जयपुर मेट्रो के संचालन पर खर्च हुए 150 करोड़


जयपुर ।

गुलाबी नगर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सबसे महंगा प्रोजेक्ट जयपुर मेट्रो सरकार के लिए सफेद हाथी साबित हो रही है नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) भी जयपुर मेट्रो को नाकाम प्रोजेक्ट करार दे चुका है हर साल लगभग 25 करोड रूपए घाटे में चल रही जयपुर मेट्रो के लिए कोच्चि मेट्रो एक नजीर बन सकती है। जयपुर मेट्रो से दो साल बाद शुरू हुई कोच्चि मेट्रो का संचालन अब फायदेमंद बन गया है जबकि जयपुर मेट्रो अब संचालन के पौने पांच साल बाद भी घाटे का सौदा बना हुआ है। कोच्चि मेट्रो की शुरूआत जून 2017 में हुई थी वित्तीय वर्ष 2019-20 में कोच्चि मेट्रो के संचालन से रोजाना दो लाख रूपए का फायदा हो रहा है कोच्चि मेट्रो में रोजाना आसैतन 92 हजार यात्री सफर करते है जबकि जयपुर मेट्रो को रोज संचालन पेटे 6 लाख रूपए का घाटा हो रहा है जयपुर मेट्रो में प्रतिदिन लगभग 18 हजार मुसाफिर आते है। शुरूआत में कोच्चि मेट्रो में प्रतिदिन लगभग 32 हजार यात्री सफर करते थे अब यह आंकडो बढकर 92 हजार तक पहुंच गया है वहीं जून 2015 में जयपुर मेट्रो का उदृघाटन हुआ तो पहले महीने जयपुर मेट्रो की राइडशिप 49 हजार यात्री प्रतिदिन से ज्यादा रही फरवरी 2020 में जयपुर मेट्रो की यात्री संख्या घटकर 18 हजार रोजाना हो गई है। मेट्रो के संचालन पर अब तक करीबन 150 करोड रूपए खर्च हो चुके है जबकि कमाई सिर्फ 40 करोड रूपये की हुई है जयपुर मेट्रो के आंकडो के अनुसार तीन जून 2015 से 30 अप्रेल 2018 तक 25.13 करोड रूपए कमाए सूत्र बताते है कि फरवरी 2020 में तकयह कुल आंकडा 40 करोड रूपए तक पहुंचा है मेट्रो के संचालन पर जून 2015 से मार्च 2016 तक करीबन 30 करोड रूपए खर्च आया इस अवधि में मेट्रो की कमाई 10 करोड रही मार्च 2016 से 31 दिसंबर 2016 तक मेट्रो संचालन पर 29 करोड खर्च हुए जबकि यात्रीभार कमाई 5 करोड हुई। गौरतलब है कि जयपुर मेट्रो के प्रथम चरण की मार्च 2012 की डीपीआर के मुताबिक प्रथम चरण की अनुमानित लागत 3,149 करोड है जिसमें फेज-1 और फेज बी शामिल है। 
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