राहुल गाँधी बनेंगे नेता प्रतिपक्ष ?

                                                        राहुल गाँधी बनेंगे नेता प्रतिपक्ष ?
राहुल गाँधी बनेंगे नेता प्रतिपक्ष
लोकसभा चुनावों के आए नतीजे चौंकाने वाले हैं, एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने जहां इस चुनाव में 303 सीटों पर अकेले कब्जा जमाया और एनडीए को मिलाकर देखें तो यह आंकड़ा 352 तक पहुंच गया है वहीं कांग्रेस के महज 52 सांसद ही जीतकर आ पाए हैं, नेता प्रतिपक्ष के लिए कम से कम लोकसभा सीट का दस फीसदी यानी 55 सीटें विपक्षी पार्टी के खाते में होनी ही चाहिए लेकिन कांग्रेस उससे भी तीन पायदान नीचे रह गई है ।

ऐसे में राहुल गाँधी का नेता प्रतिपक्ष बनाना तभी संभव हे जब एनसीपी का कांग्रेस में विलय हो इसके प्रयास शुरू हो चुके हैं ।

कांग्रेस ने देश भर में 421 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 52 उम्मीदवार 18 प्रदेशों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से जीत कर संसद तक पहुंचने में कामयाब हुए हैं।
कांग्रेस ने सबसे ज्यादा केरल में 15 सीटें जीती हैं, इसके बाद पंजाब और तमिलनाडु में आठ-आठ सीटें जीती हैं, 17 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में वह खाता भी नहीं खोल पाई।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी की परंपरागत सीट अमेठी में भाजपा उम्मीदवार केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से चुनाव हार गए, राहुल केरल की वायनाड सीट से चार लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज करने में सफल रहे।

उधर महाराष्ट्र कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी में हलचल मची हुई है, ऐसे में एनसीपी के कांग्रेस में विलय की बातें जोर पकड़ रही हैं।

इसके पक्ष में दलील दी जा रही है कि सिर्फ सोनिया गांधी के विदेशी मूल के होने के चलते ही कांग्रेस से निकलकर एनसीपी बनी थी, इसके अलावा दोनों की विचारधारा और तौर- तरीके में रत्ती भर भी फर्क नहीं है।

दोनों ने केंद्र और राज्य में सरकार भी चलाई, वहीं सोनिया गांधी का विदेशी मूल का मुद्दा भी खत्म हो गया है, साथ ही पहले दोनों दल महाराष्ट्र में बराबर की ताकत रखते थे, तब विलय संभव नहीं था।

दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की लंबी फेहरिस्त को एक दल में लाना खासा मुश्किल था, लेकिन अब दोनों कमज़ोर हैं।

ऐसे में चर्चा है कि इसी साल होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले दोनों एकजुट होकर मुकाबला करें तो ज़्यादा बेहतर रहेगा।

पार्टी के नेताओं ने प्रस्ताव भी तैयार किया है, जिसके तहत विलय होने पर एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता का पद दे दिया जाए।

इससे विपक्षी एकता को पवार धार देंगे, वहीं लोकसभा में एनसीपी के 5 सांसदों के विलय से कांग्रेस सदस्यों की संख्या भी बढ़कर 57 हो जाएगी और उसको विपक्ष के नेता का पद भी मिल जाएगा, जिस पर राहुल खुद काबिज होकर मोदी सरकार से मुकाबला कर सकते हैं।

दरअसल, शरद पवार की बढ़ती उम्र के मद्देनजर भविष्य में एनसीपी के पास राष्ट्रीय स्तर का कोई चेहरा फिलहाल नहीं है. पवार के भतीजे अजीत पवार राज्य की राजनीति से बाहर नहीं निकले और न निकलना चाहते हैं।

उधर अभी तक पवार की बेटी सुप्रिया सुले केंद्र की राजनीति में पवार जैसा कद बना नहीं पाई हैं इसलिए अगर सुप्रिया को कांग्रेस केंद्र की राजनीति में अच्छे औहदे पर रखने का वादा करे तो बात बन सकती है ।

हालांकि, दोनों दलों का आलाकमान चाहता है कि ये विलय ऊपर से थोपा हुआ ना दिखे बल्कि, नीचे कार्यकर्ताओं से इसकी आवाज़ उठे।

यही वजह है कि इस मसले पर नेता कुछ भी बोलने से बच रहे हैं और दोनों दलों के आलाकमान फिलहाल देखो और इंतज़ार करो की नीति पर अमल कर रहे हैं।

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