प्रदेश में बंद सरकारी स्कूलों को पुन: खोलने की कवायद


जयपुर। प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभालने के बाद से ही पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के फैसलों में बदलाव करना शुरू कर दिया है। हाल ही में एक नई कवायद शुरू हो गई है जिसके तहत भाजपा शासन के दौरान बंद किए गए सरकारी स्कूलों को पुन: खोलना प्रस्तावित है। विभाग ने 3717 स्कूलों की भौतिक स्थिति की जानकारी मांगी है ताकि इनको फिर से शुरू करने को लेकर निर्णय लिया जा सके। इसके लिए फिलहाल 3 बिंदू तय किए गए हैं। इन बिंदुओं के आधार पर जिलों से तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। भाजपा सरकार में करीब 20 हजार स्कूलों को नजदीकी स्कूलों में मर्ज करते हुए बंद कर दिया गया था। कांग्रेस तब से ही स्कूल बंद करने का विरोध करती आ रही है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को अपने घोषणा पत्र में भी शामिल किया था। फिलहाल विभाग ने 3717 स्कूल ऐसे चिन्हित किए हैं जिनको खोलने की संभावनाएं तलाशी जा सके। शिक्षा विभाग के आदेश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय हरकत में आ गए हैं। आरटीई नियमों के मापदंडानुसार 1 किमी की दूरी में प्राथमिक स्कूल और 2 किमी की दूरी पर उच्च प्राथमिक स्कूल होना जरुरी है। इस नियम के विरुद्ध कोई स्कूल मर्ज किया गया है तो उसको वापस खोलने का प्रस्ताव भेजे। जनजाति और दुर्गम क्षेत्र जिनमें एक ही राजस्व ग्राम में अन्य स्कूलों को समन्वित करते हुए आदर्श स्कूल गठित किए गए। लेकिन मर्ज हुए स्कूल और जिसमें मर्ज किया गया ऐसे दोनों स्कूलों के बीच जंगल, पहाड़ी, राष्ट्रीय राज मार्ग, रेलवे लाइन, नदी, बरसाती नाले होने की स्थिति है तो उसको खोलने के लिए प्रस्ताव भेजे। भामाशाहों द्वारा निर्मित कराए गए स्कूल भवन जिसमें पर्याप्त आधारभूत सुविधाएं (कमरे) है और समय समय पर भामाशाहों या दानदाताओं द्वारा विकास कार्य के लिए सहयोग दिया जाता रहा है। ऐसे स्कूल स्थानीय मांग के आधार पर फिर से खोला जाना प्रस्तावित है।
वहीं शिक्षा राज्यमंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा का कहना है कि भाजपा सरकार ने स्कूलों को बंद करके शिक्षा व्यवस्था का ढांचा बिगाड़ दिया। हमने वादा किया था कि भाजपा सरकार की स्कूलों को बंद करने की नीति की समीक्षा करेंगे। फिलहाल अधिकारियों से आरटीई नियमों को ताक पर रखकर बंद किए 3717 स्कूलों की रिपोर्ट मांगी गई है।
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