प्रकृति का प्रकोप : कोरोना वायरस


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कोरोना वायरस एक ऐसा दहशती नाम जिसने आज पूरे विश्व को एक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया है।
अकेले ही पूरे विश्व को मानव रहित करने की क्षमता रखने वाला कोरोना वायरस आज पूरे मानव जाति के अस्तित्व के लिए ही खतरा बनता नजर आ रहा है।  स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कोरोना वायरस को महामारी घोषित कर दिया है। कोरोना वायरस बहुत सूक्ष्म लेकिन मानव विनाशक प्रभावशाली वायरस है। वैसे तो आकार के हिसाब से कोरोना वायरस मानव के बाल की तुलना में 900 गुना छोटा है, पर इसकी संक्रमण का रफ्तार इसके आकर से कई सौगुना है। कोरोना वायरस का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है जिसके संक्रमण होने से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। इस वायरस को पहले कभी मानव शरीर पर हावी होते हुए नहीं देखा गया है। इस वायरस का संक्रमण सबसे पहले दिसंबर में चीन के वुहान नामक शहर से शुरू हुआ था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके प्रमुख्य लक्षण हैं। अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका बनकर तैयार नही हो पाया है। इस समय सिर्फ कोरोना की वजह सम्पूर्ण मानव जाति विनाश के कगार पर पहुंच गयी है और इसकी आशंका से आर्थिक मंदी ही नहीं, बल्कि जन-जीवन ठप्प है। हजारों सालों से लोग सत्ता की लालच में ,कुर्सी की लालच में, धर्म की आर में एवं एक देश दूसरे देश पर अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए ना जाने कितने इंसानो को मौत के घाट उतार देते थे, उतार दे रहे है और उतार देंगे? यू तो कहिये समाज मे ,देश मे हम सब साथ साथ है पर भाई भाई के नाम पर, धर्म के नाम पर,जातिवाद के नाम पर एवं अपना वर्चस्व बढ़ाने के नाम पर लोगों को मारने का ये क्रम आज भी जारी है। आज भी जमीनी विवाद में भाई ...भाई के दुश्मन बन बैठ जाते है।  एक जानवर भी अपने झुंड के साथ हिल-मिल कर रहता है ,आपस में कोई शत्रुता नही होती ,वे एक दूसरे के प्रति आक्रमण नही होते पर इंसान ही एक ऐसा जीव है जो अपने ही समान दिखने वाले लोग को मारकर खुश होता है इंसानी सोच का समाज में कितना नैतिक पतन हो रहा है। इंसानो को इन जानवरों से कुछ सीखना चाहिए पर इंसान ही एक ऐसा जीव है जो अपने ही समान दिखने वाले लोग को मारकर खुश होता है इंसानी सोच का समाज में कितना नैतिक पतन हो रहा है। इंसानो को इन जानवरों से कुछ सीखना चाहिए।इंसानी जान तो कीड़े -मकोड़े की तरह मारे जाते है पर जब प्रकृति ने कोरोना वायरस के रूप में सम्पूर्ण मनुष्य जाति के विनाश के लिए अपना एक वाहक भेजा तो आज पूरा समाज,हर धर्म के लोग या यूं कहिये संपूर्ण विश्व ही एक मंच पर खड़ा होकर कोरोना वायरस के विरुद्ध युद्ध के लिए तैयार हो खड़े है। आज इस समाज और संसार को समझ में आया कि इंसानी जान कितना महत्वपूर्ण है। आखिर एक कोरोना वाइरस पूरे विश्व को एक मंच पर खड़ा होने के लिए मजबूर कर दिया है। अगर पहले से ही विश्व मानव जाति के कल्याण के मार्ग पर चलता तो आज ये प्रकृति का विकराल रुप देखने को ना मिलता। प्रकृति का ये विकराल रूप को सोचने को मजबूर कर रही है उनसे ऊपर भी कोई शक्ति बैठी है।हमें समाज ही नहीं पूरे विश्व को जिओ और जीने दो वाले सिंद्धांत पर पुन: स्थापित करना होगा तभी प्रकृति भी संतुलित व्यवहार कर पायेगी नहीं तो आज कोरोना वायरस और कल कोई और आपदा बन प्रकृति पूरे मानव जाति के लिए विनाशकारी सिद्ध होगी। कोरोना वायरस का भय का असर ना केवल शेयर बाजार पर ही पड़ा है बल्कि यह भय दूसरे बाजारों एवं जीवन में भी दिखने लगा है, इन विनाशकारी स्थितियों में भी इंसान आज भी इंसान कितना अनैतिक एवं स्वार्थी सोच के साथ जी रहा है कि सैनेटाइजर से लेकर मास्क तक की वायरस से लडऩे के साधनों की वह कालाबाजारी कर रहा है। जब जीवन ही नहीं रहेगा तो यह कालाबाजारी का धन क्या काम आयेगा ? वाह रे इंसानी सोच इंसान,इंसान का ही दुश्मन बन बैठा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक विश्व में अभी तक कुल दो लाख पैतालीस हजार आठ सौ इक्यासी मामले सामने आए है जिसमें से करीब दस हजार की मौत हो चुकी है और अठ्ठासी हजार के करीब ठीक भी हुये है। भारत में अबतक कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 200 के पार हो गई है, जबकि चार लोगों की जान जा चुकी है और कुछ लोग ठीक भी हुए है।दोस्तों हमें कोरोना वाइरस से डरने की जरूरत नहीं है नाही घबराने की बस थोड़ी सी सावधानी बरतने की जरुरत है। देश में कोरोना वाइरस के बढ़ते प्रकोप को देखकर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भी जनता से 22 मार्च को जनता कफ्र्यू का आवाहन किया उन्होंने कहा.. कि जनता कफ्र्यू के दरमियान कोई भी नागरिक घरों से बाहर न निकले, न सड़क पर जाए,न सोसाइटी-मोहल्ले में लोग इक_े हों। लोग अपने घरों में ही रहें। खासकर 60 से 65 साल या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्ग घर में ही रहें। साथ में उन्होंने ने भी कहा कि...आज हमें ये संकल्प लेना होगा कि हम स्वयं संक्रमित होने से बचेंगे और दूसरों को भी संक्रमित होने से बचाएंगे। हमें इससे घबराने की जरूरत नहीं है इससे लडऩे की जरूरत है। किसी भी समाज के लिए कोरोना वायरस जैसे महामारी के भय से मुक्त वातावरण बनाने के लिए बहुत जरूरी और महत्वपूर्ण होता है अपने कर्तव्य-बोध और दायित्व-बोध का होना।  भयभीत समाज सदा रोगग्रस्त रहता है, वह कभी स्वस्थ नहीं हो सकता। भय तब होता है जब दायित्व और कर्तव्य की चेतना नहीं जगती। जिस समाज में कर्तव्य और दायित्व की चेतना जाग जाती है, उसे डरने की जरूरत नहीं होती। ऐसे समाज में कोरोना वायरस निष्प्रभावी ही सिद्ध होगा। जो व्यक्ति आत्म ऊर्जा से संपूर्ण है,वह स्वयं कोरोना से लडऩे की क्षमता अर्जित कर लेता है। तो आइए इस मनुष्य घाती कोरोना वायरस से हम ये सीख लेते है,हम सब मिलकर ये संकल्प करते है कि प्रकृति विरुद्ध कोई कार्य नही करेंगे,हम सब अपने जीवन में जिओ और जीने दो सिंद्धांत का अनुसरण करेंगे,अपने वर्चस्व को बढ़ाने के लिए मनुष्य नाशक हथियार नहीं बनाएगें।
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