अमृत योग में आएगी बसंत पंचमी

                                             अमृत योग में आएगी बसंत पंचमी

मनेगा गोविंददेवजी का प्रागट्योत्सव


जयपुर। माघ शुक्ल पंचमी पर 10 फरवरी को बसंत पंचमी मनाई जाएगी। इस बार अमृत योग में मां सरस्वती की आराधना की जाएगी, इस दिन शाम को सर्वार्थसिद्धि योग भी रहेगा।
 ऐसे में बसंत पंचमी का अबूझ मुहूर्त होने के साथ दोनों योग आने से शहर में खूब शादी-ब्याह सहित कई मांगलिक आयोजन होंगे। 
वहीं इस दिन शहर के आराध्य गोविंददेवजी का प्रागट्योत्सव भी मनाया जाएगा। शहर के मंदिरों में ठाकुरजी को पीली पोशाक धारण करवाकर केसरयुक्त खीर का भोग लगाया जाएगा। घर-घर पीले चावल बनाए जाएंगे।

माघ शुक्ल पंचमी 9 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 26 मिनट पर शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन 10 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 09 मिनट तक रहेगी। ज्योतिषाचार्य डॉ. रवि शर्मा ने बताया कि पंचमी उदियात में 10 फरवरी को आएगी, इसलिए बसंत पंचमी भी 10 फरवरी को ही मनाई जाएगी। 
इस दिन सुबह 7.11 से दोपहर 2.09 बजे तक अमृत योग रहेगा, वहीं शाम 7.37 बजे से सर्वार्थसिद्धि योग शुरू होगा, जो अगले दिन 11 फरवरी को सुबह 6.03 बजे तक रहेगा। हालांकि बसंत पंचमी पर पूजन का श्रेष्ठ समय सुबह 7.11 से दोपहर 12.35 बजे तक रहेगा। 
इस दिन नींव पूजन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना, नवीन व्यापार शुरू करने के साथ अन्य मांगलिक कार्य शुभफलदायक होंगे। इस दिन बच्चों को विद्यारंभ करना भी शुभ माना गया है।

                                       अमृत योग में आएगी बसंत पंचमी

भागवताचार्य वैभवीश्री के अनुसार मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन शब्दों की शक्ति ने मनुष्य के जीवन में प्रवेश किया था, पुराणों में लिखा है सृष्टि को वाणी देने के लिये ब्रह्माजी ने कमंडल से जल लेकर चारों दिशाओं में छिड़का, इस जल से हाथ में वीणा धारण कर जो शक्ति प्रकट हुई, वह सरस्वती देवी कहलायी, उनके वीणा का तार छेड़ते ही तीनों लोकों में ऊर्जा का संचार हुआ और सबको शब्दों में वाणी मिल गई। 
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विशेष रूप से पूजा की जाती है।

बसंत पंचमी को शहर के आराध्य गोविंददेवजी का प्रागट्योत्सव मनाया जाएगा। इस दिन सुबह की झांकियों में परिवर्तन रहेगा, वहीं शाम की झांकियां यथावत रहेगी। 
इस दिन सुबह 4.45 से 5 बजे तक ठाकुरजी के अभिषेक व तिथि पूजन होगा। धूप झांकी खुलने से पहले अधिवास पूजन होगा। इसके बाद धूप आरती होगी। 
शृंगार झांकी के बाद मां सरस्वती का पूजन पश्चिमी परिक्रमा में ठाकुरजी के चित्रपट के समक्ष होगा। इसके बाद राजभोग आरती होगी। बसंत पंचमी को ठाकुरजी को पीली पोशाक धारण करवाई जाएगी। पीले पुष्पों से शृंगार किया जाएगा, वहीं केसर मिश्रित खीर का भोग अर्पित होगा। 
मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी ने बताया कि ठाकुरश्री गोविंददेवजी बसंत पंचमी पर ही जयपुर में प्रतिष्ठित हुए थे। इसका शास्त्रों में भी उल्लेख मिलता है। इसदिन ठाकुरजी का पट्टाभिषेक अनुष्ठान होगा। 
माधव गौड़ीय संप्रदाय के ग्रंथ भक्ति रत्नाकर में उल्लेख है कि 'श्री गोविंद प्रगटे होइलो रूप द्वारे...' यानी रूप गोस्वामी ने ठाकुर श्रीगोविंद देवजी को प्रगट किया है। 
पहले वृदांवन में और बाद में जयपुर में बसंत पंचमी को ही ठाकुरजी को प्रतिष्ठित किया गया। तब से माघ शुल्क पंचमी को ठाकुरजी का पाटोत्सव मनाया जाता रहा है।

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