खुद से संघर्ष की कहानी है जगन रेड्डी की ताजपोशी

खुद से संघर्ष की कहानी है जगन रेड्डी की ताजपोशी
खुद से संघर्ष की कहानी है जगन रेड्डी की ताजपोशी
आंध्र प्रदेश के जगन मोहन रेड्डी ने वह करिश्मा कर दिखाया जो की सबको हैरान कर देने वाला था, उनकी पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव कुल 25 सीटों में से 22 सीटों पर धमाकेदार जीत दर्ज की, वहीँ विधानसभा की भी 175 सीटों में से 151 पर विजय हांसिल करके अब आंध्र प्रदेश में अपना मुख्यमंत्री बनाने जा रही है और यह सीएम और कोई नहीं खुद जगन मोहन रेड्डी है।

आंध्र प्रदेश में उनके संघर्ष से सत्ता तक पहुँचने की कहानी भी बिलकुल दक्षिण भारत के फ़िल्मी कहानी की तरह ही है।

एक शक्श दक्षिण में कांग्रेस को बड़ी ताकत बनाने वाले अपने पिता के निधन के बाद पार्टी में रहकर ही कुछ करना चाहता था, लेकिन 10 जनपथ से जुड़े लोगों ने उसे हर तरह से अलग-थलग करने की पूरी कोशिश की।

यहाँ तक की जब वह अपने पिता के निधन के बाद सदमे में जान देने वाले लोगों को सांत्वना देने के लिए ओदारप्पू (सांत्वना) यात्रा निकाल रहा था तो उसे कांग्रेस के लिए चुनोती देने वाला बताकर 10 जनपथ के कान भरे गए।

नतीजा कांग्रेस हाईकमान ने कठोर फैसला लेना शुरू किया, संयुक्त आंध्र प्रदेश और केंद्र में जब पिता की पार्टी के नेताओ के बदले तेवरों की जगन ने परवाह नहीं की, तो उन्हें “साईड लाईन” करते हुवे उसके खिलाफ मुकदमे दायर कर कमजोर करने की कोशिश की गयी।

हौंसला तोड़ने के लिए जेल भी भेजा गया, बावजूद इसके जनता से जुड़ने की जगन रेड्डी की ललक कम नहीं हुई, हजारों किलोमीटर की सूबे की यात्रा पैदल ही नाप कर लोगों के बीच गए,अपनी बात रखी।

नतीजा आज ना केवल लोकसभा के आंध्र प्रदेश से सबसे ज्यादा सीटें उनके खाते में हैं, बल्कि चंद्रबाबू नायडू सरीके मंझे हुवे नेता को भी इतनी बुरी तरह से पटखनी दी की शायद इसकी कसक ताउम्र उन्हें सताएगी।

यही हैं वो जगन मोहन रेड्डी जिनकी माँ और उन्हें 10 जनपथ बुलाया गया और सोनिया गाँधी ने उनकी ‘ओदारपू’ यात्रा को चुनोती यात्रा बताते हुवे उसे स्थगित करने का फरमान जारी कर दिया।

यहाँ तक की 10 जनपथ ने अपने ख़ास सलाहकारों की बात मानते हुए जगन के प्रभाव को नज़रन्दाज़ करते हुवे बिना जनाधार वाले के.रोशेय्या को राजशेखर रेड्डी के बाद आंध्र प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया।

यह जनाते हुवे भी की पूरी कांग्रेस पार्टी और वहाँ के 117 विधायक वाईएसआर परिवार के साथ खड़े थे, और जगन रेड्डी से ज्यादा कांग्रेस के इस गढ़ को और कोई भी सुरक्षित नहीं रख सकता।

इसके बाद भी कांग्रेस नहीं चेती और किरण कुमार रेड्डी को फिर से बगावती सुर ख़त्म करने के लिए आंध्र का सीएम बना दिया।

नतीजा कमजोर सीएम के चलते राज्य के विभाजन की मांग ने जोर पकड़ना शुरू किया और तेलंगाना को देश का 29 वां राज्य बनाने के लिए UPA-2 को मजबूर होना पड़ा ।

जिसका फायदा कांग्रेस की बजाय चंद्रशेखर राव की TRS के खाते में ही गया, और कांग्रेस अब तक भी यहाँ संभल नहीं पायी है।

इस बीच जगन मोहन ने कडप्पा के सांसद पद से अपना इस्तीफा देते हुवे YSR कांग्रेस के नाम से नयी राजनितिक पार्टी बना ली और 3600 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके जनता से लगातार जुड़े रहने का सिलसिला जारी रखा।

उपचुनाव हुए तो भारी वोटों से वे फिर सांसद बने, उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले दर्ज कर उन्हें पहले 18 महीने तक जेल भेज दिया गया, लेकिन इसने जगन को तोड़ने की बजाय उन्हें और भी मजबूत करने का काम किया, नतीजा आज जगन रेड्डी की आंध्र प्रदेश में पूर्व बहुमत की सरकार है।

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