स्वास्य बीमा में परखें जोखिम

                                              स्वास्य बीमा में परखें जोखिम
स्वास्य बीमा में परखें जोखिम

स्वास्य बीमा का लाभ उठाते समय इसका ऊंचा प्रीमियम बड़ी बाधा है, यदि आप ऊंचा बीमा कवर रखते हैं या उम्र दराज हैं तो पर्याप्त बीमा कवर का खर्च वहन करना आसान नहीं है।

इन दोनों ही स्थितियों में प्रीमियम आपके बजट से बाहर निकल जाता है और आपको कम कवर लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा मुहैया कराया जा रहा स्वास्य बीमा आकर्षक एवं किफायती विकल्प है। सभी आयु वर्ग के लिए कम प्रीमियम होने की वजह से यह बीमा बैंक खाताधारकों के लिए उपयोगी साबित होता है।

चाहे खाताधारक को पहले से कोई बीमा हो या ज्यादा उम्र, यह स्वास्य बीमा सस्ते प्रीमियम पर उपलब्ध हैं। हालांकि इस तरह की बीमा योजनाओं में कुछ खामियां भी हैं।

इस वजह से बीमारी की स्थिति में इन पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसलिए बैंकों के जरिए स्वास्य बीमा खरीदने से पहले इसके नफा-नुकसान को अच्छी तरह समझ लेना जरूरी है।

                                                            क्या हैं खूबियां

बैंक अपने ग्राहकों को बीमा कंपनियों के साथ गठजोड़ के जरिए यह स्वास्य बीमा मुहैया कराते हैं, उदाहरण के लिए बैंक आफ बड़ौदा का नेशनल इंश्योरेंस और पंजाब नेशनल बैंक का ओरियंटल इंश्योरेंस के साथ करार है। प्रीमियम की दरों को कम रखने के लिए बैंक द्वारा ये पालिसियां बल्क डील यानी थोक सौदे के तहत आफर की जाती हैं।

                                              स्वास्य बीमा में परखें जोखिम

इस वजह से इन पालिसीधारकों को बीमा पालिसी के सामान्य कागजात मिलते हैं न कि बीमा प्रमाण पत्र, चूंकि बैंक बीमा कंपनी के साथ गठजोड़ करता है इसलिए अपने ग्राहकों के लिए यह उत्पाद डिजाइन करता है।

जाहिर है इसकी कई विशेषताएं अन्य खुदरा उत्पादों की तरह बेहतर हो सकती हैं, हालांकि कुछ बीमा में सीमाएं होती हैं जैसे कि कमरे का किराया, सर्जरी और को-पेमेंट।
यदि आप पीएनबी की ओरियंटल रायल मेडिकेड की खूबियां पढ़ेंगे तो इसमें कमरे के किराए और आईसीयू के लिए 1-2 फीसद की सबलिमिट है। 
इसमें कुछ अतिरिक्त सुविधाएं-जैसे निशुल्क वार्षिक जांच व भर्ती होने से पहले और बाद के खर्च भी शामिल हैं।

यह उत्पाद उम्रदराज लोगों के लिए आकर्षक खूबियों के साथ उपलब्ध होते हैं, इसमें बैंक एक मध्यस्थ की भूमिका निभाता है।

सभी दावा निपटान बीमाकर्ता और पालिसीधारक के बीच होते हैं।
                                          क्या हैं नुकसान
बैंकों की स्वास्य बीमा पालिसियों में कुछ नुकसान भी हैं जिन्हें पालिसीधारक को ध्यान में रखना चाहिए,सबसे पहला यह कि बैंक केवल एक मध्यस्थ है।

एक बार पालिसी खरीदने के बाद इस मामले में आपका बैंक से कोई संबंध नहीं रह जाता है, किसी भी विवाद या दावों का निपटान आपको बीमा कंपनी के साथ मिलकर ही करना होगा।
इस मामले में बैंक आपकी कोई मदद नहीं करेगा।

