कोरोना इफेक्ट: व्यापर, उद्योग और निर्यात कारोबार को बचाना होगा-राजीव अरोड़ा


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चमकता राजस्थान से बातचीत में फैडरेशन ऑफ राजस्थान एक्सपोटर्स के अध्यक्ष राजीव अरोड़ा ने अरोड़ा ने अर्थव्यवस्था पर जताई चिंता
जयपुर। कोविड-19 से वर्तमान में पूरा विश्व जूझ रहा है। कोरोना वायरस के सक्रमण को रोकने के लिए प्रदेश, देश और विदेशों की सरकारों ने भी लॉक डाउन कर रखा है। जिसका सबसे ज्यादा असर अर्थव्यवस्था पर हो रहा है। इसके प्रभाव से व्यापार, उद्योग और निर्यात कारोबार भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। यह बात फैडरेशन ऑफ राजस्थान एक्सपोटर्स के अध्यक्ष राजीव अरोड़ा ने चमकता राजस्थान से बातचीत में कही।

अरोड़ा ने कहा कि कोरोना वायरस की महामारी से बचान के लिए देश में लॉकडाउन सोशल डिस्टेंसिंग के लिए शुरू हुआ। परन्तु विश्व मे ंआर्थिक तंत्र सामाजिक तंत्र पर इस तरह हावी है कि इसका असर सबसे अधिक असर उद्योग और निर्यात को हुआ। इससे उद्योगों के साथ असंगठित क्षेत्र को भी काफी क्षति पहुंची है। ये क्षेत्र पहले से ही काफी दयनीय स्थिति में चल रहे थे ऐसे में कोरोना के कारण होने वाली हाथी को सह पाए इतनी क्षमता इनमें नहीं है। सभी उद्योग धंधे बंद हें लेकिन उनके खर्चे चाहे जीएसटी हो, आयकर, किराया, कर्मचारियों के वेतन, बिजली-पानी का खर्चा, बैंकोंं का ब्याज बदस्तूर जारी है।

अध्यक्ष राजीव अरोड़ा ने बताया कि निर्यात के क्षेत्र में ज्वेलरी, कपड़ा, गारमेंट्स, कालीन, हस्तकला की सभी बड़ी प्रदर्शनियां दुनियाभर में निरस्त हो चुकी हैं। बड़े देशों अमेरिका, इंग्लैंड, इटली व फ्रांस में लॉक डाउन है, निर्यात व आयात के पार्सल अटके हुए हैं, ऐसे में चीन के इस कहर से बाहर आकर पुन: उत्पादन शुरू करने के कारण भारत के निर्यातकों का संकट और गहरा हो गया है।

रोजगार सृजन करने वाले ही बेरोजगार न हो जाएं

अरोड़ा ने कहा कि इस महामारी से निपटना व स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरस्त करना सरकार की पहली आवश्यकता होनी चाहिए, परन्तु इसकी आड़ में अर्थव्यवस्था व उद्योगों को मरने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है। जहां रोजगार सृजन करने वाले ही बेरोजगार हो जाएं। लेकिन अगर केन्द्र व राज्य सरकारें तुरन्त निर्णय लें तो उन्हें आईसीयू में जाने से बचाया जा सकता है।

हमें सुधार के लिए उठाने होंगे कदम

फैडरेशन ऑफ राजस्थान एक्सपोटर्स के अध्यक्ष राजीव अरोड़ा ने ने कहा कि इसके लिए करों की दरों में कमी, आयकर में छूट, जीएसटी दरों का पुन: निर्धारण, विशेष प्रभावित क्षेत्र जैसे पर्यटन को कुछ समय के लिए जीएसटी के दायरे से बाहर करना। सस्ते दर पर ऋण उपलब्ध कराना, वर्तमान ऋण में कुछ महीने का मोरिटोरियम, बाद में भी एक वष के लिए ब्याज दर में कमी। आर्थिक रूप से कमजोर उद्योगों के श्रमिकों के वेतन का पुनर्भरण, औद्योगिक इकाई के श्रमिकों के खातों में वेतन सरकार द्वारा दिया जाना चाहिए। ई-कॉमर्स के व्यापार को हिदायतों के साथ शुरू किया जाना चाहिए। इसके साथ अन्य आर्थिक कदम भी उठाने होंगे ताकि उद्योग धंधे जीवित रह सकें।
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