अशोक गहलोत ने माफ किया किसानों का कर्ज

अशोक गहलोत ने माफ किया किसानों का कर्ज - राजस्थान सरकार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार शाम को एक फैसले में किसानों के 2 लाख तक के कर्ज की माफी की घोषणा की है. राहुल गांधी ने कहा कि तीनों राज्यों में किसानों का कर्जमाफ कर दिया गया। इस आदेश के तहत कोऑपरेटिव बैंकों के किसानों का पूरा कर्ज माफ होगा. जबकि जो किसान कमर्शियल बैंक के ऋण नहीं चुका पाए और बैंक के डिफाल्टर हैं, उनका दो लाख तक का कर्ज माफ होगा. उन्होंने बताया कि वसुंधरा सरकार ने 2000 करोड़ तक का कर्ज माफ किया था और 8000 का करोड़ का कर्ज़ छोड़ दिया. इस ऋण माफी से सरकार पर 18000 करोड़ का भार पड़ेगा और  30 नवंबर 2018 तक के ऋण माफ किए जाएंगे.

हमने 10 दिन कहा था, लेकिन ऐसा 2 दिन में ही कर दिया गया। कर्ज माफी की घोषणा के बाद उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा-कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा किए गए वादे के अनुसार हमारी सरकार ने किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा कर दी है। कांग्रेस जो कहती है वह करती है।
अशोक गहलोत ने माफ किया किसानों का कर्ज

अशोक गहलोत ने माफ किया किसानों का कर्ज - हाल ही में तीन राज्यों में बनी कांग्रेस सरकारों ने किसानों का कर्ज माफ कर दिया है. इस तरह से 2014 के बाद से अभी तक देश के 11 राज्यों में किसानों के कर्ज माफ किए जा चुके हैं. देश में सबसे पहले किसानों की कर्ज माफी पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने की थी. 28 साल के बाद भी कर्ज माफी चुनावी जीत का सबसे हिट फॉर्मूला है. हाल ही में इस वादे ने कांग्रेस को तीन राज्यों की सत्ता में वापसी करा दी.

राज्य सरकार पर 18 हजार करोड़ रुपए का भार पड़ेगा। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद राजस्थान में भी कांग्रेस सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने का फैसला लिया है। भूपेश बघेल ने भी सोमवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद राज्य के 16.65 लाख किसानों का 6100 करोड़ रु. का कर्ज माफ करने का फैसला लिया। कमलनाथ ने सोमवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री का काम संभालते ही 34 लाख किसानों का 2 लाख रुपए तक का कर्ज माफ करने की घोषणा कर दी थी। कुल 38 हजार करोड़ रु. का कर्ज माफ होगा।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कर्ज माफी की जानकारी देते हुए बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 10 दिन के भीतर किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था। हमने इसे पूरा कर दिया। उन्होंने कहा कि वसुंधरा सरकार ने 2000 करोड़ रुपए तक का कर्ज माफ किया था और 8000 करोड़ का कर्ज छोड़ दिया।

तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भाजपा शासित गुजरात और असम ने भी कुछ ऐसे ही कदम उठाए| गुजरात ने बिजली के बकाया बिल और असम ने किसानों का कर्ज माफ किया| भाजपा शासित गुजरात सरकार ने 6.22 लाख बकाएदारों का 625 करोड़ बिजली बिल और असम सरकार ने आठ लाख किसानों का 600 करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर दिया। बिजली बिलों में माफी की घोषणा जसदण विधानसभा सीट पर उपचुनाव से ठीक 48 घंटे पहले की गई। भाजपा ने ओडिशा में सत्ता में आने पर किसानों का कर्ज भी माफ करने का ऐलान किया है।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकार द्वारा किसानों की ऋण माफी की घोषणा के बाद असम सरकार द्वारा भी इस ओर कदम बढ़ाने से बैंकरों की चिंता बढ़ने लगी है। क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि यदि इसी तरह से दो-तीन साल में कर्ज माफी की घोषणा होती रही, तो फिर देश के किसी भी राज्य का किसान बैंक से लिए गए कर्ज का एक भी पैसा नहीं लौटाएगा। इससे जहां बैंकों की माली हालत खराब होगी, वहीं एनपीए के डर से बैंक नया लोन देने से डरेंगे।

अशोक गहलोत ने माफ किया किसानों का कर्ज - नेशनल आर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स (एनओबीडब्ल्यू) के उपाध्यक्ष अश्वनी राणा ने कहा कि सिर्फ कर्ज माफ करने से किसानों की स्थिति नहीं सुधरेगी, बल्कि अन्य राज्यों के किसानों की तरफ से भी कर्ज माफी की मांग बढ़ेगी। बीते दिनों मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ द्वारा चुनावी वादा पूरा करने के लिए किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा के बाद असम सरकार ने भी इसी और कदम बढ़ाया। यही नहीं, इसके बाद गुजरात सरकार ने भी बिजली के बिलों को माफ करने की घोषणा करने में देर नहीं की।

अश्वनी राणा का कहना है कि माफ करने से राजनीतिक लाभ तो मिल जाएगा, लेकिन किसानों की हालत में अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इससे बाकी प्रदेशों में भी गलत संदेश जाएगा। जो किसान कर्ज वापस करने की स्थिति में हैं, वे भी सोचेंगे कि सरकार आज नहीं तो कल उनका कर्ज भी माफ कर देगी, इसलिए, इसकी किस्त क्यों जमा करें। उनका कहना है कि आखिर किस कीमत पर सरकारें राजनीतिक लाभ का खेल खेल रही हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र के एक बड़े बैंक के सेवानिवृत्त अध्यक्ष ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि इससे बैंकों की आर्थिक स्थिति तो खराब होगी ही, इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। जब किसानों के मन में बैठ जाएगा कि दो-तीन या पांच साल में कर्ज माफ होना ही है, तो उसकी सर्विसिंग क्यों की जाए? जब कर्ज की सर्विसिंग नहीं होगी, तो बैंक नया लोन देने में आनाकानी करेंगे। ऐसे में रसूख वाले किसान तो कर्ज लेने में सफल हो जाएंगे, लेकिन जरूरतमंद किसानों पर इसका असर पड़ेगा।

अशोक गहलोत ने माफ किया किसानों का कर्ज - इन सबसे किसान की दशा नहीं बदलेगी, इसलिए सरकारों को कर्ज माफ करने की जगह किसानों की दशा सुधारने के लिए फसल बीमा, फसल के भंडारण की सुविधाएं, स्थानीय स्तर पर उनकी फसल को लेकर प्रसंस्करण इकाई का निर्माण, फसल का उचित मूल्य देने जैसे कामों पर प्रयास करना चाहिए।

वही बैंकर के इस लॉजिक के विरुद्ध कृषि अर्थशास्त्री और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा ने कहा कि किसानों की कर्ज माफी पर तरह तरह के सवाल उठने लगते हैं। वहीं, जब कॉरपोरेट क्षेत्र का लाखों करोड़ रुपये एनपीए हो जाता है और बैंक उसे राइट ऑफ कर देता है, तो फिर बैंकर इसका विरोध क्यों नहीं करते। इससे तो यही माना जाएगा कि बैंकर भी कॉरपोरेट क्षेत्र से मिले हुए हैं, जो बैंकों के लाखों करोड़ रुपये दबाए हुए हैं।

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