इसलिए आप बीमा के बाद की सेवाओं के लिए बैंक पर निर्भर नहीं रह सकते, दूसरे, इन उत्पादों में अधिकतम कवर की एक सीमा हो सकती है।

चूंकि ये उत्पाद किफायती दर पर एक बड़े ग्राहक आधार की सेवा के लिए डिजाइन किए गए हैं इसलिए कंपनियां कवरेज की अधिकतम सीमा रख सकती हैं।

इसलिए आपको इसका आकलन करने की जरूरत है कि जो कवर लिया है वह परिवार के लिए पर्याप्त है या नहीं।
उदाहरण के लिए यदि कंपनी के कवर की अधिकतम सीमा पांच लाख रपए है तो यह दिल्ली जैसे महानगर में रहने वाले परिवार चार लोगों के लिए पर्याप्त नहीं है।

सचाई यह है कि ये पालिसियां साझेदारी में हैं और बीमा कंपनियों को इस व्यवसाय से लाभ कमाना है, यदि इससे बीमा कंपनियों को घाटा होता है तो वह इस साझेदारी से हट सकती हैं अथवा लाभ न होने पर बैंक इससे बाहर निकल सकते हैं।

इस स्थिति में पालिसीधारक के पास कोई चारा नहीं बचता, हालांकि स्वास्य बीमा क्षेत्र में अब पोर्टेबिलिटी की सुविधा उपलब्ध है।

आप इसे किसी दूसरी कंपनी की पालिसी में पोर्ट करा सकते हैं लेकिन बैंक की पालिसी सस्ती होने की वजह से इसमें पोर्ट की सुविधा नहीं मिलती।

ऐसे में बैंक से नाता तोड़ने पर नई कंपनी आपकी उम्र के आधार पर प्रीमियम का आकलन करेगी, ऊंचे प्रीमियम पर ही आपको सभी लाभ दिए जाएंगे।

उदाहरण के लिए यदि आप छह साल से बैंक आफ बड़ौदा के साथ पालिसी चला रहे हैं जहां अभी तक पांच लाख रपए के कवर के लिए 7800 रपए का प्रीमियम था।

यह परिवार के चार सदस्यों के लिए काफी कम सस्ता था, अब बैंक का गठजोड़ खत्म हो गया तो इस पालिसी को दूसरी कंपनी में पोर्ट तो करा सकते हैं लेकिन इसके लिए प्रीमियम करीब तीन गुना बढ़कर 24,000 रपए तक हो जाएगा।,इसे वहन कर पाना हर किसी के बूते की बात नहीं है।

यदि बैंक किसी अन्य कंपनी के साथ करार करता है तो इसमें समय लग सकता है, ऐसे में आपको नई पालिसी ही खरीदनी पड़ेगी। 
ऐसे में बैंक से खरीदी गए स्वास्य बीमा पालिसी का फायदा उठाने के लिए साझेदारी का चलना बहुत जरूरी है।

                                                      क्या हैं विकल्प
भले ही ये पालिसियां सस्ती हैं लेकिन समझदारी इसी में है कि स्वास्य की आपात स्थिति के लिए इन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

यदि आप वेतनभोगी हैं तो आपका ग्रुप इंश्योरेंस ऊंचे कवर के लिए अच्छा है और यदि ऐसा नहीं है तो अलग से एक अच्छी पालिसी के साथ टापअप पालिसी खरीदें। 
इससे कम प्रीमियम में आपका बीमा कवर बढ़ जाएगा, यदि आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं तो इसके लिए विशिष्ट पालिसी खरीदें।

यदि आप बैंक की स्वास्य बीमा पालिसी पर निर्भर हैं तो इन तमाम जोखिमों के लिए तैयार रहना चाहिए, यह बात अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि आपको जीवन के किसी भी स्तर पर ज्यादा प्रीमियम का भुगतान करना पड़ेगा।

यह आज ही तय करने में समझदारी है कि ऐसा सही उत्पाद खरीदें जो जीवन भर तो नहीं लेकिन लंबी अवधि तक उपलब्ध रहे।

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