फ तभी सब्सिडी मिलेगी जब उद्योगों में 70 प्रतिशत रोजगार स्थानीय लोगों को दिया जाएगा.

कुर्सी गंवाने के बाद शिवराज सिंह ने भी कहा था कि वो उम्मीद करते हैं कि कांग्रेस की सरकार आते ही 10 दिनों के भीतर किसानों की कर्जमाफी की जाएगी. अब कमलनाथ ने अपने वादे पर खरा उतरते हुए कर्जमाफी की फाइल पास कर दी.

कर्ज माफी जून 2009 के बाद के कर्जदार किसानों की होगी. इसमें लगभग 33 लाख किसानों को फायदा होगा. प्रदेश के किसानों पर सहकारी बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंक, ग्रामीण विकास बैंक और निजी बैंकों का 70 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है. इसमें 56 हजार करोड़ रुपये का कर्ज 41 लाख किसानों ने लिया है. वहीं, लगभग 15 हजार करोड़ रुपये डूबत कर्ज (एनपीए) है. कर्ज माफी के लिए फिलहाल जिस फॉर्मूले पर मंथन हो रहा है, उसमें डूबत कर्ज को माफ करने के साथ नियमित कर्ज पर लगभग 25 हजार रुपये प्रोत्साहन दिया जाएगा. बताया जा रहा है कि इससे लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय भार सरकार पर आएगा.

मध्यप्रदेश का सीएम बनते ही कमलनाथ का सबसे पहला कार्य - मध्यप्रदेश सरकार की तरफ से किसानों की कर्जमाफी की घोषणा के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट किया. उन्होंने ट्वीट किया, 'मध्यप्रदेश के सीएम ने किसानों का कर्ज माफ किया.”  चुनावी नतीजे आने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कहा था कि सबसे पहले हमारी प्राथमिकता किसानों की कर्जमाफी की होगी. राहुल गांधी ने कहा था कि यह जीत किसानों की है. युवाओं की है. छोटे दुकानदारों की है. राहुल गांधी ने कहा कि अब बदलाव का समय है. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था कि पीएम मोदी ने किसानों के साथ जो वादा किया था वह भी टूटा है. उन्होंने कहा कि हम जहां जीते हैं, वहां ऐसी सरकार देंगे उसपर लोग गर्व करेंगे. उन्होंने कहा था कि सरकार का गठन होते ही किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा.

इसी के साथ कांग्रेस सरकार का कार्यकाल शुरू हो गया. सामने नयी राह और नयी चुनौतियां हैं. सबसे बड़ी चुनौती घोषणा पत्र जिसे कांग्रेस ने वचन पत्र का नाम दिया था, उस पर अमल की है. दूसरी बड़ी चुनौती कांग्रेस के सामने है. अगले 6 महीने के अंदर आम चुनाव हैं. प्रदेश में ज़्यादा से ज़्यादा लोकसभा सीट जीतना एक बड़ा चैलेंज है.

नौ बार के सांसद 72 साल के कमलनाथ गांधी परिवार के नजदीकी हैं और वे छिंदवाड़ा से ही लगातार प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। संजय गांधी और कमलनाथ गहरे दोस्त थे। कमलनाथ की स्कूल शिक्षा दून स्कूल में हुई, जहां संजय गांधी उनके सहपाठी थे। गांधी परिवार से नजदीकी के कारण उन्हें इंदिरा गांधी का तीसरा पुत्र कहा जाता था। कमलनाथ का जन्म कानपुर में हुआ था। बीती 18 नवंबर को वे 72 साल के हो गए। 1973 में अलका नाथ के साथ विवाह हुआ, उनके दो पुत्र हैं। कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद राजनीति में प्रवेश किया।कमलनाथ कांग्रेस में मौजूदा पीढ़ी के एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्होंने गांधी परिवार की तीन पीढ़ियों इंदिरा गांधी, राजीव-सोनिया और राहुल गांधी के साथ काम किया है। 2001-04 तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप भी जिम्मेदारी निभाई।
कमलनाथ ने अपने 38 साल के संसदीय अनुभव के दौरान कई केंद्रीय मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। कपड़ा, वन एवं पर्यावरण, वाणिज्य और उद्योग, परिवहन एवं राजमार्ग और शहरी विकास मंत्रालयों के मंत्री के तौर पर कांग्रेस की सरकारों में काम किया। वे सबसे पहले 1980 में छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र से जीते थे। 2014 तक लगातार नौवीं बार चुनाव जीत चुके हैं।

2007 में उन्होंने एफडीआई मैगजीन और फाइनेंशियल टाइम्स बिजनेस का पर्सनालिटी ऑफ द ईयर के पुरस्कार जीते| 2008 में ईकोनॉमिक्स टाइम्स का बिजनेस रिफॉर्म ऑफ द ईयर के पुरस्कार जीते| 2012 में एशियन बिजनेस लीडरशिप फोरम अवॉर्ड 2012 का एबीएलएफ स्टेट्समैन अवॉर्ड जीते| 2011 में उन्होंने सबसे अमीर केंद्रीय मंत्री के रूप में कमलनाथ ने 273 करोड़ की संपत्ति घोषित की


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