टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं,इनकम टैक्स के गणित को समझिए

 5 लाख तक की आय पर ही छूट

5 लाख तक की आय पर ही छूट
अंतरिम बजट के अनुसार अगर आपकी आमदनी पांच लाख से ज्यादा है, तो पहले के मुताबिक ही टैक्स लगेगा. पांच लाख तक आमदनी वाले को टैक्स नहीं देना पड़ेगा, अभी तक इस पर 2.5 से पांच लाख तक की आमदनी वालों को पांच फीसदी टैक्स देना पड़ता था।
इनकम टैक्स के गणित को समझिए
5 लाख रुपए तक टैक्सेबल इनकम पर कोई टैक्स नहीं
5 लाख से ऊपर टैक्सेबल इनकम वालों को कोई राहत नहीं
अगर मेरी सालाना आय 8 लाख रुपए है
अगर मैं होम लोन पर 2 लाख रुपए ब्याज देता हूं तो मुझे कोई टैक्स नहीं देना होगा
अगर मैं 1.50 लाख रुपए बचत योजनाओं में निवेश करता हूं
अगर मैं 50 हजार रुपए एनपीएस में जमा करता हूं
अगर मेरी सालाना आय 10 लाख रुपए है
अगर मैं होम लोन पर 2 लाख रुपए ब्याज देता हूं तो बाकी 6 लाख रुपए पर टैक्स की गणना ऐसे होगी
2.50 लाख तक: कोई टैक्स नहीं   50000 रुपए: स्टैंडर्ड डिडक्शन
बाकी 3 लाख की आय पर 30000 रुपए टैक्स लगेगा
2 लाख की आय पर 5% टैक्स: 10000 रुपए
1 लाख की आय पर 20% टैक्स: 20000 रुपए
अगर मैं 1.5 लाख रुपए बचत योजनाओं में निवेश करता हूं
अगर मैं 50 हजार रुपए एनपीएस में जमा करता हूं
अब तक स्टैंडर्ड डिडक्शन 40000 रुपए था जो अब बढ़कर 50000 रुपए हो जाएगा। यानी 5 लाख रुपए से ऊपर की टैक्सेबल आय पर मात्र 500 रुपए की सालाना राहत मिलेगी।
किराए और ब्याज से आमदनी पर भी छूट बढ़ी
बैंक और पोस्ट ऑफिस में जमा राशि पर ब्याज से आय पर टीडीएस में छूट पहले 10 हजार रुपए थी जो अब 40 हजार रुपए हो गई है।
किराए से आमदनी पर टीडीएस में छूट पहले 1.80 लाख रुपए थी जो अब 2.40 लाख रुपए हो गई है।
अगले दो साल में आईटीआर का वेरिफिकेशन तुरंत ऑनलाइन होगा। इसमें किसी टैक्स अफसर की भूमिका नहीं होगी। आगे चलकर स्क्रूटनी के लिए भी दफ्तर नहीं जाना होगा। टैक्स अफसर कौन है और टैक्स देने वाला कौन है, यह दोनों को पता नहीं चल पाएगा।
इनकम टैक्स से जुड़ी सभी समस्याओं का ऑनलाइन समाधान हो रहा है। 99.54 प्रतिशत इनकम टैक्स रिटर्न्स को बिना किसी छानबीन के मंजूर किया गया है। जल्द ही 24 घंटे में सभी इनकम टैक्स रिटर्न प्रोसेस होंगे और तुरंत रिफंड दिए जाएंगे।
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