अजय देवगन के पिता वीरू देवगन का निधन, वीरू ने खुद से किया वादा निभाया

अजय देवगन के पिता वीरू देवगन का निधन, वीरू ने खुद से किया वादा निभाया
अजय देवगन के पिता वीरू देवगन का निधन, वीरू ने खुद से किया वादा निभाया


हिंदी फिल्मों के सुपरस्टार अजय देवगन के पिता व मशहूर एक्शन डायरेक्टर वीरू देवगन का सोमवार को निधन हो गया।
मिली जानकारी के अनुसार वीरू देवगन की मौत कार्डिक अरेस्ट की वजह से हुई है, बताया जा रहा है कि वह काफी समय से बीमार चल रहें थे और मुंबई के सांताक्रूज हॉस्पिटल में एडमिट थे।
हाल ही में अजय देवगन पिता वीरू देवगन की तबीयत खराब होने की वजह से ही फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ के प्रमोशनल इवेंट भी कैंसिल कर चुके हैं।
वीरू देवगन कई सुपरहिट फिल्मों के स्टंट कोरियोग्राफ कर चुके हैं.उन्होंने करीब 80 से अधिक फिल्मों में एक्शन कोरियोग्राफ करने का काम किया था।
वीरू देवगन को इसके लिए उन्हें कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया, वीरू देवगन ने सोमवार को मुंबई में अंतिम सांसें लीं।
उनकी सेहत काफी समय से खराब चल रही थी, वह मुंबई के सांताक्रूज में सूर्या अस्पताल में भर्ती थे, मिली जानकारी के अनुसार सोमवार को ही मुंबई में उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा।
वो 77 बरस के थे, हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े, सबसे सफल स्टंट डायरेक्टरों में से एक वीरू ने डेढ़ सौ से ज्यादा फिल्मों में स्टंट डायरेक्ट किया।
जिस साल गुरु दत्त की प्यासा रिलीज हुई थी, देश के कोने-कोने से रोज़ाना दर्ज़नों लड़के बंबई आते, सबको हीरो बनना था।
ऐसा ही एक लड़का था, अमृतसर में रहता, एक दिन दोस्तों ने तय किया और घर से भाग निकले, पंजाब से फ्रंटियर मेल आती थी उन दिनों, चढ़ गए।
टिकट लिया नहीं, चेकिंग हुई, तो पकड़े गए, हफ़्ते भर जेल में रहना पड़ा, बंबई तब भी निर्मम थी, भूख-प्यास. सिर पर छत नदारद।
साथ आए दोस्त हिम्मत हारकर अमृतसर लौट गए. बस एक नहीं लौटा, उसका नाम- वीरू देवगन दाल-रोटी चलाने को वीरू टैक्सियां साफ करने लगे।
कुछ बढ़ई का काम भी किया, कुछ हालत सुधरी, तो फिर फिल्मों में आने की चाहत ने जोर मारा, फिल्म स्टूडियो के फेरे लगाने लगे, सोचा था, हीरो बनेंगे, मगर यहां मक्खन चेहरे वालों की पूछ थी, वीरू को लगा, हीरो बनने के रेस में उनका नंबर नहीं आने का, कुछ फिल्मों में छोटा रोल किया भी, मगर मन लायक काम नहीं था, यूं एक काम से दूसरा काम, ट्रायल-ऐरर करते करते आख़िर ऐक्शन को खोज निकाला, और फिर यही करते रह गए, खुद का हीरो बनना रह गया था, उस टीस को ये कहकर दवा दी कि मेरा सबसे बड़ा बेटा बनेगा हीरो, मतलब पैदा होने से पहले ही अजय देवगन हीरो बन चुके थे।
हीरो बनाने के लिए, छुटपन से ही काम सिखाया, फिल्मों का, सेट का माहौल, डांस सीखना, जिम करवाना, जुबान साफ करने को उर्दू. घुड़सवारी, ऐक्शन का ऐ से न तक, हीरो बनने से पहले ही अजय हीरो मटीरियल थे, और फिर जब कुकु कोहली ने ‘फिल्म और कांटे’ बनाने की ठानी, तो कुकु और वीरू को अजय के किरदार के लिए अजय से बेहतर कोई लगा ही नहीं।
वीरू ने अपने बेटे के लिए एक फिल्म भी डायरेक्ट की- हिंदुस्तान की कसम, ये अपने जमाने की बड़ी महंगी फिल्म थी, हालांकि फिल्म चली नहीं, मगर देखने वालों ने कहा, फिल्म भले बेकार हो मगर स्टंट अच्छे थे।

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