स्टालिन की अगले PM के लिए राहुल की पैरवी

स्टालिन की अगले PM के लिए राहुल की पैरवी - मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अपना जादू चलाने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अब दक्षिण में भी जलवा बिखेर रहे हैं. डीएमके ने विपक्ष की ओर से राहुल गांधी का नाम पीएम कैंडिडेट के लिए प्रस्तावित कर दिया है. चेन्नई में रविवार को सोनिया-राहुल की मौजूदगी में डीएमके अध्यक्ष स्टालिन ने कहा कि राहुल गांधी में मोदी सरकार को हराने की ताकत है और वे पीएम पद के लिए राहुल गांधी के नाम को प्रस्तावित करते हैं.

इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और रिजर्व बैंक जैसी संस्थाओं को नष्ट नहीं करने दिया जाएगा। कांग्रेस की सहयोगी पार्टी द्रमुक द्वारा यहां आयोजित रैली में राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा सरकार सिर्फ एक विचारधारा से देश चलाने में यकीन रखती है। उसे आइडिया ऑफ इंडिया में यकीन नहीं। लेकिन हम इसे खत्म नहीं होने देंगे। मोदी सरकार पर सरकारी संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट, रिजर्व बैंक, चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को खत्म करने की अनुमति नहीं जाएगी। हम सभी मिलकर इसे रोकेंगे।
स्टालिन की अगले PM के लिए राहुल की पैरवी

स्टालिन की अगले PM के लिए राहुल की पैरवी - द्रमुक के दिवगंत अध्यक्ष एम करुणानिधि की प्रतिमा के अनावरण के बाद इस रैली का आयोजन किया गया था। तेदेपा सुप्रीमो और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू भी रैली में शामिल थे। कार्यक्रम में राहुल गांधी और चंद्रबाबू नायडू के अलावा केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी, अभिनेता से नेता बने रजनीकांत के साथ ही द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन और पार्टी के नेता और पदाधिकारी मौजूद थे। एमडीएमके अध्यक्ष वाइको भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

राहुल गांधी ने कहा कि करुणानिधि की याद और तमिलनाडु की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के सम्मान में भारत का हर व्यक्ति एक साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने कहा कि भारत के सभी लोग मिलकर 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराएंगे।

वहीं द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने अगले प्रधानमंत्री के रूप में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का नाम प्रस्तावित किया है। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने की पुरजोर वकालत की.

स्टालिन की यह अपील द्रमुक की उसी परंपरा का हिस्सा है जब उनके पिता दिवंगत एम करूणानिधि ने नेतृत्व की कमान संभालने के लिए इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी को आमंत्रित किया था. द्रमुक अध्यक्ष यहां एक रैली को संबोधित कर रहे थे जिसमें आंध्र प्रदेश और केरल के मुख्यमंत्रियों क्रमश: एन चंद्रबाबू नायडू और पी विजयन ने भी भाग लिया. भाजपा की अगुवाईवाले राजग से संबंध तोड़ने के बाद से ही नायडू अगले संसदीय चुनाव के लिए भाजपा विरोधी एक महागठबंधन बनाने के प्रयासों में लगे हैं. स्टालिन ने बीते समय को याद करते हुए कहा कि दिवंगत इंदिरा गांधी के प्रति समर्थन जाहिर करते हुए करूणानिधि ने 1980 में ऐलान किया था, पंडित नेहरू की बेटी का स्वागत है. एक स्थायी सरकार दें. इसी प्रकार उन्होंने 2004 में सोनिया गांधी को यह कहते हुए निमंत्रित किया था, इंदिरा गांधी की बहू का स्वागत है, भारत की बेटी जीतनी चाहिए.

स्टालिन ने कहा, 2018 में थैलाइवार कैलंगनार की प्रतिमा के अनावरण के मौके पर मैं प्रस्ताव करता हूं कि हमें दिल्ली में एक नया प्रधानमंत्री बनाना चाहिए. हम एक नया भारत बनाएंगे, थैलाइवार कैलंगनार का बेटा होने के नाते मैं तमिलनाडु से राहुल गांधी की उम्मीदवारी का प्रस्ताव करता हूं. यहां अन्ना अरिवलयम में द्रमुक के मुख्यालय पर करूणानिधि की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किए जाने के बाद रैली का आयोजन किया गया था. स्टालिन ने कहा, राहुल में फासीवादी नाजी मोदी सरकार को परास्त करने की क्षमता है. मैं मंच पर मौजूद सभी सम्मानित पार्टी नेताओं से अपील करता हूं. हम राहुल गांधी के हाथ मजबूत करेंगे, हम देश को बचायेंगे.

