कोरोना से बचाव के लिए खेत की मिट्टी और हवन की राख को बनाएं सेनेटाइजर

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कोरोना एक ऐसा विषाणु है जिसने वर्तमान में पूरे विश्व में कोहराम मचा रखा है।प्रत्येक देश इस वायरस को समाप्त करने की भसकर कोशिशों में लगा हुआ है लेकिन न तो इसको समाप्त करने का कोई रास्ता निकल पा रहा है न ही इससे ग्रसित हुए व्यक्ति को पुन: स्वस्थ किया जाना सम्भव हो पा रहा है।किसी भयावह महामारी की भांति ये विश्वभर में फैलता ही चला जा रहा है।संक्रमित देशों में जिस प्रकार इसके संक्रमण से मृत्युदर के आंकड़े सामने आ रहे है निश्चित रूप से ये बहुत ही गम्भीर चिंतन का विषय बन गया है। चारों तरफ बस एक ही खौफ छाया हुआ है कि किस प्रकार इसको बढऩे से रोका जाये।हालांकि भारत देश में कोरोना का आतंक अन्य देशों की भांति विकराल रूप में सामने नहीं आया है लेकिन इससे निश्चिंत होकर बैठने की बजाय इस पर लगातार चिंतन मनन करके बचाव के रास्ते अपनाने की महती आवश्यकता है।भय के कारण ही सही लेकिन आज  पूरा विश्व भारत की जीवन शैली के आगे नतमस्तक होता हुआ नजर आ रहा है।भारत की वैदिक संस्कृति,भारतीय रहन सहन,शाकाहारी जीवन,जीवन जीने का ढंग आदि का जीवन रक्षा के रूप में कितना बड़ा महत्व है, आज सबके लिए प्रेरणा का विषय बना हुआ है।एक स्वस्थ एवं बेहतर जीवन जीने के लिए पौराणिक भारतीय जीवन शैली को अपनाने एवं आत्मसात करने की आवश्यकता है।और हो भी क्यों नहीं,ये ही तो भारत का वास्तविक स्वरूप है। प्रत्यक्ष ही प्रमाण है,इस बात की सत्यता को भारत के द्वारा बार बार साबित किया गया है।इस सच से इनकार नहीं किया जा सकता है कि आज तक भारत की भूमि में किसी भी प्रकार के वायरस,विषाणु अथवा रोगाणु उतपन्न नहीं हुए है, जिसने किसी भयावह महामारी का रूप धारण किया हो।इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण है।सबसे विस्तृत कारण भारतीय लोगों द्वारा सादा जीवन - उच्च विचार की परम्परा का पालन करना और सर्वे भवन्तु सुखिन: जैसे उच्च आदर्शों को अपने जीवन मूल्यों में शामिल करना है।
भारतीय परम्परा एवं रीति नीति में मानव हो,प्रकृति हो,पशु पक्षी हो अथवा जीव जंतु, सभी को समान भाव से देखने,सभी के कल्याण की भावना मन में समाहित करके व्यवहार करने एवं किसी को भी दु:ख व तकलीफ न पहुंचाने जैसे आदर्शों को महत्व दिया गया।इसके अलावा भारत के वेदों में जो हवन की पद्धति बताई गई है उसमें विभिन्न प्रकार के औषधीय गुण स्वत: ही विधमान होते है।यज्ञ -हवन करते समय गौ माता के गोबर के सूखे कंडों का जो उपयोग किया जाता है उससे उतपन्न धुएं में प्रत्येक तरह के विषाणु को खत्म करने की ताकत होती है।इस हवन पद्धति में अग्नि में आहुति देते समय हवन सामग्री के रूप में विभिन्न सामग्रियों का उपयोग किया जाता है जिसमें से निकलने वाले सकारात्मक धुंए से हवा में उपस्थित विभिन्न प्रकार की विषैली गैस एवं रोगाणुओं को खत्म करने एवं वातावरण को शुद्ध करने की क्षमता होती है।भारतीय हवन पद्धति हवा का शुद्धिकरण करके आसपास के सम्पूर्ण वातावरण को पुन: शुद्ध करने का कार्य करती है।आज कोरोना को समाप्त करने के लिए हमारी इसी भारतीय हवन पद्धति को अपनाने की आवश्यकता है।