राहुल इस्तीफ़ा देने की बजाय CWC में जमा नेताओं को हटाएं

राहुल इस्तीफ़ा देने की बजाय CWC में जमा नेताओं को हटाएं
राहुल इस्तीफ़ा देने की बजाय CWC में जमा नेताओं को हटाएं

लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश की लेकिन कांग्रेस वार्किंग कमेटी ने इसे नामंजूर कर दिया।
लेकिन राहुल गांधी इस्तीफा देने पर अड़े हुए हैं, राहुल गांधी का कहना है कि वह पार्टी को मजबूत करने के लिए हमेशा काम करते रहेंगे, लेकिन वो अपना इस्तीफा वापस नहीं लेंगे।
वहीं प्रियंका गांधी का कहना है कि राहुल को कुछ समय दिया जाना चाहिए जिससे किसी अन्य वैकल्पिक प्लान तैयार किया जा सके।

लेकिन राजनैतिक विचार धारा के लोगों का कहना है की सोनिया गांधी अध्यक्ष पद से चली गईं, मगर उनकी पूरी टीम आज भी CWC का हिस्सा है।

टीम नहीं बदली. मोतीलाल वोरा बिना सहारे के ठीक से चल नहीं सकते, वो क्यों मंजूर करेंगे राहुल का इस्तीफ़ा, जब उनमें खुद ही रिटायर हो जाने की समझ नहीं है?।

ग़ुलाम नबी आज़ाद, मनमोहन सिंह, ए के एंटनी, अंबिका सोना, मल्लिकार्जुन खड़गे, अशोक गहलोत, ओमान चांडी, आनंद शर्मा, तरुण गोगोई, हरीश रावत, सिद्दारमैया और भी ढेर सारे नेता, जो सोनिया से भी पहले के दौर से हैं, और आज भी CWC में बने हुए हैं।
इनमें से ज्यादातर नेता अपने गढ़ से नहीं जीत सकते, वो ज्यादातर समय लूटियन्स दिल्ली में बिताते हैं, किसी तरह पार्टी के अंदर जोड़-तोड़ करके पांच सालों तक अपनी प्रासंगिकता बचाए रखने के फेर में लगे रहते हैं, ये लोग अमित शाह की कसी हुई चुनावी रणनीति के सामने कहीं नहीं ठहर पाते हैं।

कांग्रेस के अंदर एक भी ऐसा नेता नहीं, जिसके अंदर राहुल गांधी जैसी बात हो, कोई भी नहीं, जो राहुल की तरह भीड़ खींच सकता हो।

वो भी तब, जब खुद राहुल भी बहुत ज्यादा असरदार नहीं रहे हैं, सोचिए फिर कि बाकी नेता कितने प्रभावहीन होंगे।

कांग्रेस पहले भी गांधी परिवार से बाहर के लोगों को नेतृत्व देने का प्रयोग कर चुकी है.,वो जानती है कि गांधी परिवार के अलावा कोई और कमान संभाले तो पार्टी बंट जाती है।
ये सच है कि राहुल गांधी अकेले चुनाव नहीं जीत सकते भारत के एक बहुत बड़े हिस्से ने नरेंद्र मोदी को चुना है, उनके नाम पर NDA को वोट दिया है।

मगर इस जीत के पीछे अमित शाह की संगठन में की गई रात-दिन की मेहनत का भी हाथ है,. उस मेहनत ने इस जीत की स्क्रिप्ट लिखी है।

कांग्रेस के पास कोई संगठन ही नहीं बचा है, ये उन लोगों के हाथ में कैद है, जो लोगों के बीच जाकर मेहनत करके, वहां जनाधार बनाने की जगह पार्टी के अंदर खुद को बचाए रखने में खप रहे हैं।
ये ऐसे नेता हैं जिनकी हस्ती कांग्रेस से बनी है, जो अपनी पूरी की पूरी ताकत कांग्रेस से पाते हैं, मगर बदले में उसे कुछ नहीं देते।

कांग्रेस के अंदर फैसले लेने वाली सबसे बड़ी ताकत है CWC. नेतृत्व बदला है, तो फैसले लेने वाली ताकतों को भी बदलना होगा।

वरिष्ठ नेताओं को चाहिए कि वो नए नेतृत्व को राह दिखाएं, वो CWC का हिस्सा नहीं होने चाहिए, मार्ग दर्शक मंडल बनायें उसमे इनके अनुभव का इस्तेमाल करें हमारे यहां की संस्कृति ऐसी है कि वरिष्ठों के साथ सख़्ती दिखाना बड़ा मुश्किल हो जाता है।

मगर फिलहाल तो राहुल गांधी की सबसे बड़ी चुनौती यही है, उन्हें पार्टी को फिर से खड़ा करना होगा, ये लंबा सफ़र है, इसकी शुरुआत वो CWC से कर सकते हैं।

कांग्रेस की जैसी हालत है, उसने उसकी प्रासंगिकता ख़त्म कर दी है, अगर राहुल सच में ही कांग्रेस को गुमनाम हो जाने सरीखे भविष्य से बचाना चाहते हैं, तो उन्हें अपने इस्तीफ़े पर फिर से सोचना चाहिए. उन्हें इस्तीफ़ा देने की जगह CWC को ही खत्म कर देना चाहिए।
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