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस और द्रमुक के बीच एकता का संदेश लोगों में जाना चाहिए. उन्होंने कहा, तमिलनाडु और देश के लोगों में यह संदेश जाना चाहिए कि हम एक हैं और अपने देश के संविधान और इसके मूल्यों को बचाने एवं संरक्षण करने के लिए दृढ़ हैं जिन्होंने पिछले 70 वर्षों में भारत का निर्माण किया है और उसे बनाये रखा है. करूणानिधि के साथ संबंधों को याद करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि दिवंगत नेता 2004 से 2014 तक संप्रग के बड़े सहयोगी और उसकी एक बड़ी ताकत थे. उन्होंने कहा, मुझे निजी तौर पर याद है कि हम अपनी गठबंधन सरकार के मार्गदर्शन के लिए उनके ज्ञान और अनुभव का सहारा लेते थे. सोनिया गांधी ने करूणानिधि की जनता की सेवा, उनके साहित्यिक जुनून, तमिल भाषा के प्रति प्यार और उनकी शक्तिशाली भाषण कला के लिए उन्हें याद किया.

स्टालिन की अगले PM के लिए राहुल की पैरवी - वही विपक्षी दलों के कई नेता 2019 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी गठबंधन की ओर से किसी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किये जाने के खिलाफ लगते हैं. विपक्षी खेमे के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विपक्षी खेमे की प्रतिक्रिया ऐसे समय में सामने आई है, जब द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को विपक्ष के प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी होना चाहिए, क्योंकि उनमें भाजपा को शिकस्त देने की क्षमता है. विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने बताया की विपक्ष के कई नेता प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में किसी का नाम घोषित किये जाने के खिलाफ हैं. सपा, तेदेपा, बसपा, तृणमूल और राकांपा स्टालिन की घोषणा से सहमत नहीं है. यह जल्दीबाजी है. लोकसभा परिणामों के बाद ही प्रधानमंत्री का निर्णय होगा.

बताया जा रहा है कि बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने विपक्षी एकता को झटका देने की तैयारी पहले ही कर दी थी? अखिलेश यादव ने शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत नहीं की। मायावती के अलावा तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शपथ ग्रहण समारोह में नहीं दिखीं। ममता बनर्जी ने कहा कि वह पारिवारिक मजबूरियों के चलते शामिल नहीं हो पाएंगी, लेकिन उनकी तरफ से उनके प्रतिनिधि वहां मौजूद होंगे। लेकिन मायावती और अखिलेश ने शामिल नहीं होने के लिए अभी तक कोई वाजिब कारण नहीं बताया। ऐसे में संकेत साफ है कि विपक्षी एकता का जो ताना-बाना कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी बुन रहे हैं, वो कही बिखर ना जाये| हालांकि कई विपक्षी नेता शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। कांग्रेस ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी न्योता दिया था। आप की तरफ राज्‍यसभा सांसद संजय सिंह इस समारोह में शामिल हुए।

विपक्ष अभी तक राहुल गांधी के नाम पर एकमत नहीं है। तीन राज्‍यों में विधानसभा चुनाव में जीतने के बाद कांग्रेस को बल जरूर मिला है, वहीं कुछ नेता राहुल गांधी के नेतृत्‍व के भरोसे 2019 लोकसभा चुनाव लड़ने की सलाह भी दे रहे हैं। लेकिन ज्‍यादातर विपक्षी नेताओं को राहुल गांधी स्‍वीकार नहीं हैं। वहीं द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री प्रत्याशी घोषित कर विपक्षी नेताओं को भौहें तनवा दी हैं।

स्टालिन की अगले PM के लिए राहुल की पैरवी - लगता है राहुल गांधी को विपक्ष को एकजुट करने के लिए अब किसी नई रणनीति पर जल्‍द ही काम करना पड़ेगा, क्‍योंकि लोकसभा चुनाव में अब ज्‍यादा समय नहीं बचा है।

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