जल संकट से जूझ रहे देश के जिलों को मिलेगी राहत



पिछले कुछ समय से सरकार अपने वायदे को दोहराती रही है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करना है। इस बाबत पूर्व में 'सॉयल हेल्थ कार्डÓ, फसल बीमा योजना, लागत में 50 प्रतिशत जोड़कर समर्थन मूल्य, डेयरी और मत्स्य को प्रोत्साहन, सिंचाई योजनाओं समेत कई उपायों के बारे में सरकार आगे भी बढ़ी। कुछ अच्छे परिणाम भी आए, जैसे दालों, तिलहनों, फल-सब्जी और अनाज के उत्पादन में वृद्धि समेत कई अच्छे परिणाम भी देखने को मिले। किसानों की आमदनी को समर्थन देने हेतु सीधे खाते में किसान सम्मान निधि को भी सराहना मिली। जल संकटयुक्त 100 जिलों में वृहद सिंचाई योजना से इन जिलों को राहत मिल सकती है। किसानों के पास कई बार बंजर, पथरीली भूमि और बेकार छोड़ी गई भूमि होती है, जो इनकी आमदनी के लिए सहायक नहीं होती। ऐसी भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए सरकार मदद देगी जिससे किसान अतिरिक्त बिजली को बेच भी सकेंगे। कोल्ड स्टोरेज समेत कृषि उत्पादों के भंडारण हेतु बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। बजट में एक ओर तो ज्यादा भंडारगृह बनाने की योजना है। साथ ही भंडारगृहों को भंडारगृह विकास एवं नियामक प्राधिकरण के अंतर्गत लाने की योजना भी बनाई गई है। इस प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले भंडारगृह इलेक्ट्रॉनिक रसीद जारी करते हैं, जिसके आधार पर किसान बैंकों से कर्ज भी ले सकते हैं। बजट में यह भी प्रावधान किया गया है कि किसान अब भंडारगृह की रसीद के आधार पर कर्ज प्राप्त कर सकता है, प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर किसानों को ऋणग्रस्तता से राहत देने वाला यह बड़ा कदम माना जा सकता है। इन उपायों के अतिरिक्त दुग्ध प्रसंस्करण की क्षमता को दोगुना कर 10.8 करोड़ मिटिक टन करना, 20 लाख किसानों को किसान सोलर वाटर पंप लगाने के लिए सब्सिडी देना और रासायनिक खादों के उपयोग को घटाने हेतु खाद की सब्सिडी स्कीम में बदलाव कर किसानों को सीधे सब्सिडी देना बड़े कदम हैं। इस बार कृषि ऋणों को 15 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ा दिया गया है और साथ ही मत्स्य उत्पादन को 2022-23 तक 200 लाख टन तक बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना बनी है।

बचत पर छूट खत्म करना
सही नहीं
वित्त मंत्री ने कहा है कि वैयक्तिक करदाताओं को एक विकल्प दिया जाएगा, जिसमें वे कम दर पर टैक्स देंगे, लेकिन शर्त यह होगी कि उन्हें बचत और अन्य प्रकार की छूटें छोडऩी पड़ेंगी। गौरतलब है कि अभी तक डेढ़ लाख रुपये तक की विभिन्न प्रकार की बचत और 50 हजार रुपये के नई पेंशन स्कीम में बचत पर आयकर में छूट मिलती थी। लेकिन यदि करदाता इस विकल्प को स्वीकार कर बचत करना बंद कर देता है तो स्वाभाविक रूप से देश में बचत घटेगी। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से देश में बचत और निवेश घटा है। सरकार के इस कदम से देश में बचत संस्कृति पर दुष्प्रभाव पड़ेगा, जो सही नहीं होगा।
पिछले कुछ समय से अर्थव्यवस्था में सुस्ती, जीडीपी के घटने के भयावह अनुमानों, बेरोजगारी, सरकारी राजस्व में लगातार आती कमी की स्थिति में यह कहा जा रहा था कि इस बार केंद्रीय बजट एक कठिन बजट होगा। लिहाजा अर्थव्यवस्था में स्पंदन लाने के लिए वित्त मंत्री ने इसके लगभग सभी हिस्सों को छुआ। निवेशकों को निवेश करने हेतु प्रोत्साहन की कमी, लोगों की ज्यादा आय सुनिश्चित करना, गांवों में रोजगार का सृजन, मेक इन इंडिया के तहत विनिर्माण क्षेत्र को समर्थन जैसी चुनौतियों को वित्त मंत्री ने बजट में शामिल किया।
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