वल्र्ड कैंसर-डे आज : देश में हर साल 14 लाख नए कैंसर रोगी


वल्र्ड कैंसर-डे आज : देश में हर साल 14 लाख नए कैंसर रोगी
लंग कैंसर में धूम्रपान सबसे बड़ा कारण

कैंसर के मरीजों में लगातार इजाफा हो रहा है। वहीं, दूसरी तरफ अज्ञानता, महंगा उपचार और नई दवाओं के शोध में आ रही कमी के चलते इस रोग पर पूरी तरह से काबू पाना बहुत मुश्किल होता जा रहा है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के आंकड़ों की मानें तो देश में हर साल 14 लाख से अधिक कैंसर के मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें से करीब 45 फीसदी पुरुष व 17 फीसदी महिलाओं में कैंसर की वजह धूम्रपान और तंबाकू की लत है। 
यही कारण है कि राजस्थान में भी लंग कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू और धूम्रपान पर पूरी तरह रोक लग जाए तो मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर रोगियों की संख्या आधी की जा सकती है। इसी तरह मोबाइल फोन, सोशियल मीडिया पर सक्रिय रहने, नींद कम लेने से ब्रेन कैंसर के मामले भी कम उम्र में ही काफी आ रहे हैं। 
वहीं ब्लड कैंसर, ब्रेस्ट व गर्भाशय, पेट, अग्नाशय, लिवर कैंसर के मरीज भी बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं।

लीवर कैंसर का भी बढ़ रहा खतरा
लीवर ट्रांसप्लांट सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. अंकुर अटल गुप्ता ने बताया कि लीवर कैंसर के कुछ लक्षण तब भी नजर आते हैं जब रोगी बदहजमी, पेट के अल्सर या साधारण वाइरल फीवर से पीडि़त होता है। धूम्रपान और बहुत अधिक शराब पीना पेट कैंसर का सबसे सामान्य कारण है। 
इसी तरह शरीर में विटामिन बी-12 का अभाव भी पेट कैंसर का कारण बन सकता है। इसमें संदेह नहीं कि फलों और सब्जियों से युक्त स्वास्थ्यप्रद भोजन सभी तरह के कैंसर के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।

कम उम्र में होरहा ब्लड कैंसर

विशेषज्ञों ने बताया कि समय रहते ब्लड कैंसर का इलाज शुरु हो जाए तो यह दवाइयों से ही ठीक हो सकता है। सामान्य ब्लड टेस्ट से ही इसका पता चल सकता है। 
शरीर में खून की कमी, तिल्ली का बढऩा, लिम्फोसाइट काउंट बढना, थकान, बुखार, सांस फूलना आदि ऐसे लक्षण हैं जो ब्लड कैंसर के संकेत देते हैं। 
भारत में क्रोनिक मायलाइड ल्यूकेमिया (सीएमएल) कैंसर 20 से 30 साल की उम्र के लोगों में ज्यादा हो रहा है।

ब्रेन का कैंसर भी खतरनाक

डॉक्टरों ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर या ब्रेन कैंसर मस्तिष्क की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि के कारण होता है। यह खतरनाक और जानलेवा होता है। 
ब्रेन के कैंसर में भी गलत लाइफ स्टाइल ज्यादा जिम्मेदार है। मोबाइल फोन, चैटिंग आदि में देर रात तक जागना, नींद पूरी नहीं हो पाना, जैनेटिक या जीन की खराबी, प्रदूषण, रसायनयुक्त खाद्य सामग्री सेवन, ज्यादा तनाव आदि इसके कारण कहे जा सकते हैं।

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लंग कैंसर में धूम्रपान सबसे बड़ा कारण 

चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. एमके गुप्ता व कैंसर रोग विषेशज्ञ डॉ. असीम कुमार सामर ने बताया कि लंग या फेफड़े के कैंसर के 90 फीसदी मामलों में मरीज धूम्रपान, तंबाकू, अल्कोहल, गुटखा खाने का आदि होता है। 
वहीं प्रदूषण व फैक्ट्री आदि से निकलने वाला धुंआ भी बड़ा कारण है। इस बीमारी का शुरू में दवाईयों से उपचार किया जाता है, मगर स्थिति खराब होने पर सर्जरी की जाती है। 
लंग कैंसर से बचाव के लिए धूम्रपान से पूरी तरह नाता तोडना होगा। साथ ही नियमित व्यायाम और पैदल चलना, प्राणायाम करना इससे बचाव कर सकते हैं।

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