पृथ्वी हो रही है दूषित, संरक्षण समय की आवश्यकता

विनाश से बचाने के लिये पृथ्वी ...





विश्व पृथ्वी दिवस 2020: पृथ्वी दिवस एक प्रकार का उत्सव है जो की हर साल 22 अप्रैल को पूरे विश्व भर में बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। इस पर्व की शुरुवात 1970 में अमरीका के एक शहर के संतर द्वारा हुई थी। धीरे धीरे करके इस पर्व को सभी देशो द्वारा बनाया जाने लगा। आज के समय में इस उत्सव को लगभग 190 देशो में मनाया जाता है। इस पर्व को मनाने का मुख्य कारण पर्यावरण संरक्षण है। आज के समय में पृथ्वी बहुत दूषित हो गई है। पर्यावरण कई प्रकार के प्रदुषण से भर गया है। इस का मुख्या कारण मनुष्य की लापरवाही है।
आज के इस पोस्ट में हम आपको पृथ्वी दिवस पर हिंदी लेखन, पृथ्वी दिवस का महत्व, पृथ्वी दिवस भाषण, एअर्थ डे एस्से, पृथ्वी दिवस निबंध इन मराठी, हिंदी, इंग्लिश, बांग्ला, गुजराती, तमिल, तेलगु, आदि की जानकारी देंगे।
पृथ्वी दिवस कब मनाया जाता है
विश्व पृथ्वी दिवस हर वर्ष पूरे विश्व में 22 अप्रैल को मनाया जाता है। यह दिन  यानी रविवार को पड़ रहा है ।
इस दिन के उपलक्ष में हम आपके लिए बिहार पृथ्वी दिवस, विश्व पृथ्वी दिवस 2016, पृथ्वी दिवस पर विशेष, पृथ्वी पर निबंध, विश्व वसुंधरा दिवस व भूमि दिवस, पृथ्वी दिवस द्बठ्ठ , पृथ्वी दिवस पर कविता, आदि की जानकारी देंगे। हर साल 22 अप्रैल को पूरी दुनिया में पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। इस दिवस के प्रणेता अमरीकी सिनेटर गेलार्ड नेलसन हैं। गेलार्ड नेलसन ने, सबसे पहले, अमरीकी औद्योगिक विकास के कारण हो रहे पर्यावरणीय दुष्परिणामों पर अमेरिका का ध्यान आकर्षित किया था। इसके लिये उन्होंने अमरीकी समाज को संगठित किया, विरोध प्रदर्शन एवं जनआन्दोलनों के लिये प्लेटफार्म उपलब्ध कराया। वे लोग जो सान्टा बारबरा तेल रिसाव, प्रदूषण फैलाती फैक्ट्रियों और पावर प्लांटों, अनुपचारित सीवर, नगरीय कचरे तथा खदानों से निकले बेकार मलबे के जहरीले ढ़ेर, कीटनाशकों, जैवविविधता की हानि तथा विलुप्त होती प्रजातियों के लिये अरसे से संघर्ष कर रहे थे, उन सब के लिये यह जीवनदायी हवा के झोंके के समान था। वे सब उपर्युक्त अभियान से जुड़े। देखते-देखते पर्यावरण चेतना का स्वस्फूर्त अभियान पूरे अमेरिका में फैल गया। दो करोड़ से अधिक लोग आन्दोलन से जुड़े। ग़ौरतलब है, सन् 1970 से प्रारम्भ हुए इस दिवस को आज पूरी दुनिया के 192 से अधिक देशों के 10 करोड़ से अधिक लोग मनाते हैं। प्रबुद्ध समाज, स्वैच्छिक संगठन, पर्यावरण-प्रेमी और सरकार इसमें भागीदारी करती हैं। अक्सर छोटे बच्चो  को स्कूलों में परशुराम जयंती के बारे में लिखना होता है (विश्व पृथ्वी दिवस के ऊपर दस लाइन लिखें ) पढ़ाया जाता है तथा उसमे हर क्लास के बच्चे इंटरनेट पर सर्च करते है व स्कूलों के प्रोग्राम व कम्पटीशन में भाग लेते है। ऊपर दी हुई जानकारी में शामिल है इन निबंधों में शामिल है लेख एसेज, पृथ्वी दिवस पर स्लोगन,  बहुत से लोग पर्यावरणीय चेतना से जुड़े पृथ्वी दिवस को अमेरिका की देन मानते हैं। ग़ौरतलब है कि अमरीकी सिनेटर गेलार्ड नेलसन के प्रयासों के बहुत साल पहले महात्मा गाँधी ने भारतवासियों से आधुनिक तकनीकों का अन्धानुकरण करने के विरुद्ध सचेत किया था। गाँधीजी मानते थे कि पृथ्वी, वायु, जल तथा भूमि हमारे पूर्वजों से मिली सम्पत्ति नहीं है। वे हमारे बच्चों तथा आगामी पीढिय़ों की धरोहरें हैं। हम उनके ट्रस्टी भर हैं। हमें वे जैसी मिली हैं उन्हें उसी रूप में भावी पीढ़ी को सौंपना होगा। गाँधी जी का यह भी मानना था कि पृथ्वी लोगों की आवश्यकता की पूर्ति के लिये पर्याप्त है किन्तु लालच की पूर्ति के लिये नहीं। गाँधी जी का मानना था कि विकास