पीसीसी उपाध्यक्ष अरोड़ा ने कही महिला शिक्षा को बढ़ावा देने की बात

महिला सशक्तिकरण : संघर्ष और सफर को किया बयां

चमकता राजस्थान

जयपुर। होटल ग्रैंड उनियारा में महिला सशक्तिकरण पर आयोजित तीन दिवसीय वुमन अप समिट के दूसरे दिन विभिन्न क्षेत्रों के वक्ताओं के सेशन आयोजित किए गए। शायरी चहल व कमला पोद्दार के दो मेंटरिंग सैशन भी आयोजित हुए। इस समिट के दौरान पहली बार लगाई गई पॉप अप में विजिटर्स ने स्थानीय व क्षेत्रीय कारीगरों, महिला उद्यमियों एवं शिल्पकार महिलाओं के सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स को निहारा और इनके बारे में जानकारी प्राप्त की। सियाही की पहल के तौर पर यह समिट आयोजित की जा रही है। उद्घाटन भाषण मुख्य अतिथि पीसीसी उपाध्यक्ष और एआईपीसी वेस्ट जोन के प्रभारी राजीव अरोड़ा ने दिया। अरोड़ा ने महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार व्यक्त किये और सभी को संदेश दिया कि हमारे देश में महिलाओं के प्रति जो पुरानी प्रथाएं हैं उन सबको मिटाकर महिलाओं को शिक्षा से लेकर हर क्षेत्र में बढ़ावा देना चाहिए जिससे देश के विकास में मजबूती प्रदान हो सके एवं देश की हर महिला अपनी शिक्षा व मेहनत से आगे बढ़ सके। उन्होंने श्रीमती मीता कपूर द्वारा आयोजित कार्यक्रम की सराहना कर उनका आभार व्यक्त किया।
आवाज की ताकत 
लोक गायिकाएं भंवरी देवी ने विनोद जोशी के साथ अपनी संगीत यात्रा के बारे में चर्चा की। भंवरी देवी के साथ उनके पुत्र, किशन कुमार भी थे। दोनों ने कुछ प्रसिद्ध राजस्थानी गीत व लोकगाथा गीत भी गाए। भंवरी ने बताया कि वे भोपा समुदाय में पली बढ़ी हैं। बचपन में पेरेंट्स द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली फड़ वाचन सुनती थीं। 12 वर्ष की उम्र में उनकी शादी हो गई थी और फि र उन्होंने अपने पति के साथ फड़ गायन शुरू कर दिया।  एन आर्टिस्ट ऑन ए मिशन सैशन में प्रोफेशनल कलाकार व कथक नृत्यांगना शाश्विता शर्मा के साथ डॉ.  राजन महान ने संवाद किया। इस सत्र में शाश्विता शर्मा ने श्रोताओं के साथ अपनी रचनात्मक जीवन यात्रा व अनुभवों को साझा किया। फेम्मी एंड फि एर्स सैशन में शेरोस की संस्थापक शायरी चहल ने अपनी जीवन यात्रा साझा की और श्रोताओं को उनके एप के बारे में बताया।  राजस्थान सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव मुग्धा सिन्हा ने विज्ञान व उद्यमिता के संयोजन की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पहले के अर्थशास्त्रियों ने उत्पादन के चार शास्त्रीय कारक भूमि, श्रम, पूंजी व उद्यमिता बताए थे, लेकिन आज के दौर में इसके लिए दो अन्य कारक (विचार व तकनीक) भी अत्यंत आवश्यक हैं। सिन्हा ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की 'निधि प्रयासÓ योजना के बारे में भी बताया। यह योजना किसी भी अनूठे विचार को प्रोटोटाइप में बदलने में सक्षम बनाती है और इस पर तेजी से कार्य करने के लिए मंच उपलब्ध कराती है। 
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