चीन पर निर्भरता को कम करने की आवश्यकता




कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले सबसे पहले चीन में सामने आए और इसके कुछ माह बाद ही इसने वैश्विक महामारी का रूप धारण कर लिया। इस महामारी के कारण वैश्वीकृत हो चुकी दुनिया की एक-दूसरे के साथ मजबूती से जुड़ी हुई प्रणालियां पूरी तरह से बदल गई हैं। इस वायरस के प्रकोप पर काबू करने के प्रयास के तौर पर अलग-अलग देशों की सरकारों ने लोगों की आवाजाही तथा आपसी मेल-जोल पर बंदिशें लगा दी हैं जिस कारण दुनिया की एक-तिहाई से अधिक आबादी इस समय अपने घरों में बंद रहने को मजबूर है। कोविड-19 के कारण वैश्विक स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है और अनेक लोगों के लिए लॉकडाउन एक नया ‘नियम’ बन गया है और अब यह धारणा तेजी से बन रही है कि आने वाले समय में जब तक कोरोना वायरस खत्म होगा, तब तक दुनिया की सूरत हमेशा-हमेशा के लिए बदल जाएगी। आज इस बात को लेकर आम सहमति है कि अगले डेढ़ से दो साल तक पूरी दुनिया किसी न किसी रूप से संभवत: कोविड-19 के खतरे से ही जूझती रहेगी और उसके बाद भी पुनर्निर्माण और इसके स्थाई प्रभाव कई वर्षों तक महसूस किए जाते रहेंगे। फिलहाल कई लोगों को यह पता नहीं है कि यह संकट किस रूप में सामने आएगा। आज की सर्वोच्च प्राथमिकता जीवन बचाना है। जीवन बचाने का यह उद्देश्य भविष्य की सफलता है, लेकिन भविष्य में सफल होने के लिए दुनिया के देशों को मिलकर इसके लिए योजना बनानी चाहिए। यह महामारी इस अप्रत्याशित दुनिया में छात्रों को समुचित निर्णय लेने, किसी समस्या का रचनात्मक तरीके से समाधान करने और सबसे महत्वपूर्ण अनुकूलनशीलता जैसे विशेष प्रकार के कौशल सीखने की आवश्यकता के प्रति सजग कर रही है। इसमें कोई दोराय नहीं कि भारत की शिक्षा प्रणाली में काफी गड़बडिय़ां हैं और शायद यही कारण है कि छात्र अपनी नियमित शैक्षणिक दिनचर्या का पालन करने में असमर्थ रहते हैं। इस आपात स्थिति के मद्देनजर और छात्रों की सुरक्षा एवं उनकी अकादमिक चिंता को ध्यान में रखते हुए आज अधिकांश शैक्षणिक संस्थानों ने दूरसंचार के विभिन्न माध्यमों, स्काइप कॉल, जूम कॉल और अन्य वर्चुअल विकल्पों को सुलभ कराने की पहल की है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पैदा हुए हालिया व्यवधान को तात्कालिक उपायों से दूर किया जा सके। आजकल ये तात्कालिक उपाय आभासी कक्षाओं और सूचनाओं के आदान-प्रदान की सुविधा के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए छात्रों और शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। नि:संदेह छात्रों के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण समय है। इस कदम का उद्देश्य छात्रों पर दबाव को कम करना और गुणवत्ता के साथ किसी तरह का समझौता किए बिना अपने समय का लाभकारी तरीके से उपयोग करने में मदद करना है। यदि हम भारत और चीन की अर्थव्यवस्था का तुलनात्मक अध्ययन करें तो आज से महज 35 वर्ष पहले भारतीय और चीनी अर्थव्यवस्था का निर्यात लगभग बराबर था, लेकिन बाजार के अनुकूल व्यापक सुधार के कारण इन वर्षों के दौरान चीन की अर्थव्यवस्था में काफी बड़े पैमाने पर विकास हुआ। इस लिहाज से यदि हम देखें तो भारत में अभी बड़े पैमाने पर विकास की संभावना है। बस आवश्यकता इस बात की है कि नए परिदृश्य में हम चीजों को नए तरीके से सामने लाएं। अगर इस महामारी ने हमें कुछ सिखाया है तो वह यह है कि चीन पर अत्यधिक निर्भरता को काफी हद तक कम करने की आवश्यकता है। यह सोच दुनिया के कई हिस्सों में तेजी से विकसित हो रही है। हालांकि इस महामारी के समय प्रौद्योगिकी की मदद से डिजिटल विश्व तेजी से उभर रहा है। हर कोई घर में बैठा है और दुनिया के साथ उनके संपर्क का माध्यम स्मार्टफोन बन गया है। महामारी के बाद उभरने वाली दुनिया में आज की तरह हर जगह प्रौद्योगिकी होगी और तकनीकी कंपनियां और भी अधिक शक्तिशाली बन जाएंगी और उनका अधिक वर्चस्व होगा। कोविड-19 के बाद की दुनिया में, इस बात का अनुमान है कि हमारे पास कम टच स्क्रीन होंगे और अधिक से अधिक वॉयस इंटरफेस और मशीन विजन इंटरफेस होंगे। बहुत से लोग जब पीछे मुडकऱ देखेंगे तो पाएंगे कि उनके जीवन की कई चीजें बदल गईं। हमारे जीवन में बहुत कुछ आदतन है और हमारी ये आदतें हमें काम करने में, हमारे परिवार की देखभाल करने में और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में काफी प्रभावी तरीके से मदद करती हैं। इस व्यवस्था को जब झटका लगता है तो हमारी आदतें बदलती हैं। लोगों के काम करने एवं आने-जाने के तौर-तरीके बदल जाते हैं, उनकी रोजमर्रा की दिनचर्या और उनके जीवन की लय बदल जाती है। उनके खाने-पीने और अपने परिवार के साथ संवाद करने के तरीके बदल जाते हैं। जब लोग चीजों को अलग तरीके से करने को मजबूर होते हैं तो नई आदतें जन्म लेने लगती हैं। यह महामारी किसी युद्ध से अलग है, लेकिन इस पर विजय के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है। जब लोगों को अहसास होगा कि सामूहिक कार्रवाई से क्या हासिल हो सकता है तब इस बात में बदलाव आ सकता है कि हम कैसे एकदूसरे से जुड़े हुए हैं और इसका परिणाम यह होगा कि समुदाय की एक व्यापक भावना पैदा होगी। हमें यह सुनिश्चित करना है कि इस महामारी के लिए जो बदलाव हो वह बेहतरी के लिए हो।
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