बेरोजगारी कम करने के लिए कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना होगा : अरोड़ा

सामानांतर साहित्य उत्सव शुरू


जयपुर। जवाहर कला केंद्र स्थित शिल्पग्राम में शुक्रवार को साहित्य के बाजारीकरण के विरुद्ध राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से आयोजित समानान्तर साहित्य उत्सव का आगाज हुआ। इसमें अतिथि के रूप में पीसीसी उपाध्यक्ष राजीव अरोड़ा शामिल हुए। अरोड़ा ने इस अवसर पर महात्मा गांधी के अहिंसा, आश्रम और आज के भारत पर विचार व्यक्त करते हुए कहा की देश में बेरोजगारी को कम करना है तो बड़े उद्योगों से ज्यादा कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि देश को गांधीजी की विचारधारा को आगे ले जाना होगा जैसे कि उन्होंने भारत देश को स्वावलंबी बनाने हेतु खादी ग्रामोद्योग की स्थापना की और पूरे देश को सत्य, अहिंसा का मार्ग अपनाने का संदेश दिया, जिससे स्वतंत्र भारत का निर्माण हुआ। अरोड़ा ने इस साहित्य उत्सव के लिए ऋतुराज अध्यक्ष, ईशमधु तलवार मुख्य संयोजक एवं प्रेमचंद गांधी संयोजक का आभार व्यक्त किया।
 इसका उद्घाटन लेखिका अरुंधति रॉय ने मशाल प्रज्ज्वलित कर किया। तीन दिन चलने वाले इस आयोजन में अंरुधति रॉय ने कहा कि इंकलाब वो नहीं जो खुद के लिए किया जाए, दूसरों के हकों के लिए लडऩा ही इंकलाब है। वहीं प्रगतिशील लेखक संघ के पूर्व सचिव राजेंद्र कुमार राजन ने यहां बाजारवाद के खिलाफ  एक होने का आह्वान किया। उद्घाटन सत्र में कन्हैयालाल सेठिया जन्मशती सम्मान हिंदी भाषा के लिए कैलाश मनहर को दिया गया और राजस्थान भाषा के लिए भरत ओला को दिया गया। वहीं शाकुंतलम सम्मान उमा को, पुरोधा सम्मान जुगमिंदर तायल व पूर्व जस्टिस विनोदशंकर दवे को दिया गया। उत्सव का आगाज वरिष्ठ कवियों के कविता पाठ के सत्र से हुआ। लेखक लीलाधर मण्डलोई ने अपना कविता पाठ किया। वहीं मौजूदा दौर में पहचान और नागरिकता के विषय पर वरिष्ठ कवि राजेश जोशी ने कुछ यूं कहा कि 'मैं शायद टोबा टेक सिंह का बिशन सिंह हूं,  जो कुछ अटपटे वाक्यों को बुदबुदाता हुआ अपनी नागरिकता ढूंढ रहा है। कविता पाठ सत्र में नरेश सक्सेना ने संवेदनात्मक विषयों पर मरना तो है ही एक दिन, मरने से क्या डरना और मातृ ऋण जैसे संवेदनशील विषयों पर कविता पढ़कर श्रोताओं का ध्यान खींचा।  
तीन देश एक मंच पर
एक ही मंच पर तीन देशों का साहित्य आपस में बात करता हुआ नजर आया, जहां भारत, नेपाल और बांग्लादेश के कवियों ने अपने देशों के कविता के माहौल के बारे में बताया। साथ ही उन्होंने अपनी मातृभाषा में लिखी गई कविता का पाठ किया।  रामकुमार सिंह ने ढोला मारु की प्रेम कहानी पर अपनी बात रखी। कार्यक्रम में न्यायाधीश विनोद शंकर दवे ने भी विचार व्यक्त किए।


Share on Google Plus

About CR Team

Dainik Chamakta Rajasthan to provide lightning fast, reliable and comprehensive informative information to our visitors in the form of news and articles.

0 comments:

Post a Comment