लोक सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में फारूक अब्दुल्ला

श्रीनगर (एजेंसी)।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला अब कड़े लोक सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत हिरासत में हैं। सूत्रों ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी।

इस कानून के तहत प्रशासन किसी भी व्यक्ति को बिना किसी मुकदमे के दो साल के लिए हिरासत में ले सकता है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक अब्दुल्ला (81) उस समय से नजरबंद हैं, जब पांच अगस्त को केंद्र ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्रशासित प्रदेश में बांट दिया था। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अब्दुल्ला पीएसए के तहत हिरासत में हैं। अब्दुल्ला पर रविवार को सख्त कानून लगाया गया। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन को पूर्व मुख्यमंत्री को एक अदालत के सामने पेश करने वाली याचिका पर जवाब देने को कहा। तमिलनाडु के एमडीएमके नेता वाइको की ओर से दायर याचिका में अब्दुल्ला को रिहा करने की मांग की गयी है ताकि वह चेन्नई में एक कार्यक्रम में हिस्सा ले सकें। चार दशकों से वाइको अब्दुल्ला के करीबी दोस्त माने जाते हैं । अब्दुल्ला के बेटे एवं पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तथा पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को भी पांच अगस्त से हिरासत में रखा गया है।
फारूक अब्दुल्ला की रिहाई के लिए वाइको की याचिका पर भेजा नोटिस
नई दिल्ली (एजेंसी)। राज्यसभा सांसद और एमडीएमके के संस्थापक वाइको की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। वाइको की याचिका पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया है। साथ ही इस मामले की अगली तारीख 30 सितंबर तय की है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 370 के खिलाफ और कश्मीर पाबंदियों के खिलाफ कई याचिकाएं हैं, जिस पर आज सुनवाई है। जम्मू-कश्मीर के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। सबसे पहले वाइको की याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस दौरान कहा कि अभी वहां पर क्या हालात हैं? आपने अभी तक कोई रिकॉर्ड सामने नहीं रखे हैं। वाइको के वकील ने कहा कि गृह मंत्रालय कह रहा है कि किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है, एनएसए कह रहे हैं कि कुछ मामलों में हिरासत में लिया गया है।

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