के त्रुटिपूर्ण ढाँचे को अपनाने से असन्तुलित विकास पनपता है। यदि असन्तुलित विकास को अपनाया गया तो धरती के समूचे प्राकृतिक संसाधन नष्ट हो जाएँगे। वह जीवन के समाप्त होने तथा महाप्रलय का दिन होगा। गाँधीजी ने बरसों पहले भारत को विकास के त्रुटिपूर्ण ढाँचे को अपनाने के विरुद्ध सचेत किया था। उनका सोचना था कि औद्योगिकीकरण सम्पूर्ण मानव जाति के लिये अभिशाप है। इसे अपनाने से लाखों लोग बेरोजगार होंगे। प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होगी। बड़े उद्योगपति कभी भी लाखों बेरोजगार लोगों को काम नहीं दे सकते। गाँधी जी मानते थे कि औद्योगिकीकरण का मुख्य उद्देश्य अपने मालिकों के लिये धन कमाना है। विश्व पृथ्वी दिवस’ प्रत्येक वर्ष 22 अप्रैल को सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाता है। यह एक वार्षिक आयोजन है, जिसे विश्व भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्थन प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया जाताा है। विश्व पृथ्वी दिवस की स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन के द्वारा 1970 में एक पर्यावरण शिक्षा के रूप में की गयी और अब इसे 192 से अधिक देशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है। पृथ्वी हमारी धरोहर है, इसकी रक्षा करना हमारा कत्र्तव्य है। प्रकृति द्वारा कुछ चीजें उपहार के रूप में मिली हैं। प्रकृति ने हमें सूर्य, चाँद, हवा, जल, धरती, नदियां, पहाड़, हरे-भरे वन और धरती के नीचे छिपी हुई खनिज सम्पदा धरोहर के रूप में हमारी सहायता के लिए प्रदान किये हैं। मनुष्य अपनी मेहनत से धन कमा सकता है लेकिन प्रकृति की धरोहर को अथक प्रयास करने के पश्चात भी बढ़ा नहीं सकता। प्रकृति द्वारा दी गई ये सभी वस्तुएं सीमित हैं। विश्व पृथ्वी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण सुरक्षा के बारे में लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाना है। यह दिन इस बात के चिंतन-मनन का दिन है कि हम कैसे अपनी वसुंधरा को बचा सकते हैं। इस दिन लोग धरती की सुरक्षा से संबंधित अनेक बाहरी गतिविधियों में शामिल होते हैं जैसे नये पेड़-पौधों को लगाना, पौधा रोपण, सडक़ के किनारे का कचरा उठाना, गंदगियों का पुर्नचक्रण करना, ऊर्जा संरक्षण आदि। विभिन्न समाज सेवी संगठनों द्वारा इस दिन अनेक जन जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय को दर्शाने के लिये साथ ही पर्यावरण सुरक्षा के बारे में लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाने के लिये 22 अप्रैल को पूरे विश्व भर के लोगों के द्वारा एक वार्षिक कार्यक्रम के रुप में हर साल विश्व पृथ्वी पृथ्वी दिवस को मनाया जाता है। पहली बार, इसे 1970 में मनाया गया और उसके बाद से लगभग 192 देशों के द्वारा वैश्विक आधार पर सालाना इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई। विश्व पृथ्वी दिवस को एक वार्षिक कार्यक्रम के रुप में मनाने की शुरुआत इसके मुद्दे को सुलझाने के द्वारा पर्यावरणीय सुरक्षा का बेहतर ध्यान देने के लिये, राष्ट्रीय समर्थन प्राप्त करने के लिये के लिये की गयी। 1969 में, सैन फ्रांसिस्को के जॉन मैककोनल नाम के एक शांति कार्यकर्ता जो सक्रियता से इस कार्यक्रम को शुरु करवाने में शामिल थे, ने एक साथ मिलकर पर्यावरणीय सुरक्षा के लिये इस दिन को मनाने का प्रस्ताव रखा। 21 मार्च 1970 को वसंत विषुव में मनाने के लिये इस कार्यक्रम को जॉन मैककोनेल ने चुना था जबकि 22 अप्रैल 1970 को इस कार्यक्रम को मनाने के लिये अमेरिका के विंसकॉन्सिन सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन ने चुना था।
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