पितृ तर्पण के लिए फाल्गुन में भी श्राद्ध


                                           पितृ तर्पण के लिए फाल्गुन में भी श्राद्ध
फाल्गुन अमावस्या श्राद्ध के लिए सर्वश्रेष्ठ

जयपुर
पितृ पक्ष में किसी कारणवश श्राद्ध नहीं करने वालों के लिए फाल्गुन में पितर पूजन व श्राद्ध का मौका आ रहा है। फाल्गुन मास में पूर्वेधु: श्राद्ध, अष्टका श्राद्ध, अन्वष्टका श्राद्ध और पितर अमावस्या पितरों के श्राद्ध के लिए श्रेष्ठ बताए गए हैं।
इनमें पहला पूर्वेधु: श्राद्ध फाल्गुन कृष्ण सप्तमी पर 25 फरवरी को आएगा। वहीं इसके अगले दिन 26 फरवरी को फाल्गुन अष्टमी पर अष्टका श्राद्ध और 27 फरवरी को नवमीें के दिन अन्वष्टका श्राद्ध आएगा। 
वहीं फाल्गुन अमावस्या पर 6 मार्च को पितर अमावस्या का श्राद्ध निकाला जाएगा।

सम्राट पंचांग के निर्माता ज्योतिषाचार्य चन्द्रशेखर शर्मा ने बताया कि पितरों को प्रसन्न करने के लिए फाल्गुन में चार दिन आएंगे, जिसमें पितरों के लिए पूजन व श्राद्ध किए जाएंगे। 
 पहला फाल्गुन सप्तमी पर पूर्वेधु श्राद्ध, दूसरा अष्टमी पर अष्टका श्राद्ध, तीसरा नवमी पर अन्वष्टका श्राद्ध आएगा। वहीं फाल्गुन अमावस्या पर पितर अमावस्या को भी श्राद्ध रहेगा।

                         पितृ तर्पण के लिए फाल्गुन में भी श्राद्ध

इन चारों दिन अधिकांश लोग पितरों का श्राद्ध करेंगे। कई लोग तीर्थ स्थलों पर श्राद्ध कर्म करेंगे और गरीबों को पितरों की तृप्ति के निमित्त दान आदि करेंगे। ज्योतिषाचार्य नरोत्तम पुजारी ने बताया कि भविष्य पुराण में नित्य, नैमित्तिक, काम्य, वृद्धि, सपिंडन और पार्वण रूप से श्राद्ध 12 प्रकार के बताए गए हैं। 
इनके अलावा नंदीमुख, षोडशाह, वार्षिक, गया श्राद्ध, तीर्थ श्राद्ध आदि इनसे अलग है। साधारणतया दो प्रकार के श्राद्धों का विधान देखने को मिलता है, जिन्हें तिथि श्राद्ध और पार्वण श्राद्ध कहा गया है। 
तिथि श्राद्ध साल में एक बार निकाले जाते हैं, जबकि पार्वण श्राद्ध प्रतिवर्ष पितृ पक्ष में किए जाते हैं, लेकिन किसी कारणवश जो पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाए, उन लोगों के लिए पूर्वेधु: श्राद्ध, अष्टका श्राद्ध, अन्वष्टका श्राद्ध और पितर अमावस्या पितरों के श्राद्ध 'क लिए सुनहरा मौका है।

                       फाल्गुन अमावस्या श्राद्ध के लिए सर्वश्रेष्ठ

ज्योतिषाचार्य चन्द्रशेखर का कहना है कि 6 मार्च को फाल्गुनी अमावस्या रहेगी, इस दिन रविवार है। वहीं अमावस्या से पहले दिन महाशिवरात्रि आ रही है, ऐसे में यह अमावस्या पितरों को मोक्ष दिलाने वाली मानी जा रही है।

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