राजस्थान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पायलट पद से त्यागपत्र देगें ?

राजस्थान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पायलट पद से त्यागपत्र देगें ? 
राजस्थान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पायलट पद से त्यागपत्र देगें ? उप्र कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर तथा ओडिसा कांग्रेस अध्यक्ष निरंजन पटनायक ने राहुल को इस्तीफा भेज दिया है,  इसी के साथ इन अटकलों का बाजार गर्म हो रहा है की पायलेट भी त्याग पत्र देंगे   
लोकसभा चुनाव 2014 से पहले राजस्थान कांग्रेस विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक पराजय के बाद नए हालात में पार्टी को खड़ा करने के लिए अब केंद्रीय कंपनी मामलों के राज्यमंत्री सचिन पायलट के हाथों में कमान सौंपी गई|

उन्होंने नए प्रदेशाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला विधानसभा चुनाव में हार के बाद डॉ. चंद्रभान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था|

उनका त्यागपत्र मंज़ूर करने के बाद पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पिछले हफ़्ते सचिन पायलट का नाम नए प्रदेशाध्यक्ष के रूप में घोषित किया था |

पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस के मज़बूत होने की उम्मीद सभी ने जाहिर की थी, पायलट जातिगत तौर पर गुर्जर समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, वैसे भी पायलट को सभी जातियों के बीच संतुलन साधने वाला युवा नेता माना जाता रहा था |

पायलट ने दौसा और अजमेर जैसे संसदीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया था, पिता राजेश पायलट ने दौसा और भरतपुर क्षेत्रों का संसद में प्रतिनिधित्व किया था, जबकि मां रमा पायलट ने बूंदी, अलवर और झालावाड़ जैसे इलाक़ों में सक्रिय राजनीति की है, इस लिहाज़ से प्रदेश में उनको अच्छा समर्थन मिला |

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के लिए एक साथ कई युवा दावेदारों को तैयार करने की नीति पर चल रहे थे इसीलिए अब प्रदेश संगठन की ज़्यादातर जिम्मेदारियां नई पीढ़ी के नेताओं को सौंपने की तैयारी की जा रही थी |

200 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के सिर्फ़ 21 सदस्य ही जीते, भाजपा ने 163 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि पिछली विधानसभा में कांग्रेस के 96 विधायक जीते थे.
पायलट के सामने ताज़ा चुनौती लोकसभा चुनाव की थी , राज्य में लोकसभा की 25 सीटें हैं, जिनमें 20 कांग्रेस, चार भाजपा और एक निर्दलीय के पास थी प्रदेश का रुझान यह है कि जिस पार्टी की सरकार होती है, उसी की ज़्यादा सीटें आती हैं |
आखिर 2014 लोकसभा चुनाव में राजस्थान कांग्रेस को एक भी सीट हासिल नहीं हुई, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक और मौका देते हुए उनका अध्यक्ष पद बरकरार रखा फिर आये 2018 विधानसभा चुनाव जिसमे पार्टी को 100 सीटें हासिल हुई और राजस्थान में कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिला लेकिन 2019 आते -आते फिर पार्टी को राज्य में लोकसभा की सभी 25 सीटें पर हार का सामना करना पड़ा |
अब पार्टी को मंथन करने का समय है की पायलट को अब एक मौका और दे या उनसे त्याग पत्र लेकर नए व्यक्ति को पार्टी की बागडोर सम्भलवाई जाये लेकिन पायलेट खुद नैतिकता के नाते त्याग पत्र देंगे ये सोचने का विषय है |

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