आर्थिक पैकेज में देरी को लेकर असमंजस में उद्योग जगत, फिक्की का आकलन रोजाना 40 हजार करोड़ रुपये का हो रहा नुकसान




नई दिल्ली .अब किसी को यह शक नहीं रह गया है कि लॉकडाउन ने देश की इकोनोमी को काफी हद तक ध्वस्त कर दिया है। घरेलू उद्योग जगत इकोनोमी के चक्के को तेज चलाने और लक्ष्य को बढ़ाने को भी तैयार है लेकिन उसका मानना है कि अब केंद्र सरकार के भारी भरकम मदद व सहयोग के बिना यह संभव नहीं हो पाएगा। वह भी तत्काल। फिक्की, सीआइआइ जैसे उद्योग संगठनों का कहना है कि कोई भी देरी हर क्षण आगे की राह मुश्किल करता जाएगा। आर्थिक मदद की घोषणा में जितनी देर होगी बंद पड़े कल-कारखानों को फिर से शुरु करने की रणनीति बनाने में उतना ही विलंब होगा। उद्योग जगत खास तौर पर मार्च से मई 2020 के दौरान अपने कर्मचारियों को वेतन भत्ते देने में सरकार से आर्थिक मदद मांग रहा है। इस तरह की मदद कई दूसरे देशों ने अपने उद्योगों को दी है। उद्योग जगत की तरफ से यह चिंता इसलिए जताई जा रही है कि भावी पैकेज को लेकर असमंजस है। शुक्रवार को एक तरफ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि छोटे व मझोले उद्यमों के लिए एक राहत पैकेज का प्रस्ताव पीएमओ भेजा गया है। उधर, वित्त मंत्रालय और नीति आयोग की तरफ से भी एक आर्थिक मदद पैकेज का खाका तैयार किया गया है। सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को इस बारे में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बैठक थी जो नहीं हो सकी है। फिक्की के सेक्रटरी जनरल दिलीप चिनॉय के मुताबिक 'सवाल सिर्फ यह नहीं है कि हम लॉकडाउन से रोजाना 40 हजार करोड़ का नुकसान उठा रहे हैं बल्कि चार करोड़ लोगों के रोजगार को लेकर भी खतरा है। ऐसे में स्थिति जितनी जल्दी साफ हो वह बेहतर होगा।' सीआइआइ के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी के मुताबिक 'किसी भी घोषणा या पैकेज का ऐलान करने के बाद उसे लागू करने या संबंधित केंद्र तक उसका फायदा पहुंचने में वक्त लगता है। अब जबकि हम 3 मई, 2020 के बाद काम धाम शुरु करने की बात कर रहे हैं तो पैकेज को लेकर स्थिति साफ होनी चाहिए।' उद्योग जगत की तरफ से पैकेज के तहत सबसे बड़ी मांग यह की जा रही है कि जो सेक्टर बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं उन सेक्टर की कंपनियों के कर्मचारियों के तीन महीने के वेतन-भत्ते की अदायगी के लिए सरकार को आर्थिक मदद देनी चाहिए। चूंकि इस निधि में काफी राशि है इसलिए सरकारी खजाने पर भी बोझ नहीं पड़ेगा। लाभ उठाने वाली कंपनियों से तीन महीने बाद एक निश्चित दर से ब्याज लिया जाए।दरअसल, एक आवाज यह उठने लगी है कि इतनी बड़ी आपदा के वक्त सरकार को उद्योगों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। किसान देश की बड़ी ताकत हैं और उनकी मदद हमेशा होनी चाहिए। उसी तरह उद्योग जगत भी देश निर्माण में अपनी भूमिका निभाता है। आज के दिन भी आगे बढकऱ योगदान देने के लिए तैयार है लेकिन अगर ढांचा ही दरकने लगे तो मुश्किल होगी। एक माह के लाकडाउन ने कई उद्योगों के लिए यही स्थिति बना दी है। लिहाजा सरकार को जल्द से जल्द राहत पैकेज की घोषणा करनी ही पड़ेगी। इसमें एनपीए की अवधि और तीन महीने बढ़ाने, कंपनी खुलने से पहले प्रवासी मजदूरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे कई कदम शामिल हैं। फिलहाल 3 मई तक लाकडाउन है। सरकार से जल्द से जल्द घोषणा की अपेक्षा जताई जा रही है।
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