विशाखापट्टनम में जहरीली गैस रिसाव से 11 की मौत, 800 लोगों का चल रहा इलाज

LIVE Vizag Gas Leak: हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 11 हुई, 800 लोग अस्पताल में भर्ती

विशाखापत्तनम. आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बृहस्पतिवार तडक़े एक पॉलिमर संयंत्र से गैस रिसाव के बाद एक बच्चे समेत 11 लोगों की मौत हो गई और 800 ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह जानकारी स्थानीय प्रशासन मामलों के मंत्री ने दी है। अधिकारियों के मुताबिक, गैस रिसाव ने संयंत्र के पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित गांवों को प्रभावित किया है। आंध्र प्रदेश सरकार ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डी गौतम सवांग ने बताया कि मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने हालात का जायजा लेने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की थी और मामले की जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी घटना पर करीब से निगाह रख रहे हैं। रेड्डी ने जिंदगियां बचाने और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए हरसंभव कदम उठाने के लिए जिले के अधिकारियों से कहा है। उनके कार्यालय ने ट्वीट किया कि मुख्यमंत्री विशाखात्तनम में किंग जॉर्ज अस्पताल जाएंगे जहां बीमारों का इलाज चल रहा है।  विशाखापत्तनम के पास गोपालपत्तनम के तहत आने वाले वेंकेटपुरम गांव में स्थित एलजी पॉलिमर्स लिमिटेड के संयंत्र से स्टाइरीन गैस के रिसाव के कारण 11 लोगों की मौत हो गई।
उन्होंने यहां मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद कहा कि विशाखापत्तनम के किंग जॉर्ज अस्पताल में कम से कम 800 लोगों का इलाज चल रहा है और उनमें से 20 वेंटिलेटर पर हैं। दक्षिण कोरिया की कंपनी एलजी पॉलिमर्स पॉलीस्टीरीन और कई कामों में आने वाला प्लास्टिक बनाती है जिसका इस्तेमाल अलग अलग तरह के उत्पाद बनाने में होता है जैसे खिलौने। यह 1961 से संचालित है। विशाखापत्तनम जिले के संयुक्त कलेक्टर वेणुगोपाल रेड्डी ने कहा कि आर आर वेंकेटपुरम गांव के सभी लोगों को वहां से निकाल के सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है। आर आर वेंकेटपुरम से सभी 800 से ज्यादा लोगों को निकाल लिया गया है। उनमें से कई को सिर्फ प्राथमिक उपचार की जरूरत थी। बचाव अभियान के लिए गए कई पुलिस कर्मियों को भी सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन जैसे लक्षण हुए और वे बेहोश हो गए। सूत्रों ने बताया कि संयंत्र के 20 कर्मी सुरक्षा प्रोटोकॉल से अच्छी तरह वाकिफ थे और उन्होंने उचित कदम उठाए थे जिस वजह से वे प्रभावित नहीं हुए। स्टाइरीन गैस आसपास के गांवों में फैल गयी और सोते हुए लोगों को अपनी चपेट में ले लिया।

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