चूंकि कोरोना का इलाज संभव न हो पाने के कारण उसका बचाव ही उसका उपचार है।ऐसे में बचाव के रूप में मास्क लगा कर रखने,सार्वजनिक स्थलों पर कम से कम जाने,भीड़भाड़ से दूर रहने,एक दूसरे के कम से कम सम्पर्क में आने,हाथ न मिलाने आदि निर्देशों के साथ साथ साबुन,डिटॉल आदि से हाथ धोने एव सेनेटाइजर को बार बार हाथों पर लगाने के खास निर्देश चिकित्सा विभाग द्वारा जारी किए जा रहे है।वर्तमान स्तिथि में भारत के बाजारों में इन उत्पादों की कमी एवं प्रत्येक व्यक्ति के लिए इस तरह के महंगे उत्पादों को खरीद पाना सम्भव नहीं हो पाने के कारण कोरोना जैसे वायरस को फैलने से रोकना कैसे सम्भव होगा ये बहुत ही चिंतनीय है।लेकिन यदि सूझबूझ से कार्य करें तो इन महंगे उत्पादों से कई गुना असरकारी हमारे गौ उत्पाद है जो आसानी से नि:शुल्क उपलब्ध हो जाएंगे। कोरोना जैसे वायरस से बचाव के उपचार के रूप में घर और आसपास के क्षेत्र में निरंतर गौ मूत्र का छिड़काव करें।हल्की खांसी जुखाम हो अथवा कोरोना के लक्षण दिखाई देने लगे इन दोनों स्थितियों में गौ मूत्र का सेवन बहुत ही कारगर सिद्ध होगा।इसके अलावा तुलसी, गिलोय,पपीते के पत्ते का अर्क,विभिन्न जड़ी बूटियों का काढ़ा बनाकर उसका सेवन करना जैसे आयुर्वेदिक उपचार भी बचाव के रूप में अपनाना बहुत ही लाभकारी रहेगा। कोरोना वायरस भारत में अपनी दस्तक दे चुका है।कोरोना के कारण अन्य देशों में हो रही लगातार जनहानि को देखते हुए भारत की तरफ लगातार बढ़ते हुए इस वायरस के खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।आमजन को चाहिए कि वो इसे गम्भीरता से लेते हुए स्वयं पहल करते हुए पूर्व में ही बचाव एवं उपचार के प्रति सजग रहे। कोरोना से घबराने की बजाय सब्र से काम लेते हुए इसके बचाव के रूप में भारत की पुरातन जीवन शैली को अपनाने की आवश्यकता है।यदि हम अपनी भारतीय वैदिक जीवनशैली के अनुसार अपनी दैनिक दिनचर्या का पालन विधिवत प्रारम्भ कर दे तो कोरोना जैसे वायरस को भारत के वातावरण में फैलने से रोकने में सफल हो सकते है।सेनेटाइजर के स्थान पर खेत की मिट्टी  को हाथों पर रगड़ कर लगातार हाथ साफ करते रहे।प्रतिदिन सुबह सूर्योदय के पश्चात घर के मध्यभाग में किसी पात्र में कुछ गोबर के कंडे रखकर कपूर और हवन सामग्री के साथ साथ वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए स्वयं परिवार के साथ आहुति देते हुए हवन करें।ये हवन वायुमंडल में उपस्थित समस्त विषाणुओं को खत्म करने में सबसे अधिक कारगर सिद्ध होगा।हवन के पश्चात जो राख बचती है उस राख से दिनभर में कई बार हाथ साफ किये जायें तो कोरोना के दुष्प्रभाव को फैलने से रोका जा सकता है।हमारी भारतीय वैदिक जीवनशैली के आगे जहाँ आज पूरी दुनिया नतमस्तक होकर इसके महत्व को अंगीकार कर रही है।आज समय आ गया है कि इस विकट घड़ी में हमसब मिलकर अपने भारतीय वेद और पौराणिक परम्पराओ के वैज्ञानिक महत्व को समझते हुए उसका विधिवत पालन एवं अनुसरण प्रारम्भ करें और कोरोना ही नहीं बल्कि इस प्रकार के अन्य विषाणु एवं रोगाणु से भी स्वयं को सुरक्षित करें।
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